Friday, December 2, 2011

देश के कई शहरों में तबाही की तैयारी में थे आतंकी


देश के कई बड़े शहरों में तबाही टल गई। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बुधवार को छह दिसंबर तथा नव वर्ष पर बड़ी आतंकी वारदात की साजिश रच रहे इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) के छह आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आतंकियों में एक पाकिस्तानी नागरिक और चार बिहार के हैं। दिल्ली, बिहार के मधुबनी और चेन्नई से पकड़े गए इन आतंकियों के कब्जे से दो एके 47 राइफल, 9 एमएम पिस्टल, साढ़े तीन किलो विस्फोटक (1.4 किलोग्राम काला व 2 किलोग्राम सफेद विस्फोटक), 5 डेटोनेटर और दो लाख रुपये की जाली करेंसी बरामद हुई है। इनका मास्टर माइंड शाहरुख उर्फ इमरान पुलिस की पकड़ से बच निकला। स्पेशल सेल की आधा दर्जन टीमें फरार आतंकियों की गिरफ्तारी के लिए देशभर में छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि ये आतंकी मॉड्यूल पुणे में 2010 में जर्मन बेकरी, 2010 में ही बेंगलूर के चिन्नास्वामी स्टेडियम में विस्फोट कर चुके हैं। इसके अलावा राष्ट्रमंडल खेल से पूर्व राजधानी में जामा मस्जिद के बाहर विदेशी सैलानियों की बस पर ताबड़तोड़ फायरिंग में भी शामिल रहे हैं। पाकिस्तानी नागरिक अजमल ने बाइक पर पीछे बैठकर सैलानियों पर फायरिंग की थी। इस हमले में दो विदेशी सैलानी घायल हुए थे। सूत्रों के अनुसार पुलिस को इस मॉड्यूल के कमांडर बप्पा के चेन्नई में मौजूद होने की सूचना थी, लेकिन छापे से ठीक पहले वह वहां से खिसक गया। मॉडयूल में चार आतंकी अभी और हैं। गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, पिछले छह दिनों में छह संदिग्ध आतंकी पकड़े गए हैं। इन लोगों के बारे में जांच अभी चल रही है और हमारा मानना है कि ये आतंकी जर्मन बेकरी बम धमाका, चिन्नास्वामी स्टेडियम बम धमाका और जामा मस्जिद के बाहर गोली कांड में शामिल रहे हैं। 

Saturday, October 15, 2011

आतंकियों की तलाश में पुलिस टीम जम्मू रवाना


अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की पार्किग में विस्फोटक से भरी इंडिका कार लाने वाले संदिग्ध आरोपियों की तलाश में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की एक टीम जम्मू पहुंच गई है। स्पेशल सेल की टीम ने जांच कार्य में जम्मू व कश्मीर पुलिस से सहयोग मांगा है। उधर, अंबाला में मामले की जांच कर रही स्पेशल सेल की एक अन्य टीम खालिस्तान टाइगर फोर्स व बब्बर खालसा इंटरनेशनल नामक आतंकी संगठनों के नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है। बुधवार देर शाम अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की पार्किंग से विस्फोटक भरी एक हरियाणा नंबर की इंडिका कार बरामद की गई थी। इस बीच स्पेशल सेल की एक टीम जम्मू व कश्मीर पहुंचकर लश्करे ए तैयब्बा के उस मॉडयूल की तलाश में जुट गई है, जिन्होंने विस्फोटक से भरी इंडिका कार अंबाला तक भेजी थी। सूत्रों का कहना है कि विस्फोटक जम्मू से भेजी गई थी लेकिन इस शहर के किस स्थान से यह विस्फोटक भेजा गया था, इसकी जानकारी अब तक सुरक्षा एजेंसियों को नहीं हो पाई है। स्पेशल सेल ने जम्मू में लश्करे ए तैयबा के मॉडयूल की तलाश के लिए जम्मू व कश्मीर पुलिस का सहयोग मांगा है। सूत्रों का कहना है कि अंबाला में हरियाणा पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन में जुटी स्पेशल सेल को खालिस्तान टाइगर फोर्स व बब्बर खालसा के नेटवर्क के बारे में काफी अहम जानकारी हासिल हुई है। जानकारी के आधार पर दोनों राज्यों की पुलिस ने पंजाब के कुछ स्थानों पर छापेमारी भी की है। बताया जाता है कि खालिस्तान टाइगर फोर्स का प्रमुख जगतार सिंह तारा व बब्बर खालसा इंटरनेशनल का मुखिया बाधवा सिंह इन दिनों पाकिस्तान में छिपे हैं और उन्होंने यह विस्फोटक की यह खेप लश्कर की मदद से अंबाला तक पहुंचवायी थी, हालांकि अभी तक यह ज्ञात नहीं हो पाया है कि विस्फोटक की यह खेप किसे दिया जाना था, फिलहाल पुलिस ने इस बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

Monday, October 3, 2011

दिल्ली हाईकोर्ट विस्फोट आरडीएक्स हुआ इस्तेमाल

दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर 7 सितंबर को हुए विस्फोट में घातक आरडीएक्स के इस्तेमाल की रिपोर्ट देश की एक फोरेंसिक लैब ने दी है। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने कहा, एक एफएसएल ने रिपोर्ट दी है कि दिल्ली च्च्च न्यायालय के बाहर हुए विस्फोट में आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। सिंह ने यहां एक समारोह के दौरान बताया कि मामले में जांच चल रही है। पल-पल की जानकारी नहीं दी जा सकती। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) मामले की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को कई ई-मेल भी मिल चुके हैं जिनमें विस्फोट की जिम्मेदारी ली गई है।च्उच्च न्यायालय के बाहर हुए विस्फोट में इस्तेमाल विस्फोटक की फोरेंसिक जांच दिल्ली, हैदराबाद और गुजरात की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के अलावा एनएसजी की फोरेंसिक लैब ने भी की थी। इस बीच सरकारी सूत्रों ने कहा कि गुजरात की लैब की रपट कुछ कहती है जबकि केंद्रीय फोरेसिंक साइंस लैबोरेटरी (सीएफएसएल) की रपट में कुछ और निष्कर्ष है। लेकिन हम सीएफएसएल के निष्कर्षो को ही मानेंगे। एनएसजी की फोरेंसिक जांच में भी नाइट्रेट आधारित विस्फोटक के इस्तेमाल की बात कही गई है।

दिल्ली को आतंकी हमलों से बचाने को केंद्र व राज्य तलब

 नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आतंकी हमले रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाने की एक याचिका पर बुधवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने दोनों सरकारों से छह हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। दोनों सरकारों को राजधानी में आतंकवादी घटनाओं को रोकने के लिए उपयुक्त प्रबंध करने संबंधी याचिका को संज्ञान में लिया। 22 सितंबर को यह याचिका न्यायमूर्ति आर एस एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष आई थी। जिसे उन्होंने यह कहते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई करने वाली दो सदस्यीय खंडपीठ के पास भेज दिया कि यह मामला जनहित से जुड़ा है। यह याचिका सोसायटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म ने दायर की है। जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वह ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष प्रबंध करे। जिसके लिए अलग-अलग इलाकों में रेपिड एक्शन फोर्स व नेशनल सिक्योरटी गार्ड को तैनात किया जाए। इतना ही नहीं निश्चित समय में एनएसजी बैटालियन के स्टेशन भी बना दिए जाए। इस तरह की गतिविधियों से निपटने के लिए पुलिस को भी विशेष ट्रेनिंग दी जाए। इतना ही नहीं एक केंद्रित इंटेलिजेंस सिस्टम भी बनाया जाना चाहिए। सात सितंबर को हाईकोर्ट के बाहर हुई घटना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को आपदा प्रबंधन एजेंसियों को उपयुक्त उपकरण,वाहन आदि सुविधा देनी चाहिए ताकि घटना के समय वह ठीक से काम कर पाए। इतना ही नहीं आतंकवादी घटनाओं जैसी विशेष परिस्थितियों से निपटने के लिए एक उपयुक्त आपदा प्रबंधन कमेटी गठित की जानी चाहिए। निचली अदालत,हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के अलावा अलग-अलग जगहों पर सीसीटीवी भी लगाए जाए। देश की राजधानी दिल्ली अब तक सबसे अधिकआतंकियों का निशाना बनी है

