मुंबई पर आतंकी हमले के सह आरोपी पाकिस्तानी मूल के कनाडाई आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ही जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को हथियार की आपूर्ति करता है। शिकागो की अदालत में मुकदमे का सामना करे राणा ने पूछताछ में अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआइ को बताया कि आतंकियों को भारतीय सीमा में प्रवेश से ठीक पहले आइएसआइ ने उन्हें हथियार थमा देती है। शिकागो की अदालत में हो रही सुनवाई के दौरान पहली बार राणा से पूछताछ संबंधी वीडियो को सार्वजनिक किया गया। इसमें राणा को मुंबई हमले के सहआरोपी एवं लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से हुई बातचीत के बारे में जानकारी देते हुए दिखाया गया है। हेडली ने ही मुंबई में हमले के लिए ठिकानों की पहचान की थी, जिन्हें 26 नवंबर 2008 को आतंकियों ने अपना निशाना बनाया था। 18 अक्टूबर 2009 को हुई पूछताछ से संबंधित 17 मिनट के सात वीडियो टेपों को अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर साक्ष्य के रूप में लगाया गया है। इसके अनुसार अमेरिका में पैदा हुए लश्कर आतंकवादी हेडली ने राणा से वादा किया था कि वह पाकिस्तान लौटेगा और पाकिस्तानी सेना के साथ राणा के मामले को सुलझाएगा, जिसने उसे भगोड़ा घोषित कर रखा है। राणा को पाकिस्तान स्थित ग्लेशियर क्षेत्र में तैनात किया गया था, जहां उसने जाने से इंकार कर दिया। बाद में उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया। एफबीआइ एजेंट जेफ्री पार्सन ने सोमवार को अदालत के समक्ष पेश होकर कहा था कि हेडली ने राणा का पक्ष लेने के लिए अपने निजी संबंधों का इस्तेमाल किया। एफबीआइ एजेंट बेनाबिड्स और पार्सन ने राणा की अक्टूबर 2009 में गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की थी। राणा को यह अच्छी तरह से पता था कि उसके बयान को मुकदमे में उसके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। उसने एफबीआइ को बताया कि हेडली ने उसे बताया था कि आइएसआइ कश्मीर की आजादी के लिए लड़ने वालों को हथियार उपलब्ध करा रहा है। आइएसआइ, हथियार और हेडली की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर राणा ने कहा कि हेडली के मुताबिक आइएसआइ कश्मीर में आतंकियों को हथियार मुहैया कराती है। हेडली ने बताया कि जब वे (आतंकी) भारत में प्रवेश करने वाले होते थे तब वे एक-दूसरे को अलविदा कहते। उसी समय आइएसआइ उन्हें हथियार देती थी। भगोड़ा घोषित किए जाने से पहले पाकिस्तानी सेना का नियमित कैप्टन रहे राणा ने कहा कि मेजर इकबाल हेडली का आइएसआइ में संपर्क सूत्र था। उसने यह भी बताया कि उसने एक बार इकबाल से फोन पर बात की थी। राणा ने एफबीआइ से यह भी कहा कि हेडली आइएसआइ और लश्कर-ए-तैयबा दोनों से जुड़ा हुआ था। इसके साथ ही उसने इलियास कश्मीरी से भी मुलाकात की थी जो उस समय एक अन्य आतंकवादी समूह हरकत उल जिहाद इस्लामी का कमांडर था। हेडली ने मेजर इकबाल से राणा की पाकिस्तानी सेना से सम्मानजनक विदाई में मदद करने के लिए कहा था ताकि वह व्यापार और निजी कार्यो के लिए देश की यात्रा कर सके। यह पूछे जाने पर कि हेडली उसकी सहायता क्यों कर रहा था, राणा ने कहा कि मित्रता के कारण। पूछताछ के दौरान राणा ने कहा कि उसके लिए भारत की यात्रा करना आसान था, लेकिन पाकिस्तान जाना असंभव था क्योंकि वह पाकिस्तानी सेना का भगोड़ा था। राणा ने इस वीडियो में यह भी कहा कि हेडली ने उसे बताया कि हालांकि आइएसआइ को पता था कि वह लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करता था, लेकिन लश्कर को उसके खुफिया एजेंसी से संबंधों की जानकारी नहीं थी।
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