Wednesday, June 15, 2011

अंतिम जिरह पूरी, राणा पर फैसले का इंतजार


पक्ष और बचाव पक्ष की अंतिम जिरह पूरी हो गई है। अभियोजन पक्ष ने मुख्य आरोपी डेविड कोलमैन हेडली के साथ जुर्म कबूलने के लिए की गई सौदेबाजी (प्ली बार्गेन) का बचाव करते हुए कहा कि इससे अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी एफबीआइ को लश्कर-ए-तैयबा के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हुई। वहीं बचाव पक्ष ने राणा को हेडली उर्फ दाऊद गिलानी के हाथों छले गए व्यक्ति के रूप में पेश किया। मुख्य आरोपी हेडली मुंबई हमलों में अपनी भूमिका स्वीकार चुका है। उसे वर्ष 2009 में शिकागो में गिरफ्तार किया गया था। सरकारी अटार्नी विकी पीटर्स ने 12 सदस्यीय ज्यूरी के समक्ष कहा, गिरफ्तारी के दो हफ्ते के भीतर पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी हेडली ने लश्कर के ढांचे और आतंकी योजनाओं की संपूर्ण जानकारी मुहैया कराई थी। उन्होंने भारत का नाम लिए बगैर कहा कि इसे अन्य देशों की सरकारों के साथ भी साझा किया गया। इससे कई आतंकी हमलों को रोकने में मदद भी मिली। प्ली बार्गेन के तहत हेडली को मौत की सजा नहीं दी जा सकती। साथ ही ही उसे पाकिस्तान, भारत या डेनमार्क प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता। पीटर्स ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि हेडली खतरनाक शख्स है। हमलों को अंजाम देने के लिए ढेर सारी योजनाओं और कई लोगों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, हेडली साजिश का बहुत बड़ा हिस्सा था। राणा ने उसकी भारत यात्रा और वहां व्यवसाय करने में मदद दी। उन्होंने कहा कि प्ली बार्गेन के तहत हेडली को सजा-ए-मौत नहीं दी जा सकती लेकिन सरकार ज्यूरी से आग्रह करती है कि उसे उतने वर्षो की कारावास सजा सुनाए जो उन्हें उपयुक्त लगे। करीब एक पखवाड़े तक चली सुनवाई के दौरान राणा ने चुप रहने का विकल्प चुना और गवाही नहीं दी। 50 वर्षीय चिकित्सक राणा पर मुंबई हमलों की साजिश के दौरान हेडली की मदद करने और उसे साजोसामान मुहैया कराने का आरोप है। दोष साबित होने पर उसे उम्र कैद हो सकती है। मुंबई पर वर्ष 2008 में हुए हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी। मामले की सुनवाई कर रही संघीय ज्यूरी अब इस मामले में अंतिम विचार-विमर्श शुरू करने वाली है ताकि राणा के भाग्य का फैसला हो सके। जिरह के समाप्त होने के दौरान राणा थोड़ा तनावग्रस्त नजर आया। राणा के वकील का तर्क : राणा के वकील पैट्रिक ब्लेगन ने हेडली को ऐसा व्यक्ति बताया, जिसने एफबीआइ समेत सबको बेवकूफ बनाया। अपनी भावनात्मक अपील में बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उसका मुवक्किल एक धार्मिक व्यक्ति है, जिसे हेडली ने अपनी आतंकवादी योजनाओं को अंजाम देने के लिए धोखा दिया। ब्लेगन ने कहा, हेडली को यह मौका मत दीजिए कि वह आपको भी बेवकूफ बना दे। इस मामले में राणा को दोषी मत ठहराइए। उन्होंने कहा कि राणा एक साधारण व्यवसायी था। उसकी रुचि मुंबई, लाहौर, कराची और डेनमार्क समेत समुद्र पार के देशों में अपने व्यवसाय को बढ़ाने में थी। इस योजना का फायदा उठाते हुए हेडली ने उसे छला और उसके व्यवसाय का उपयोग पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ और लश्कर-ए-तैयबा के नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए किया। उन्होंने कहा हेडली ने अपने और अपने परिवार के लिए राणा की बलि दे दी। सुनवाई के दौरान सरकारी गवाह बने हेडली ने पांच दिन तक गवाही दी और मुंबई हमलों में आइएसआइ की भूमिका के बारे में कई रहस्योद्घाटन किए।


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