अफजल के माफी प्रस्ताव पर कश्मीर विधानसभा में उपद्रव

 श्रीनगर जम्मू कश्मीर विधानसभा बुधवार को राजनीतिक अखाड़ा बन गई। संसद हमले के दोषी मो. अफजल की फांसी माफी के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस और भाजपा विधायकों में जोर आजमाइश हुई। नारेबाजी-हंगामे के बीच कोई मेज पर चढ़ गया तो कोई पंखों और कुर्सियों को लात से गिराता नजर आया। पैंथर्स पार्टी और जम्मू स्टेट मोर्चा ने भी हंगामे में भाग लिया। अलबत्ता, नेशनल कांफ्रेंस व पीडीपी लगभग मौन रही। हंगामे के चलते सजा माफी का प्रस्ताव पेश नहीं हो पाया। बाद में स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेसी सदस्यों ने विस अध्यक्ष मुहम्मद अकबर लोन से पूछा, भाजपा ने रिश्वतखोरी व क्रॉस वोटिंग के आरोप में जिन सात विधायकों को निलंबित किया है। वे यहां क्यों और किसके लिए हैं। स्पीकर के जवाब देने से पहले ही भाजपा,पैंथर्स पार्टी और जम्मू स्टेट मोर्चा के विधायकों ने अफजल की सजा माफी प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए देश के गद्दारों को बाहर करो की नारेबाजी शुरू कर दी। जवाब में कांग्रेसी रिश्वतखोर एमएलए बाहर करो का नारा लगाते हुए सदन के बीच में आ गए। विस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री तारांचद के समझाने पर भी विधायक शांत नहीं हुए। इसी दौरान भाजपा के अशोक खजूरिया और निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद में तकरार होने लगी। हालांकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सदन में ही मौजूद थे, लेकिन उन्होंने विधायकों को शांत करने का कोई प्रयास नहीं किया। हंगामा न थमने पर सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा सदस्यों ने अफजल संबंधी प्रस्ताव रद करने को कहा। फिर हंगामा होने पर कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित हो गई। बाद में अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए ही स्थगित कर दिया। वहीं, पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने सदन में हुए हंगामे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे सुनियोजित ड्रामा बताया। उन्होंने कहा, इस ड्रामे में नेकां डायरेक्टर तो कांग्रेस व भाजपा ने एक्टर की भूमिका निभाई। उमर ने पत्रकारों से कहा कि अफजल को फांसी दिए जाने पर जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में नकारात्मक असर पड़ेगा। आतंकी हिंसा बढ़ेगी क्योंकि अलगाववादियों को मकबूल भट के बाद दूसरा हीरो मिल जाएगा।

भागे आतंकियों की तलाश में जुटी सेना

श्रीनगर कुपवाड़ा जिले के जंगलों में गत चार दिनों से घुसपैठियों और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ गुरुवार की देर शाम गए समाप्त हो गई। इस मुठभेड़ में पांच आतंकियों के मारे जाने के अलावा दो पुलिसकर्मी, एक कैप्टन और एक सैन्यकर्मी शहीद हुए हैं। उधर, मारे गए आतंकियों के कथित तौर पर बच निकले साथियों की धरपकड़ के लिए सेना के जवानों का तलाशी अभियान जारी है। गौरतलब है कि सोमवार को जिला कुपवाड़ा के करालपोरा कस्बे से करीब दस किलोमीटर दूर अवथकुल जंगल में आतंकियों के छिपे होने की सूचना के आधार पर सेना और पुलिस ने मिलकर तलाशी अभियान चलाया था। पहले दिन इस मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए थे जबकि एक पुलिसकर्मी शेराज अहमद शहीद हुआ था। दो अन्य सुरक्षाकर्मी सोमवार की रात को घायल भी हुए थे। दूसरे दिन मंगलवार को एक आतंकी मारा गया और संगवाली, घगवाल जम्मू का रहने वाला कैप्टन सुशील खजुरिया अपने दो घायल साथियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के क्रम में आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए थे। पंाचवां आतंकी गत बुधवार की शाम को मारा गया। इस दौरान एक और पुलिसकर्मी व सैन्यकर्मी भी शहीद हो गए। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि वीरवार शाम को यह मुठभेड़ समाप्त हो गई है। पुलिस ने पांच आतंकियों के शव को स्थानीय समिति को सौंप दिए हैं। एसपी कुपवाड़ा वीके विर्दी ने बताया कि आतंकियों के खिलाफ अभियान जारी है। अभी भी तीन से चार आतंकी और जिंदा हो सकते हैं। अवथकुल जंगल में छिपा आतंकियों का दल हाल ही में सरहद पार से घुसपैठ कर राज्य में दाखिल हुआ है। ये सभी आतंकी जल्द ही मारे जाएंगे।

आइएएस के खिलाफ सुनवाई पर रोक

 सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात कैडर के आइएएस प्रदीप शर्मा के खिलाफ सुनवाई पर रोक लगा दी है। शर्मा ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर राज्य पुलिस द्वारा अपने खिलाफ दर्ज नए मामले में सीबीआइ जांच की मांग की है। हालांकि, न्यायमूर्ति आफताब आलम और रंजन प्रकाश देसाई की पीठ ने सुनवाई पर रोक लगाने का कोई आदेश नहीं दिया, लेकिन पीठ ने राज्य के वकील हेमंतिका वाही के हलफनामे को रिकॉर्ड किया कि अगले आदेश तक कोई कार्यवाही नहीं होगी। शर्मा ने भुज की एक अदालत में अपने खिलाफ सुनवाई पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। उन्होंने दलील दी थी कि इसे चुनौती देने वाली उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। गुजराज हाईकोर्ट ने शर्मा की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वाही ने शीर्ष अदालत से कार्यवाही पर रोक नहीं लगाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और अदालत को अब आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू करनी है। लेकिन पीठ इस दलील से सहमत नहीं हुई और आदेश देने की प्रक्रिया शुरू कर दी। वकील ने हलफनामा दाखिल करते हुए कहा कि 17 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा शर्मा की सीबीआइ जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई की संभावना है। इसके बाद पीठ ने कहा कि अगले आदेश तक शर्मा पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। इसके पहले कोर्ट ने शर्मा की दो याचिकाओं पर मोदी को नोटिस जारी किया था। शर्मा ने अपनी याचिकाओं में आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के इशारे पर फर्जी आपराधिक मामले दर्ज किए गए।

आतंकी अब भी पकड़ से दूर : चिदंबरम

दिल्ली हाईकोर्ट में हुए आतंकी हमले को सुलझाने के करीब पहुंचने का दावा करने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी फिलहाल खाली हाथ है। दाऊद पर मजबूर सरकार : भारत के मोस्ट वांटेड अपराधी दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई में चिदंबरम ने अपनी असमर्थता जताई। दाऊद के बेटे की कराची में पिछले दिनों हुई शादी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने दावा किया कि उनके पास दाऊद के ठिकाने के बारे में ठोस जानकारी है। पर पाकिस्तान कार्रवाई नहीं कर रहा है। आडवाणी की यात्रा को सुरक्षा देने पर हो सकता है विचार : भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की प्रस्तावित यात्रा के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्र सरकार विचार सकती है। चिदंबरम ने कहा यात्रा के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है। अफजल मामले पर टिप्पणी से इनकार : संसद पर आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने को लेकर जम्मू-कश्मीर में जारी राजनीतिक हंगामे पर चिदंबरम ने कि दया याचिका पर राष्ट्रपति का फैसला आने के बाद ही सरकार इस मुद्दे पर विचार करेगी। रिपोर्ट के बाद ही तेलंगाना पर फैसला : अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर केंद्र सरकार को गुलाम नबी आजाद की रिपोर्ट का इंतजार है। चिदंबरम ने कहा कि आजाद शुक्रवार या शनिवार तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकते हैं। कहां से आया यह कंबख्त नोट सूचना के अधिकार के जरिये 2जी पर सामने आए विवादास्पद नोट से सरकार में शीर्ष स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। आरटीआइ के जरिये इस बैकग्राउंड नोट को मांगने और उसे मुहैया कराने की शीर्ष स्तर पर पड़ताल शुरू हो चुकी है। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र इसके पीछे साउथ ब्लाक के शीर्ष अधिकारियों के हाथ होने की गुंजाइश से भी इनकार नहीं कर रहे। शक है कि पीएमओ में एक नए अधिकारी के ताकतवर होने के बाद से अभी तक राज कर रहे अधिकारियों की लॉबी ने आरटीआइ की ताकत का इस्तेमाल करवा 25 मार्च के इस नोट को सार्वजनिक करवाया है। पी. चिदंबरम पर उंगली उठाने वाले इस नोट के सार्वजनिक होने के बाद बात और आगे तक पहुंचाने की विघ्नसंतोषी मानसिकता को भी सरकार में इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।

कश्मीर में घुसपैठ के पीछे आइएसआइ का हाथ

 श्रीनगर पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने अब सीधे तौर पर आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। यह खुलासा उत्तरी कश्मीर के जिला कुपवाड़ा में तीन दिन पहले पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी निसार अहमद राथर ने पूछताछ के दौरान किया है। निसार की माने तो आतंकी संगठन अब नशेड़ी युवकों को भी बड़े पैमाने पर अपने कैडर में जमा कर रहे हैं। पकड़े गए आतंकी निसार अहमद पुत्र अली रहमान निवासी कराची के पास से न सिर्फ हथियार, अत्याधुनिक संचार उपकरण, जीपीएस और खाद्य सामग्री मिली, बल्कि नशीले पदार्थ भी बरामद हुए हैं। पूछताछ के दौरान उसने कई सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि वह नशेड़ी है और हेरोइन का आदि है। निसार ने बताया कि उसके घर की आर्थिक हालत दयनीय है। वह नशे की लत का शिकार था और उसके भाई ने उसे लश्कर-ए-तायबा के भर्ती कमांडर को कुछ पैसों के बदले सौंप दिया। इसके बाद वह कराची में लश्कर के एक केंद्र में रहा, जहां उसकी तरह कुछ और लड़के भी थे। इसके बाद उन सभी को 12-12 के समूह में बांटकर मनशेरा स्थित आतंकी ट्रेनिंग कैंप भेजा गया। निसार ने बताया कि मनशेरा कैंप में पाकिस्तानी सेना और आइएसआइ के अधिकारी अक्सर उन्हें गुरिल्ला जंग की ट्रेनिंग देने आते थे। इस कैंप का कमांडर अब्दुल्ला शाहीन था। उसने बताया कि मनशेरा में ट्रेनिंग के बाद सभी लड़कों को जामगड़ के कैंप में आगे की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। इसके बाद सभी को केल स्थित सेना के गैरिजन कैंप में लाया गया, जहां पाकिस्तानी फौजियों की तरह सभी को ट्रेनिंग दी गई। आतंकी निसार ने बताया कि केल कैंप में ट्रेनिंग के बाद हम सात लोगों का एक दल बना, उसका लीडर अबु तल्हा को बनाया गया। हमें जिस लांचिंग पैड पर लाया गया, वहां भी पाकिस्तानी सेना के अफसर थे। गत मंगलवार की रात को उसे एलओसी पार कर कश्मीर में भेजा गया, लेकिन बार्डर पर ही उसकी मुठभेड़ भारतीय जवानों के साथ हो गई और वह पकड़ा गया। गौरतलब है कि 27/28 सितंबर की मध्यरात्रि को एलओसी के साथ सटे मच्छल सेक्टर में आतंकियों ने घुसपैठ का प्रयास किया था। लेकिन वहां तैनात जैकलाई के जवानों ने इस प्रयास को नाकाम कर दिया। सेना का यह अभियान अभी भी जारी है।

