Wednesday, June 15, 2011

रहस्य ही रह जाएगा राणा की दोषमुक्ति का फैसला


शिकागो अदालत में 12 सदस्यीय ज्यूरी द्वारा मुंबई हमले के सहआरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को दोषमुक्त करार दिए जाने और इस फैसले के बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बताने के बाद ऐसा लगता है कि यह सदा के लिए रहस्य ही बना रहेगा कि आखिर राणा को किस आधार पर दोषमुक्त करार दिया गया। ज्यूरी द्वारा मीडिया को कुछ नहीं बताने और अपनी पहचान गुप्त रखने के बाद अब मीडिया और विशेषज्ञ इस विषय पर सिर्फ अटकलें ही लगा पाएंगे। ज्यूरी के निवेदन के बाद यह निर्णय लिया गया था कि इसके सभी 12 सदस्यों की पहचान कभी भी नहीं बताई जाएगी और इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। दूसरी तरफ इस फैसले से न सिर्फ मुंबई हमले के पीडि़तों को निराशा हुई है बल्कि भारत और अमेरिकी सरकार भी निराश हैं। इस फैसले के बाद जो सबसे बड़ा सवाल उभरकर आया है वह यह है कि कैसे कोई मुंबई हमलों के जिम्मेदार आतंकवादी संगठन को सहायता तो मुहैया करा सकता है लेकिन खुद उस हमले में संलिप्त नहीं हो सकता। इस बारे में अभी तक सबसे करीबी स्पष्टीकरण अमेरिकी अटॉर्नी पैट्रिक फिट्जगेराल्ड की तरफ से दिया गया। फैसले के तुरंत बाद उन्होंने कहा कि उनके अनुसार मुंबई मामले में राणा को दोषमुक्त इसलिए करार दिया गया क्योंकि अभियोजक यह सिद्ध करने में नाकाम रहे कि मुंबई हमला होने से पहले राणा को इसके बारे में जानकारी थी। फिट्जगेराल्ड ने कहा था कुल मिलाकर मैं निराश नहीं हूं। मैं सिर्फ मुंबई मामले में दोषमुक्ति (राणा की) से निराश हूं लेकिन कुल मिलाकर मैं संतुष्ट हूं क्योंकि दो अन्य मामलों का दोष बहुत गंभीर हैं। दूसरी तरफ, राणा के वकील चार्ली स्विफ्ट का मानना है कि ज्यूरी ने सबूतों के आधार पर फैसला दिया। चार्ली ने कहा सबूत साफ थे कि मुंबई आतंकवादी हमलों में राणा का हाथ नहीं था। इससे पहले शिकागो की अदालत ने राणा को पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को मदद देने और डेनमार्क में हमले की साजिश रचने के मामले में दोषी करार दिया था जबकि सबसे संगीन यानी मुंबई हमले की साजिश में शामिल होने के आरोप से उसे मुक्त कर दिया गया। 26/11 हमला : बचाव पक्ष को सात दिन के भीतर कागजात देने के आदेश इस्लामाबाद, एजेंसी : पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने मुंबई हमलों के मामले में शनिवार को बचाव पक्ष के वकील को प्रमुख भारतीय गवाहों के बयानों की प्रतियों और अन्य प्रासंगिक दस्तावेज सौंपे जाने के लिए अभियोजन पक्ष को एक सप्ताह का समय दिया। 26/11 हमलों की साजिश रचने के आरोप में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जकी उर रहमान लखवी सहित सात आरोपियों के खिलाफ अदालत मामले की सुनवाई कर रही है। सुरक्षा कारणों से मामले की सुनवाई रावलपिंडी की अदियाला जेल में हो रही है। सूत्रों के मुताबिक अभियोजन पक्ष सुनवाई के दौरान न्यायाधीश राणा निसार अहमद के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने में नाकाम रहा। अभियोजन पक्ष द्वारा एक सप्ताह समय मांगे जाने के बाद जज ने उन्हें 18 जून तक समय दे दिया और कार्यवाही को स्थगित कर दिया। इससे पहले 28 मई को अंतिम सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने निसार अहमद से कहा कि भारत सरकार ने पाकिस्तानी न्यायिक आयोग के साथ सहयोग करने, गवाहों और अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति देने का आश्र्वासन दिया है। जज ने उनसे भारत द्वारा भेजे गए लिखित पत्रों के साथ अपने दावे की पुष्टि के लिए सबूत देने को कहा था। सूत्रों ने बताया कि यह मामला अगली सुनवाई में भी उठ सकता है.



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