Tuesday, June 14, 2011

आतंकवाद के गढ़ पर जुलाई तक चढ़ाई करे पाकिस्तान


अमेरिका के निरंतर दबाव के चलते उत्तर वजीरिस्तान में सैन्य कार्रवाई करने के लिए हाल में राजी पाकिस्तान को ओबामा प्रशासन ने जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है। दूसरी ओर पाकिस्तान सेना के लेफ्टिनेंट जनरल आसिफ यासीन मलिक ने उत्तर वजीरिस्तान में कार्रवाई की बात से इंकार किया है। उन्होंने बुधवार को कहा, अमेरिकी दबाव में उत्तर वजीरिस्तान में कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता। हम वहां तभी अभियान चलाएंगे जब हमें ठीक लगेगा और अभी हमारी सेना कई अन्य कबाइली इलाकों में कार्रवाई कर रही है। वह उत्तर वजीरिस्तान में हमले के लिए तैयार नहीं है। कुछ दिनों पहले अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान का दौरा किया था और इस यात्रा के दौरान पाक सरकार ने उत्तर वजीरिस्तान में कार्रवाई की बात कही थी। अफगानिस्तान में लड़ रही नाटो सेना के लिए परेशानी का सबब बन चुके तालिबान के हक्कानी गुट का सफाया करने के लिए अमेरिका इस्लामाबाद पर लगातार दबाव बना रहा है, लेकिन इसकी संभावना कम ही है। समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाक सेना उत्तर वजीरिस्तान में सीमित कार्रवाई कर सकती है, लेकिन वह हक्कानी गुट के लड़ाकों को निशाना बनाएगी इसकी संभावना बेहद कम है। हालांकि रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि सैन्य कार्रवाई कब से शुरू होगी। द न्यूज ने खबर दी है कि अमेरिका ने उत्तर वजीरिस्तान में सैन्य अभियान शुरू करने के लिए पाकिस्तान को जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की पहली चरणबद्ध वापसी जुलाई में ही शुरू होनी है। अमेरिका ने कहा है कि अल जवाहिरी, मुल्ला उमर, इलियास कश्मीरी, सिराजुद्दीन हक्कानी और अतिया अब्दुर रहमान को जुलाई तक की समय सीमा के भीतर या तो एकतरफा कार्रवाई कर पकड़ा जाए या फिर अमेरिका के साथ मिलकर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की जाए। जुलाई के महीने से नाटो और सहयोगी बल भी अफगानिस्तान से हटना शुरू होंगे। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तरी वजीरिस्तान स्थित हक्कानी नेटवर्क के आतंकवादी पाक के लिए खतरा नहीं हैं। यह अफगान तालिबान तथा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के बीच संपर्क के व्यापक माध्यम के रूप में काम करता रहा है। एबटाबाद में अमेरिकी कार्रवाई की जांच के लिए आयोग प्रमुख नियुक्त पाकिस्तान ने एबटाबाद में अमेरिकी नौसैन्य सील कमांडो द्वारा अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारे जाने की घटना की जांच के लिए आयोग का गठन किया है। प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी द्वारा गठित किए गए पांच सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जावेद इकबाल को बनाया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मंगलवार को जारी किए गए वक्तव्य में यह जानकारी दी गई। बयान में कहा गया कि आयोग पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी के बारे में पता लगाने के साथ एबटाबाद में दो मई के अमेरिकी अभियान के संबंध में परिस्थितियों तथा तथ्यों की जांच करेगा। इस मामले को लेकर अधिकृत संस्थाओं द्वारा बरती गई कोताही की भी जांच की जाएगी। आयोग के अन्य सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य जज फखरुद्दीन जी. इब्राहीम के अलावा सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अहमद, पूर्व पुलिस अधिकारी अब्बास खान और पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी हैं। काजी नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायुक्त रह चुके हैं। पाकिस्तान के मंत्रिमंडल सचिव, आयोग के सचिव के रूप में काम करेंगे।


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