कुरैशी को मारने की कोशिश आतंकी समूहों में निराशा का संकेत : लोन

 विकिलीक्स के ताजा खुलासे के मुताबिक हुर्रियत के वरिष्ठ नेता बिलाल लोन का मानना है कि पार्टी के उदारवादी नेता मौलाना फजल हक कुरैशी की हत्या का प्रयास जम्मू-कश्मीर की स्थिति में हो रहे सुधार के कारण कट्टरपंथी समूहों में निराशा का संकेत है। हाल ही में वेबसाइट की ओर से जारी इस दस्तावेज को भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत टिमोथी रोमर ने गोपनीय श्रेणी में रखा है। इसके मुताबिक लोन ने अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों से कहा कि इस घटना से उन्हें डर नहीं लगता, लेकिन ऐसी घटनाओं ने उदारवादी धड़े में असुरक्षा की भावना पैदा की है। दस्तावेज के मुताबिक, हुर्रियत और केंद्र के बीच वार्ता का हिस्सा रहे लोन बातचीत को तर्कपूर्ण अंजाम तक पहुंचाने की ख्वाहिश जाहिर करते हैं। हालांकि, वह इसमें आ रही रुकावटों के सामने घुटने टेकते हुए कहते हैं कि कट्टपंथियों और इस्लामाबाद को भी बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए। लोन के विचार में कुरैशी पर हमला यह दिखाता है कि सुरक्षा स्थिति में हो रहे सुधार और बातचीत आगे बढ़ने से कट्टरपंथी किस कदर हताश हो चुके हैं। आतंकवादियों ने चार दिसंबर 2009 को श्रीनगर में कुरैशी पर गोलियां चलाई थीं। इस घटना को केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रहे उदारवादी धड़े के लिए चेतावनी के रूप में देखा गया था। दस्तावेज में हुर्रियत कांफ्रेंस प्रमुख मीरवाइज उमर फारूख और दूतावास अधिकारियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत का ब्योरा भी है। इस दौरान मीरवाइज काफी निराश दिखे। उन्होंने कुरैशी पर हुए हमले की तुलना अपने पिता और अन्य उदारवादी नेताओं की हत्याओं से की। विकिलीक्स की ओर से जारी एक अन्य केबल में कहा गया है कि हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेताओं की जान को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से खतरा है।

लश्कर और जैश के बीच सुलह कराने में जुटे आतंकी आका

नई दिल्ली आतंकवाद पर अमेरिका से झाड़ खा रहा पाकिस्तान कश्मीर में घुसपैठ बढ़ाने की हर कोशिश कर रहा है। एक पखवाड़े में घुसपैठ की कोशिशों में हुए इजाफे और मुठभेड़ में बढ़ोतरी के साथ ही सरहद पार बैठे आतंकी आका घाटी में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बीच सुलह कर साझा अभियानों पर जोर दे रहे हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकियों के बीच बातचीत के पकड़े गए हालिया संदेशों में सामने आया है कि सरहद पार से घाटी के आतंकी गुटों में लश्कर और जैश के बीच एकजुटता की कोशिश हो रही है। सेना और भारतीय खुफिया एजेंसियों के हाथ लगे इन संदेशों में बेसाख्ता यह कोशिश की जा रही है कि लश्कर के स्थानीय कमांडर सीमा पास से पहुंच रहे जैश के आतंकियों को अपने अभियानों का हिस्सा बनने दें। साथ ही घुसपैठ में इजाफे और सक्रियता के लिए भी नसीहतें और निर्देश सीमापार से दिए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, आइएसआइ ने घुसपैठ सुनिश्चित करने के लिए पाक सेना और आतंकी गुटों के साथ मिलकर एक साझा समन्वय समूह (ज्वाइंट को-आर्डिनेशन ग्रुप) भी बनाया है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के मच्छल सेक्टर में पिछले सप्ताह सेना के हत्थे चढ़े लश्कर-ए-तैयबा आतंकी नसीर अहमद से पूछताछ में हासिल सूचनाएं भी बताती हैं कि आइएसआइ एक बार फिर घुसपैठ का ग्राफ बढ़ाने को बेताब है। कोशिश सर्दियों से पहले घाटी में आतंकियों की नई खेप पहुंचाने की है। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि केवल अगस्त में ही नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के 80 प्रयास हुए। इनमें 15 आतंकी मुठभेड़ में मारे गए और चार जिंदा पकड़ लिए गए। पकड़े गए सभी आतंकियों ने भारतीय सुरक्षा बलों को अपने प्रशिक्षण से लेकर घुसपैठ के प्रयासों तक में आइएसआइ की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

Sunday, October 2, 2011

आतंकवाद से निपटने में नाकाम साबित हो रहा पाक

पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। उसके आतंकवाद निरोधी कदमों का कोई परिणाम नहीं निकला है। यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान पर कांग्रेस को भेजी गई रिपोर्ट में कही है। उन्होंने कहा, वर्ष 2010 में आई बाढ़ के बाद चार महीने की शांति यह दर्शाती है कि आतंकी किस प्रकार उन इलाकों में लौटने में सफल रहे हैं, जहां पाकिस्तानी सेना ने उनका सफाया कर दिया था। आतंकवाद निरोधक अभियानों में पाकिस्तान के प्रयास नामक रिपोर्ट में इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हुई प्रगति का ब्योरा है। इसके अनुसार, सीमा पार समन्वय और सहयोग में हुई प्रगति के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं। संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्रों (फाटा) में पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई जारी है, लेकिन फाटा सीमा पर हमले जारी हैं जिसके बढ़ने के आसार हैं। अफगानिस्तान पाकिस्तान सीमा पर आतंकी गतिविधियां दोनों देशों में स्थिरता के प्रयासों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने उत्तरी वजीरिस्तान, तिराह घाटी और खैबर में आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए एक अप्रैल से 30 जून के बीच दो नई आतंकवाद निरोधी काउंटर इंसर्जेसी (कॉइन) कार्रवाई की शुरुआत की, लेकिन इससे खास अंतर नहीं पड़ा। ओसामा की बीवी छुड़ाने की साजिश नाकाम लंदन : पाकिस्तानी पुलिस की हिरासत से पूर्व अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की तीसरी पत्नी को छुड़ाने की आतंकी संगठन तालिबान की कोशिशें नाकाम साबित हुई। ब्रिटिश अखबार द सन की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान सरगना मुल्ला उमर ने करीब 500 आतंकियों को पाकिस्तान के कड़ी सुरक्षा वाले ठिकाने पर हमला करने को कहा था, जहां ओसामा की तीसरी पत्‍‌नी समेत अन्य दो बीवियों और पांच बच्चों को पूछताछ के लिए रखा गया है। इस सुरक्षित ठिकाने की सूचना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के किसी मुखबिर ने तालिबान को दी थी। पुलिस ने ओसामा की बीवियों और बच्चों को पहले ही उस जगह से हटा दिया गया था। आइएसआइ के सूत्रों ने बताया,पिछले कुछ सप्ताह से हम कबाइली इलाके के फोन कॉल की निगरानी कर रहे थे। इस हमले की खबर हमें पहले ही मिल गई थी। अब ओसामा के परिवार की सुरक्षा पहले से भी ज्यादा कड़ी कर दी गई है। ओसामा की बीवियों और बच्चों को छुड़ाने की कोशिशों को देखते हुए उनके ठिकाने तीन बार बदले जा चुके हैं। पाकिस्तान के छावनी शहर एबटाबाद में गत दो मई को अमेरिकी कार्रवाई में ओसामा मारा गया था। ओसामा को बचाने की कोशिश में यमन मूल की 29 वर्षीया अमल के पैर में गोली लग गई थी। उसे ओसामा से एक दस साल की बेटी भी है। पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का आरोप है कि वो जांच में सहयोग नहीं कर रही। उसने अधिकारियों के सामने अपनी शेखी बघारते हुए कहा कि उसे बंदूक और राकेट लांचर चलाना आता है। उसने कहा, मैं बच्चों को मुजाहिद्दीन बनाना चाहती हूं।

लिक्विड बम बनाने वाला भी औलाकी के साथ मारा गया

 यमन में पिछले दिनों हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में अलकायदा के उस आतंकवादी के मारे जाने की संभावना जताई है, जिसने लिक्विड बम के जरिए अमेरिकी विमान को उड़ाने की साजिश रची थी। अल कायदा आतंकवादी इब्राहिम हसन अल असिरी के मारे जाने की खबर सच निकली तो अमेरिकी ड्रोन हमले की यह एक और बड़ी कामयाबी होगी। इस हमले में अमेरिकी मूल का खूंखार आतंकी अनवर अल औलाकी भी मारा गया था। अमेरिका के दो अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस हमले में अल-असिरी भी मारा गया है। 29 साल के इस आतंकवादी के मारे जाने की अब तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एक अन्य खबर के अनुसार अमेरिका ने औलाकी की मौत के बाद दुनियाभर में हाई अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी एजेंसियों को आशंका है कि औलाकी की मौत का बदला लेने के लिए आतंकी हमला कर सकते हैं

Thursday, September 29, 2011

अमेरिका के पास आइएसआइ के खिलाफ ठोस सबूत


आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क पर अमेरिका व पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के बीच तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। दोनों एक के बाद एक अपना पक्ष रख रहे हैं। अब अमेरिका ने दावा किया है कि आइएसआइ के तार हक्कानी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप निराधार नहीं हैं, बल्कि इस बात के उसके पास ठोस प्रमाण हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि उनके पास पुख्ता सुबूत हैं कि आइएसआइ हक्कानी और मंुबई हमलों के जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन को मदद देती है। नाम न प्रकाशित करने की की शर्त पर पेंटागन के अधिकारी ने बताया, आइएसआइ आतंकी संगठनों को धन मुहैया कराती है। तकनीकी सहयोग देती है। पाकिस्तानी अधिकारी खूंखार आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध करवा रहे हैं। अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन का एबटाबाद में पाया जाना इस बात का पुख्ता सुबूत है। एबटाबाद में पाकिस्तानी सेना व आइएसआइ के अधिकारियों के सरकारी आवास हैं। रक्षा मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने बताया, पेंटागन पाकिस्तान को लंबे समय से सबूत उपलब्ध करा रहा है। उसके बावजूद उसने आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया, लेकिन काबुल में हाल में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के बाद पानी सिर से ऊपर चला गया है। अब हमने इन साक्ष्यों को सार्वजनिक करने का फैसला किया है। अधिकारियों ने सबूतों के बारे में विस्तृत जानकारी देने से इंकार कर दिया। इन्हीं सुबूतों के आधार पर पिछले हफ्ते ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ माइक मुलेन ने कांग्रेस की एक कमेटी को बताया था कि हक्कानी आइएसआइ का अभिन्न हिस्सा है। अमेरिका-पाकिस्तान के बीच तीसरे देश की जरूरत नहीं अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाने के लिए किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से साफ इंकार किया है। विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नुलैंड ने यह बात उन मीडिया रिपोर्टो को लेकर कही, जिनमें दोनों देशों के संबंध सुधारने के लिए किसी तीसरे देश की जरूरत के बारे में लिखा गया था। उन्होंने कहा, दोनों देश सीधे तौर पर बात करके आपकी मसलों को सुलझा सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि अमेरिका अन्य देशों के समक्ष पाकिस्तानी आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के मुद्दे को उठाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की सैन्य सहायता में कमी की गई है जबकि असैन्य सहायता जारी है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान के सहयोग की समीक्षा करने के बाद सैन्य सहायता को लेकर पुनर्विचार किया जाएगा। पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका का रुख और सख्त हुआ एक समय पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन अब पाकिस्तान के खिलाफ हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका जल्द ही पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने जा रहा है। मुलेन ने वाल स्ट्रीट जर्नल को दिए साक्षात्कार में पाकिस्तान के प्रति कड़वाहट जताई है। उन्होंने कहा, मेरे देश के निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं। मैं यह सब चुपचाप नहीं देख सकता। यह और बात है कि मैं पाकिस्तान का अच्छा मित्र रह चुका हूं, लेकिन मैं अपने लोगों को ऐसे मरते नहीं देख सकता। मुलेन इस महीने के अंत में पद से विदा लेने जा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रति अपने रुख में बदलाव के बारे में उनका कहना है कि वह इस्लामाबाद के साथ साझेदारी को लेकर अभी तक वकालत करते थे, लेकिन उसकी तरफ से सहयोग नहीं मिला। अब दोबारा वैसी राय बना पाना मुश्किल होगा। अपने कार्यकाल में मुलेन पाकिस्तानी सेना प्रमुख अश्फाक परवेज कयानी से 30 बार मिले और उनके साथ हुई अनगिनत बैठकों में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में सहयोग की मांग की। दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद कयानी के साथ उनकी गहरी दोस्ती थी। शीर्ष अमेरिकी कमांडर ने कहा कि उत्तर वजीरिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पाकिस्तानी आक्रमण की एक बड़ी योजना के सफल नहीं हो पाने से उन्हें गहरी निराशा हुई है। जीत रहा है अल कायदा रोम : यदि अमेरिका को लगता है कि वह कुख्यात आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के बाद आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में जीत रहा है, तो वह गलत है। यह दावा है अमेरिकी विशेषज्ञ दावीद गारटेनस्टेन रॉस का। रॉस ने बिन लादेंस लेगसी पुस्तक लिखी है। अमेरिकी पत्रिका अटलांटा में लिखे आलेख में उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन अल कायदा अपने सरगना के मारे जाने के बाद भी कमजोर नहीं हुआ है। उल्टे वह इस लड़ाई में जीत रहा है। रॉस ने दुश्मन को हराने के लिए अमेरिका के अत्यधिक खर्च और अनथक प्रयास किए जाने पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ओसामा यही चाहता रहा है। रॉस के अनुसार, मैंने अपनी हालिया किताब में 9/11 हमले के बाद सुरक्षा पर लगातार किए जा रहे अत्यधिक खर्च पर चर्चा की है। यह खर्च अमेरिका की एक बड़ी गलती है। उन्होंने कहा कि कई विश्लेषकों ने अलकायदा के खतरे को गलत आंका है। इस कारण गलत नीतियां लागू हुईं और चीजें बदतर हुई। रॉस का कहना है कि अफगानिस्तान और इराक में युद्ध पर खरबों डॉलर रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अमेरिका पर 14 खरब डॉलर (लगभग 685 खरब रुपये) का कर्ज है। उन्होंने कहा 9/11 अमेरिकी हमले के बाद अमेरिका ने सुरक्षा के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया, जिसने उसे आर्थिक स्तर पर कमजोर कर दिया है। रॉस का तर्क है कि आतंकवादी संगठन हारा नहीं है। इसे रोकना मुश्किल हो रहा है क्योंकि अमेरिका अपनी शक्ति और संसाधन बर्बाद कर रहा है। हालांकि आतंकियों पर नियंत्रण रखने के लिए कुछ संसाधन उपलब्ध हैं, पर खतरा बढ़ता जा रहा है और उसे काबू में करने की क्षमता कम हो रही है।

Monday, September 26, 2011

धमकी के बाद छावनी में बदला चारबाग रेलवे स्टेशन

सोमवार दोपहर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चारबाग स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 4, 5, 6 और 7 को उड़ाने की धमकी के बाद पुलिस व प्रशासन की नींद उड़ गई। आनन-फानन में स्टेशन पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। कुछ देर में अपर पुलिस महानिदेशक (रेलवे) एके जैन भी स्टेशन पहुंच गए। एडीजी की मौजूदगी में सभी प्लेटफार्मो व पार्सल घर की सघन जांच की गई। स्टेशन उड़ाने की धमकी सोमवार को एक निजी चैनल को ई-मेल पर दी गई। चैनल ने इसकी जानकारी एडीजी रेलवे को दी जिसके बाद रेलवे पुलिस (जीआरपी) व रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने चारबाग स्टेशन की जांच शुरू कर दी। जांच में बम निरोधी और डॉग स्क्वायड भी शामिल था। पार्सल घर से लेकर प्लेटफार्म 4,5,6,7 व सब-वे सहित सभी ट्रेनों की जांच की गई। एडीजी एके जैन ने बताया कि धमकी मिलने के बाद चारबाग स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। स्टेशन पर सतर्कता वैसे ही रहती है लेकिन धमकी के मद्देनजर विशेष रूप से जांच की गई। इस दौरान स्टेशन पर आने वाले संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई। वेंडर-कुलियों को भी सतर्क कर दिया गया और संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखने पर उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है। जांच में एसपी जीआरपी, कमांडेंट आरपीएफ सहित भारी संख्या में पुलिस बल के जवान शामिल थे। लखनऊ से ही भेजा गया ई-मेल विशेष पुलिस महानिदेशक बृजलाल के मुताबिक धमकी भरा ई-मेल भेजने वाली तलाश में एटीएस को लगाया गया है। जांच में सामने आया है कि ई-मेल लखनऊ के ही एक संस्थान से भेजा गया था। जल्द ही ई-मेल भेजने वाले को पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके पहले ऊंचाहार स्टेशन को उड़ाने की धमकी भी मेल के जरिये दी गई थी। वहां पर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था

भुल्लर पर अकाली दल लाएगा माफी प्रस्ताव

 विधानसभा चुनाव की दस्तक के बीच खालिस्तानी आतंकी प्रो. देविंदर पाल सिंह भुल्लर को फांसी की सजा से माफी फिर से एक चुनावी मुद्दा बन गई है और सत्तारूढ़ अकाली दल और कांग्रेस के बीच राजनीति तेज हो गई है। राष्ट्रपति की ओर से भुल्लर की दया याचिका भले ही खारिज हो चुकी हो, लेकिन राजनीति के लिए वह एक मोहरा बन गया है। चुनावी माहौल में राज्य सरकार ने विधानसभा के आगामी सत्र में भुल्लर की सजा माफी के लिए प्रस्ताव लाने की बात कही है। वहीं कांग्रेस ने भाजपा और अकाली दल की नीयत पर सवाल खड़ा कर दिया है। मालूम हो कि इस मुद्दे पर अकाली दल को भाजपा से मदद नहीं मिलेगी। ऐसे में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कांग्रेस से मदद मांगने की बात कही थी। मगर कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी उलटी फांस लगा दी। कैप्टन ने आरोप लगाया कि अकाली-भाजपा सरकार ने अदालत में शपथ देकर भुल्लर को पक्का अपराधी और खतरनाक आतंकवादी बताया था। ऐसे में अकाली दल राजनीतिक स्टंट कर रहा है। दरअसल भुल्लर का जो भी हो, फिलहाल अकाली दल और कांग्रेस में यह होड़ मची है कि चुनाव के वक्त वह भुल्लर की ज्यादा हमदर्द दिखे। पंजाब विधानसभा में अकाली दल के 49 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 43 विधायक। 117 सदस्यीय विधानसभा में यह प्रस्ताव पारित कराने के लिए अकाली दल को 60 विधायकों की जरूरत होगी। यही वजह है कि भाजपा से मिले जवाब के बाद अकाली दल कांग्रेस से मदद की उम्मीद लगा रहा था

अमेरिका के सख्त तेवर देख पाकिस्तान के होश उड़े

अमेरिका- पाकिस्तान के बीच चल रही तकरार अब टकराव का रूप लेती जा रही है। अफगान तालिबान के सबसे सशक्त गुट हक्कानी नेटवर्क को आइएसआइ का हिस्सा बताने के बाद अमेरिका ने कहा कि उसने सभी विकल्प खुले रखे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रबानी खार ने पलटवार करते हुए कहा कि हक्कानी गुट को पैदा करने वाला अमेरिका है, इसलिए वह दूसरों पर जिम्मेदारी न थोपे। इससे पहले पाकिस्तानी सेना के कोर कमांडर ग्रुप की बैठक हुई जिसमें हक्कानी गुट पर कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया गया। सेनाध्यक्ष अश्फाक परवेज कयानी के नेतृत्व में हुई बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि हक्कानी गुट पर कार्रवाई के लिए अमेरिकी दबाव का वह खुलकर विरोध करेंगे। जानकारों ने यह भी दावा किया है कि अमेरिका के तेवरों से इस बार पाकिस्तान के होश गुम हैं। आइएसआइ के निदेशक अहमद शुजा पाशा का सऊदी अरब रवाना होना और पाक सेनाप्रमुख कयानी का ब्रिटेन दौरा रद होना इसी ओर इशारा करते हैं। समझा जा रहा है कि हक्कानी नेटवर्क को आइएसआइ की मदद संबंधी अमेरिकी आरोपों से पैदा हुए टकराव को दूर करने के लिए शुजा पाशा सऊदी अरब गए हैं। सऊदी अरब अमेरिका-पाकिस्तान के बीच पुल की तरह है। वह दोनों देशों का अभिन्न मित्र है और पहले भी कई मामालों की मध्यस्थता कर चुका है। इससे पहले अल जजीरा के साथ साक्षात्कार में विदेश मंत्री खार ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि अफगानिस्तान के काबुल में अमेरिकी दूतावास और वदाक प्रांत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर इस महीने हुए हमले में पाकिस्तान की आइएसआइ ने हक्कानी नेटवर्क को मदद दी थी। खार ने दो टूक कहा, यदि हम संपर्को की बात करते हैं तो मैं आश्वस्त हूं कि दुनियाभर में सीआइए भी कई आतंकवादी संगठनों से संपर्क हैं। जिस नेटवर्क की अमेरिका इन दिनों बात कर रहा है, वह कई सालों तक सीआइए का दुलारा बना हुआ था। कयानी के नेतृत्व में छह घंटे हुई कमांडरों की बैठक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से लिखा कि कमांडरों ने उत्तर वजीरिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की अमेरिकी मांग का विरोध करने का निर्णय किया है। बैठक में अमेरिका द्वारा पाकिस्तानी सीमा में एकतरफा कार्रवाई के संभावित परिणाम पर भी चर्चा की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस निर्णय से दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो सकते हैं। पाक सैन्य अधिकारी ने कहा, अमेरिका को पहले ही बताया जा चुका है कि पाकिस्तान जो कुछ कर चुका है, उसके दायरे से और आगे वह नहीं जा सकता। हालांकि समाचारपत्र डॉन ने अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि कोर कमांडरों की बैठक सबसे पहले रविवार को हुई जिसमें परिस्थिति पर काबू पाने की जरूरत पर सहमति जताई गई। एक सूत्र के हवाले से अखबार ने लिखा कि यह बैठक छुट्टी के दिन हुई जिससे पता चलता है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लगातार आरोप लगाने से उत्पन्न संकट की गंभीरता कितनी है। सूत्र ने कहा, तनाव में वृद्धि हानिकारक है। लागत लाभ विश्लेषण के लिहाज से लगता है कि मुकाबले से कोई लाभ नहीं है। डॉन ने लिखा है, ऐसा नहीं लगता कि अमेरिकी दबाव में सेना हक्कानी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई पर सहमत हो गई है। रविवार को छह घंटे चली बैठक के बारे में सेना की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। हिना को वापस बुलाने के बाद गिलानी का यू-टर्न आतंकी नेटवर्क के सफाए पर अमेरिकी चेतावनी से झल्लाने के बाद विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार को न्यूयॉर्क से वापस बुलाने की घोषणा करने वाले प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने यू-टर्न ले लिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 66वें अधिवेशन में हिस्सा लेने गई रब्बानी अब दौरा पूरा करने के बाद ही पाकिस्तान लौटेंगीं। प्रधानमंत्री आवास के अधिकारियों ने इससे पहले बताया था कि विदेश मंत्री तत्काल लौट आएंगी। विदेश विभाग के अधिकारियों ने बाद में साफ किया कि हिना महासभा में भाषण देने के बाद वापस आएंगी। पाकिस्तान को अब एक विकल्प चुनना होगा अमेरिका के प्रमुख सीनेटरों में लिंडसे ग्राहम ने फॉक्स न्यूज से कहा, यदि पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय नीति के तहत आतंकवाद को समर्थन बरकरार रखता है तो हमारे पास सभी विकल्प खुले हैं। पाक को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह वक्त उसके लिए विकल्प चुनने का है। उन्होंने कहा कि रक्षामंत्री लियोन पेनेटा और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ्स के चेयरमैन एडमिरल माइक मुलेन सहित पेंटागन के शीर्ष रक्षा अधिकारी सही कह रहे हैं कि आइएसआइ-हक्कानी गुट को मदद दे रहा है। सर्वदलीय बैठक में पाक सेना व धर्मगुरु भी होंगे हक्कानी गुट पर कार्रवाई को लेकर इस्लामाबाद-वाशिंगटन के बिगड़ते रिश्तों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में पाकिस्तानी की सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा बैठक में विभिन्न धार्मिक समूहों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है। न्यूयॉर्क में यूएन सम्मेलन से लौट रहीं विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार सर्वदलीय बैठक में वाशिंगटन-इस्लामाबाद संबंधों पर जानकारी देंगी। अमेरिका ने अफगानिस्तान में 13 सितंबर को हुए आतंकवादी हमले के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (आइएसआइ) और हक्कानी नेटवर्क के गठजोड़ को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिका के उक्त आरोपों के मद्देनजर गिलानी ने सर्वदलीय बैठक के मद्देनजर अवामी मुस्लिम लीग के शेख राशिद, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-कैद के चौधरी शुजात हुसैन, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नवाज शरीफ और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के अल्ताफ हुसैन से बातचीत की है। अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ्स के चेयरमैन एडमिरल माइक मुलेन ने पाकिस्तान पर हक्कानी नेटवर्क को समर्थन देने का आरोप लगाया। हक्कानी नेटवर्क को आईएसआई का वास्तविक हथियार बताते हुए उन्होंने अफगानिस्तान में 11 अगस्त को ट्रक बम हमले और 13 अगस्त को काबुल में अमेरिकी दूतावास के बाहर हुए हमले के लिए हक्कानी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उसे आइएसआइ ने मदद दी। वाशिंगटन-इस्लामाबाद के संबंध दो मई को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिका द्वारा अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार गिराने के बाद से ही तनावपूर्ण हैं। दूसरी बार पाक राष्ट्रपति बनने की तैयारी में जरदारी पाकिस्तान में 2013 के आम चुनावों में सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) बहुमत हासिल नहीं भी कर पाए, तो भी आसिफ अली जरदारी के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं प्रबल दिख रही हैं। समाचार पत्र एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने जरदारी के करीबी सूत्र के हवाले से लिखा है, उन्हें हालांकि सुनिश्चित करना होगा कि एक सौ सदस्यीय उच्च सदन सीनेट के आधे से अधिक सीटों के चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अगले साल मार्च में हो जाएं। सूत्रों का मानना है कि वर्तमान परिदृश्य में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चुनाव होते हैं तो जरदारी को एक और कार्यकाल मिल सकता है। अफगानिस्तान ने पाक सेना को चेतावनी दी काबुल : अफगानिस्तान के रक्षा अधिकारियों ने पाकिस्तान को देश के पूर्वोत्तर में रॉकेट दागने और भारी गोलाबारी नहीं रोकने पर जवाबी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है। अफगान रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी सेना पर पिछले पांच दिनों में 300 से अधिक गोला और रॉकेट कुनार एवं नूरिस्तान प्रांतों में दागने का आरोप लगाया। यह इलाका कट्टरपंथी संगठनों के लिए पनाहगाह है। अमेरिका नीत गठबंधन सेना का इस क्षेत्र में कम प्रभाव है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी सरजमीं से हो रहे गोलाबारी से अनगिनत संख्या में अफगान मारे गए हैं। कई मकान और मस्जिद नष्ट हो गए हैं तथा सैकड़ों लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। बहरहाल, पाकिस्तान की ओर से इस पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की गई है

Friday, September 23, 2011

कल भाषण देंगे मनमोहन, आतंकवाद पर रहेगा जोर

 प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार सुबह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह आतंकवाद, आर्थिक मंदी, पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका में अस्थिरता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर जोर देंगे। प्रधानमंत्री महासभा के अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार को न्यूयार्क पहुंचे। प्रधानमंत्री की पांच दिनों की यात्रा में उनके साथ विदेश मंत्री एसएम कृष्णा, उनके प्रधान सचिव टीकेए नायर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और विदेश सचिव रंजन मथाई भी हैं। संयुक्त राष्ट्र की बैठक से इतर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईरान, दक्षिणी सूडान और श्रीलंका के राष्ट्रपतियों एवं जापान तथा नेपाल के प्रधानमंत्रियों के साथ मुलाकात करेंगे। मनमोहन सिंह अपने सम्बोधन में संयुक्त राष्ट्र में सुधार का मुद्दा भी उठाएंगे। इस दौरान वह 19 वर्षो के अंतराल पर भारत को सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुने जाने के बाद से अपने देश की भूमिका के बारे में भी बताएंगे। संयुक्त राष्ट्र के लिए रवाना होने से पहले नई दिल्ली में अपनी पांच दिवसीय यात्रा के बारे में मनमोहन सिंह ने कहा, सभी देशों के लिए यह पहले से कहीं ज्यादा आवश्यक है कि वे इन चुनौतियों से निपटने के लिए कदम उठाएं। यह समय संयुक्त राष्ट्र के लिए अपनी वैश्विक भूमिका निभाने का है। उन्होंने कहा, इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा का अधिवेशन ऐसे वक्त में हो रहा है जब दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर है। पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका तथा खाड़ी देशों में अस्थिरता है। फलस्तीन का मुद्दा अब भी अनसुलझा है। साथ ही आतंकवाद और समुद्री लुटेरे भी विभिन्न देशों के समक्ष मुश्किलें पैदा कर रहे हैं

Wednesday, September 21, 2011

आतंकवाद वैश्विक समुदाय के खिलाफ युद्ध के समान

आतंकवाद को वैश्रि्वक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि हरदीप पुरी ने कहा है कि आतंकवादियों और उनके नेटवर्क को उजागर करने के लिए प्रयास तेज किए जाने चाहिए। साथ ही उन्हें पनाह देने वाले सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करना चाहिए। पुरी संयुक्त राष्ट्र की काउंटर टेरोरिज्म कमेटी के भी अध्यक्ष हैं। उन्होंने इसी कमेटी के सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कही। उन्होंने कहा, आतंकवादी आज न सिर्फ पुरी दुनिया में फैल चुके हैं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के खिलाफ एक युद्ध की तरह हैं। आतंकवादियों की भर्ती दुनिया के किसी एक देश में होती है, धन किसी दूसरे देश में एकत्र किया जाता है और वे तीसरे देश में जाकर हमलों की साजिश रचते हैं। उन्होंने कहा,आतंकवादियों के पास वैश्विक स्तर के साजो-सामान हैं और उन्होंने दुनिया भर में वित्तीय लेन-देन की व्यवस्था विकसित कर ली है। वे ताजा और अत्याधुनिक तकनीकों को इस्तेमाल करते हैं। वे एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में अपनी गतिविधियां संचालित करने में सक्षम हैं

आइएम के संदिग्ध आतंकी की पुलिस हिरासत बढ़ी

 मुंबई की एक अदालत ने जाली मुद्रा मामले में गिरफ्तार इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) के संदिग्ध सदस्य असरार अहमद अब्दुल हामिद टेलर की पुलिस हिरासत 23 सितंबर तक बढ़ा दी। उसकी हिरासत तब बढ़ाई गई जब एटीएस ने कहा कि वह उसके संदिग्ध आतंकी संबंधों की जांच करना चाहती है। जांच एजेंसी ने कहा कि वह टेलर से पूछताछ करना चाहती है कि क्या उसके पास से मिला धन आतंकवादी हमले के लिए था। एटीएस ने जब उसे गिरफ्तार किया था तो उसके पास से एक-एक हजार रुपये के 30 जाली नोट बरामद किए थे। एटीएस ने मंगलवार को टेलर को मडगांव की मजिस्ट्रेट अदालत के न्यायाधीश एम पी बागे के समक्ष पेश किया, जिन्होंने उसे 23 सितंबर तक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले, टेलर के साथी हारून राशिद अब्दुल हामिद नाइक को अदालत ने इसी मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा था। नाइक भी इंडियन मुजाहिदीन का संदिग्ध सदस्य है।

आरोपी जावेद अहमद खान का बयान है अहम सबूत

नई दिल्ली पंद्रह साल पहले लाजपत नगर मार्केट में किए गए धमाकों के मामले में सजा पाए आरोपियों की तरफ से हाई कोर्ट में दायर अपील पर मंगलवार से अंतिम जिरह शुरू हो गई। बुधवार को भी जिरह जारी रहेगी। न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति जीपी मित्तल की अदालत में सरकारी वकील पवन शर्मा ने एक आरोपी जावेद अहमद खान के बयान को आधार बनाते हुए कहा कि सभी आरोपियों को ठीक सजा दी गई है और अभियोजन पक्ष अपना आरोप साबित करने में कामयाब रहा है। पवन शर्मा ने कहा कि जावेद को अहमदाबाद के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे एक ब्लास्ट के मामले में जयपुर लाया गया। वहां मजिस्ट्रेट के सामने उसने स्वीकार किया था कि उन्होंने लाजपत नगर ब्लास्ट किया है। इसी बयान को निचली अदालत ने भी फैसले का आधार बनाया है। इतना ही नहीं ब्लास्ट के प्रयोग की गई कार निजामुद्दीन से चोरी की गई थी और आरोपी घटना से दो दिन पूर्व भी लाजपत नगर मार्केट में ब्लास्ट के इरादे से गए थे, परंतु कामयाब नहीं हो पाए। फांसी की सजा पाए तीनों आरोपियों को एक दुकानदार ने पहचाना था और बताया था कि यही दो दिन पहले गाड़ी खड़ी करने आए थे। इतना ही नहीं जिन फोन नंबरों से मीडिया को फोन करके ब्लास्ट की जिम्मेदारी ली गई थी, वे फोन आरोपी फारूक अहमद खान व फरीदा डार प्रयोग कर रहे थे। इसी के जरिए इस मामले का खुलासा हुआ था

Tuesday, September 20, 2011

फोरेंसिक लैब नहीं पहुंचे विस्फोट सैंपल

आगरा यह पुलिस का दोष है, या फोरेंसिक लैब का या फिर सिस्टम का? बम विस्फोट के 48 घंटे बाद भी पुलिस की ओर से जांच के लिए भेजे जाने वाले सैंपल फोरेंसिक लैब नहीं पहुंचे हैं। प्रदेश में बम विस्फोट जांचने वाली आगरा की एक मात्र फोरेंसिक लैब अब तक कॉटन स्वॉब से लिए गए सैंपल की ही जांच कर सकी है। इसी आधार पर बम धमाके में देसी सामग्री का प्रयोग घोषित कर दिया गया। बाइपास स्थित जय हास्पिटल में शनिवार शाम 5:32 बजे जोरदार धमाका हुआ था। मौके पर पहुंचे फोरेंसिक लैब के डिप्टी डायरेक्टर एक्सप्लोसिव डॉ. संतोष कुमार के नेतृत्व में टीम रुई में विस्फोट के सैंपल ले गई थी। अगले दिन रविवार को लैब बंद थी। मगर डीजीपी और डीजी स्पेशल का दौरा तय हो गया। दोपहर 12:00 बजे तक आनन-फानन में कॉटन स्वॉब के सैंपल के प्राथमिक रासायनिक परीक्षण हुए। इसके आधार पर पुलिस ने फाइनल खुलासा कर दिया कि बम देसी मैटेरियल से बनाया गया था। यानी यह धमाका उसी तरह के बम से था, जो कि त्योहार के लिए बनाए जाते हैं। रविवार दोपहर लगभग 1:00 बजे एनएसजी और एनआइए की टीम की जांच खत्म होने के बाद आगरा की फील्ड यूनिट घटनास्थल के सैंपल लेकर चली गई थी। इसके बाद उन्हें अब तक परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया। तो दोगुना क्यों हुआ इनाम? एक तरफ सरकार की रिपोर्ट कहती है कि अस्पताल में धमाका आपसी प्रतिद्वंद्विता के चलते हुआ। वहीं फोरेंसिक रिपोर्ट में बम की सामग्री देसी निकली। रविवार दोपहर को डीजी स्पेशल ने खुलासे के बाद अचानक बम धमाका करने वाले के सुराग देने वाले को इनाम की रकम 50 हजार से बढ़ाकर सीधे एक लाख कर दी। जब बम धमाका साधारण था तो अचानक इनाम क्यों बढ़ाया गया? बाकी है अभी बहुत परीक्षण : जानकारों के मुताबिक धमाके के सैंपल के फिजिकल और केमिकल एनालिसिस की कई प्रक्रियाएं होती हैं। आशंका यह भी है कि विस्फोट में नाइट्रेट भी पाया जा सकता है, जो गंभीर विस्फोटक की श्रेणी में आता है। यह रिपोर्ट कब तक तैयार होगी, यह कोई नहीं बता पा रहा है

मच्छर की तरह होते हैं आतंकी

 महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि आतंकवादी मच्छर की तरह हैं, जिन्हें मारना या नियंत्रित करना कठिन है। शहरी आतंकवाद विषय पर राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों के एक सम्मेलन के दौरान महाराष्ट्र के अधिकारी ने यह टिप्पणी की। उनकी इस टिप्पणी ने सम्मेलन में आए सभी अधिकारियों को हंसने पर मजबूर कर दिया। उक्त अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, सात शेरों को मारना आसान है, लेकिन आतंकियों को मारना या पकड़ना मच्छर से निपटने जैसा है, जहां सफलता दर बहुत कम है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन इंटेलीजेंस ब्यूरो ने किया था। अधिकारी ने खुफिया एजेंसियों के हालिया अलर्ट का जिक्र करते हुए कहा, हमें दस आतंकियों के मुंबई में घुसने की सूचना मिली थी, लेकिन उन्हें खोज निकालना घास के ढेर में सुई ढूंढने जैसा है। आतंकियों की तुलना 

Monday, September 19, 2011

कश्मीरी नेताओं का मिजाज

एक सप्ताह के अंतराल में नेशनल कांफ्रेंस के सबसे महत्वपूर्ण नेता ने दो बयान दिए। पहला बयान संसद पर आतंकी हमले के दोषी मोहम्मद अफजल के प्रति नरमी बरतने की मांग और इसके लिए जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा प्रस्ताव पास करने की कल्पना पर था। इससे प्रेरित होकर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में एक विधायक वैसा प्रस्ताव ला भी चुका है। दूसरे बयान में दिल्ली हाईकोर्ट विस्फोट का दोषी सुरक्षा एजेंसियों को ठहराया गया है कि उनकी लापरवाही से यह हुआ। इन बयानों से कश्मीरी मुस्लिम नेताओं की मानसिकता स्पष्ट हो जाती है। जिस मोहम्मद अफजल के पक्ष में कश्मीरी नेता सुरक्षा बलों के विरुद्ध बंद, जुलूस आयोजित करते रहते हैं वह एक दोषसिद्ध आतंकवादी है। वह यहां तक कह चुका है कि उसे अपने किए का कोई पछतावा नहीं और मौका मिला तो वह फिर यही करेगा। इन दो बयानों का अर्थ यह है कि मुस्लिमों, विशेषकर कश्मीरी मुस्लिमों के जघन्य से जघन्य अपराध का कोई नोटिस न लिया जाए। यह है कश्मीरी मुस्लिम मानसिकता, क्योंकि नेशनल कांफ्रेंस उसी की उदार प्रतिनिधि है। यदि उदार चिंतन ऐसा है तो बाकी कश्मीरी नेताओं के मिजाज का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। इस विशेषाधिकारी मानसिकता को समझे बिना कश्मीर पर सम्यक नीति नहीं बन सकती। विस्थापित कश्मीरी कवि कुंदनलाल चौधरी की एक कविता माई क्लीनिक एट छोटा बाजार में इस मानसिकता की झलक मिलती है कि कैसे 1980 के दशक के अंत में कश्मीर से हिंदुओं को मार भगाने की नीति सफल हुई। तब राज्य प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए पीडि़त हिंदुओं की ओर से ही माफी मांगने की नीति पर चल रहा था। भारत के जो नीति-निर्माता, पत्रकार और बुद्धिजीवी कश्मीरी जनता की उचित शिकायतों का रोना रोते या विकास आदि की चिंता करते हैं उनके लिए इस प्रसंग में गहरी सीख है। कश्मीरी मुस्लिमों को किसी विकास से मतलब नहीं है। इसी बड़े नेता ने कुछ महीने पहले ही यह बयान भी दिया था कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षा केवल विकास, अच्छा प्रशासन और आर्थिक लाभों से नहीं संतुष्ट हो सकती। उसे एक राजनीतिक समाधान चाहिए। अत: कश्मीरियों को आर्थिक, प्रशासनिक गड़बड़ी आदि की समस्या नहीं है। लंबे समय से शेष भारत द्वारा उन्हें निरंतर दिया जा रहा अति-उदार आर्थिक अनुदान और विविध विशेष सुविधाओं का पूरा ढेर उनके लिए पर्याप्त नहीं है। तब उन्हें क्या चाहिए? इसका जवाब है-अधिक स्वायत्तता। जान पड़ता है कि उन्हें कितना भी विशेष अधिकार दे दिया जाए, वे हमेशा यही कहेंगे कि उन्हें इच्छित स्वायत्तता हासिल नहीं है। यद्यपि वे कभी नहीं बताते कि भारतीय संविधान की किस धारा से उनकी किसी भी सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक या राजनीतिक इच्छा पर बाधा आती है? तब और स्वायत्तता के लिए उन्हें क्या चाहिए? इसका संकेत देते हुए उक्त नेता ने अपने उसी बयान में आगे कहा था, मैं स्वायत्तता से भी आगे बढ़ने से नहीं कतराता, यदि कोई और समाधान भारत और पाकिस्तान, दोनों को मंजूर हो तथा जम्मू और कश्मीर के लोगों की आकांक्षा के अनुरूप हो। यह कुछ विचित्र है। इसमें एक असंभव बात रखी गई है। पाकिस्तान कश्मीर को हड़पना चाहता है। क्या यही कश्मीरियों की आकांक्षा है? बिलकुल नहीं! वे पाकिस्तान का अंग होने का अर्थ अच्छी तरह जानते हैं। पिछले दो-तीन दशक के पाकिस्तान-अफगानिस्तान के जिहादी अनुभव से स्पष्ट है कि पाकिस्तान का अंग बनते ही कश्मीर को कंधार की तरह उजाड़ होने में अधिक देर नहीं लगेगी। इसीलिए यूरोपीय एजेंसियों द्वारा कराए गए विभिन्न जनमत-संग्रहों में यह बात सामने आई है कि कश्मीरी जनता पाकिस्तान में मिलना नहीं चाहती। हुर्रियत तथा आतंकवादी गिरोहों से जुड़े कुछ कश्मीरी ही पाकिस्तान से मिलना चाहते हैं। चाहे कश्मीरी मुसलमान पाकिस्तान के साथ मिलना नहीं चाहते, पर वे भारत पर धौंस जमाना चाहते हैं कि उनके पास विकल्प है। इस प्रकार, एक स्थायी शिकायती मुद्रा अपना कर वे भारत का अधिकाधिक दोहन करते रहना चाहते हैं। इसी कारण जब कश्मीर में अधिक समय तक शांति रहती है तो स्वयं कश्मीरी नेताओं को चिंता होने लगती है! किसी न किसी बहाने वे माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। नेशनल कांफ्रेंस या पीडीपी के बयानों, क्रियाकलापों को इस रूप में भी देखना चाहिए। और स्वायत्तता, जनमत-संग्रह या दोहरी संप्रभुता जैसे शिगूफे इसीलिए छोड़े जाते हैं। अभी अफजल को सजामुक्त करने का शिगूफा उसी की नई कड़ी है। संभवत: कश्मीर में थोड़ी-बहुत अशांति बने रहना कश्मीरी मुस्लिम नेताओं को अपनी राजनीतिक जरूरत लगती है। ताकि वे सुरक्षा बलों पर आरोप लगाते रह सकें, ताकि वे नई दिल्ली से मनमानी मांग कर सकें, ताकि स्वयं उनसे कोई किसी बात का हिसाब न मांगे-न स्थानीय जनता, न शेष भारत। जम्मू और लद्दाख कश्मीरी मुसलमानों की अहंमन्यता और शोषण का शिकार रहे हैं। ये भारत का पूर्ण अंग बन कर रहना चाहते हैं। अत: इन क्षेत्रों को स्वायत्त क्षेत्र या केंद्र शासित प्रदेश बनाकर कश्मीर में एक बड़े वर्ग द्वारा दिखाई जा रही अहंमन्यता और लूट पर लगाम लगाई जा सकती है। (लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं

ड्रोन का मलबा लेकर भागे आतंकियों की पाक के सुरक्षाबलों से मुठभेड़

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का दावा आतंकियों ने मार गिराया ड्रोन इस्लामाबाद, एजेंसी : पाकिस्तान के दक्षिण वजीरिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए उड़ा अमेरिका का चालक रहित खुफिया विमान ड्रोन रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दूसरी ओर तालिबान ने दावा किया है कि ड्रोन विमान दुर्घटनाग्रस्त नहीं हुआ है बल्कि उसने इसे मार गिराया है। हालांकि इस बात की पुष्टि अमेरिकी अधिकारियों की ओर से नहीं की गई है। समाचार पत्र द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त ड्रोन विमान का मलबा जैसे ही जमीन पर गिरा वहां पर तालिबान लड़ाकों का जमावड़ा लग गया। इसके बाद आतंकी विमान का मलबा लेकर जाने लगे, लेकिन पाक सुरक्षाबलों ने तेजी दिखाते हुए तत्काल एक टुकड़ी घटनास्थल भेजी और मलबा हासिल करने के लिए अभियान शुरू किया। दोनों ओर से हुई फायरिंग में दो आतंकियों की मौत हो गई और दो सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। सैन्य प्रवक्ता हालांकि यह बात कह रहे हैं कि उन्होंने मलबा हासिल कर लिया है, लेकिन इस बारे में अभी अधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की गई है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआइए) द्वारा संचालित ड्रोन विमान दक्षिण वजीरिस्तान के जंगारा गांव में दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। इस इलाके में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) लंबे वक्त से सक्रिय हैं। टीटीपी के प्रवक्ता एहसानुल्ला अहसान ने दावा किया कि इस विमान को उनके लड़ाकों ने मार गिराया है। दूसरी ओर सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन तकनीकी खराबी की वजह से हादसे का शिकार हो गया है। विमान का मलबा सुरक्षाबलों ने बरामद किया है। अमेरिकी ड्रोन उत्तर और दक्षिण वजीरिस्तान के कबाइली इलाकों में नियमित उड़ान भरते हैं। बीते चार वर्षो में ड्रोन ने सैकड़ों मिसाइलें दागी हैं। पाकिस्तान इन हमलों का विरोध करता रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञ चिंतित दो मई को एबटाबाद में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमेरिकी नेवी सील्स कमांडोज ने जब कार्रवाई की थी उस दौरान अमेरिका का अति आधुनिक हेलीकॉप्टर स्टील्थ दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हेलीकॉप्टर का मलबा अमेरिकी कमांडोज वहीं पर छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद द न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर दी कि पाकिस्तान ने चीन को स्टील्थ हेलीकॉप्टर का मलबा भेजा जिससे उसे इसकी तकनीक समझने में मदद मिली। अब ड्रोन का मलबा पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के हाथ लग गया है। पाक सरकार लंबे समय से अमेरिका से ड्रोन की मांग कर रही है। दूसरी ओर चीन सहित दुनियाभर के देश ड्रोन जैसा विमान बनाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। विशेष तौर पर चीन की सेना इसे हासिल करने के लिए दिन-रात एक किए हुए है। परेशानी की बात यह भी है कि अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते भी इन दिनों पटरी से उतरे हुए हैं। अब ड्रोन का मलबा अमेरिका को कितने दिनों में हासिल होगा यह देखने वाली बात होगी

अफजल अब भी हैरान क्यों नहीं फटा कार बम

संसद हमले में फांसी की सजा पाए कश्मीरी आतंकी मोहम्मद अफजल को यह सवाल आज भी हैरान करता है कि 13 दिसंबर 2001 को संसद हमले में प्रयुक्त कार में रखे बम में धमाका क्यों नहीं हुआ। तिहाड़ जेल नंबर 3 के अधीक्षक मनोज द्विवेदी ने 180 पन्नों के अपने दस्तावेज में यह खुलासा किया है। द्विवेदी के मुताबिक, अफजल ने उन्हें कथित तौर पर बताया था, उन्होंने बमों-विस्फोटकों से लदी कार को हमले की पूर्ववर्ती रात पुलिस के सामने इस डर से खड़ा किया कि इसे चोरी किया जा सकता है। हैरानी की बात है कि किसी पुलिसकर्मी ने इसकी जांच नहीं की। उन्हें (आतंकियों) पूरा भरोसा था कि जिस कार में आईईडी लगाया गया है, उसमें धमाका होगा। अफजल का कहना था कि हमले में सफलता मिल जाती तो वे जम्मू कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाते और सरकार से बातचीत करते। द्विवेदी के मुताबिक, उन्होंने छह अध्याय वाला यह दस्तावेज मार्च 2009 से दिसंबर 2010 के बीच अफजल के साथ हुई 200 घंटे की बातचीत के बाद तैयार किया है। पहला अध्याय हमले की सारी बातें बयां करता है। कैसे साजिश रची गई, विस्फोटक, आरडीएक्स, ग्रेनेड तथा चीनी पिस्तौल और अन्य चीजें जुटाईं। किस तरह संसद के मुआयने के लिए उन आतंकियों के दिल्ली में रहने का बंदोबस्त किया जो हिंदुस्तानी नहीं थे और भारतीय भाषाएं नहीं समझते थे। दस्तावेज में अफजल के बचपन व उसके पाक पहुंचने और आतंकी प्रशिक्षण लेने की वजहों का भी जिक्र है। द्विवेदी के मुताबिक, अफजल का कहना था कि भारत लौटने के बाद उसे लगा कि उसे इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए वह सामान्य जीवन जीने लगा। एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई के साथ ही अफजल ने आइएएस परीक्षा की भी तैयारी की। किताब में अफजल के फिर से राष्ट्र विरोधी तत्वों की ओर लौटने के कारण भी गिनाए गए हैं। इसमें लिखा है कि अफजल की काफी पीढि़यों पहले उसका परिवार ब्राह्मण जाति से ताल्लुक रखता था जिसने इस्लाम अपनाया था। द्विवेदी को तिहाड़ के अधिकारियों ने यह दस्तावेज पुस्तक के तौर पर प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी

बटला हाउस एनकाउंटर के तीन साल पूरे, पुलिस चौकस

नई दिल्ली जामिया नगर के बटला हाउस इलाके में आतंकियों के साथ हुए पुलिस मुठभेड़ को सोमवार को तीन साल पूरे हो जाएंगे। आज भी वहां के लोग उस दिन की घटना को भूल नहीं पाए हैं। उस घटना को लेकर राजधानी में पुलिस चौकसी बढ़ा दी गई है। सभी महत्वपूर्ण स्थानों खासतौर पर बटला हाउस इलाके पर पुलिस की खासी नजर है। पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता कई दिनों से जिले में घूम-घूम कर पुलिस को सजग व चौकस रहने के निर्देश दे रहे हैं। घटना के तीन साल बीत जाने के बावजूद वहां के लोग इससे उबर नहीं पाए हैं। लोगों में इस बात का खासा रोष है कि उन्हें भी शक की नजरों से देखा जाने लगा है। इस मसले पर एल-18 में रहने वाले लोग तो कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। ज्ञात रहे राजधानी में 13 सितंबर 2008 को करोलबाग, बाराखंभा रोड समेत पांच स्थानों पर हुए बम धमाकों के छह दिन बाद 19 सितंबर को स्पेशल सेल की आतंकियों के साथ यहीं पर मुठभेड़ हुई थी। सेल को सूचना मिली थी कि सीरियल ब्लास्ट के आतंकी एल-18 में ठहरे हुए हैं। सूचना के आधार पर जांच के लिए स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की देखरेख में पुलिस एल-18 बाटला हाउस में पहुंची थी। आतंकियों ने माजरा भांप फ्लैट के अंदर से पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी। इसमें इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे। पुलिस की तरफ से चली गोलियों से आतंकी मो. आतिफ अमीन तथा साजिद मौके पर ही मार दिए गए थे

ब्लास्ट पीडि़तों के इलाज में लापरवाही, संक्रमण का खतरा

नई दिल्ली हाई कोर्ट बम ब्लास्ट में घायल लोगों के इलाज में लापरवाही शुरू हो गई है! अपनों के घायल होने का दर्द झेल रहे परिजनों के अनुसार नर्सिग केयर में लगा स्टाफ काम में लापरवाही कर रहा है। घायलों को न ही समय पर दवाएं मिल रही हैं और न ही मरहम-पट्टी समय पर हो रही है। बम ब्लास्ट में घायल होने वाले 11 लोग आरएमएल अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से एक ही हालत गंभीर है और वह पुरानी बिल्डिंग के आइसीयू में हंै। छह मरीज रिकवरी रूम तथा चार ऑथोपेडिक वार्ड में हैं। अब तक इस बम ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। एक पैर गवां चुके 55 वर्षीय मदन मोहन शर्मा आइसीयू में हैं। उनकी पत्‍‌नी रेखा शर्मा कहती हैं कि डॉक्टर तो अच्छा इलाज कर रहे हैं, लेकिन नर्सिग केयर अच्छी तरह से नहीं मिल रहा है। हम काफी परेशान हैं और डर सता रहा है कि कहीं फिर से संक्रमण न हो जाए। संक्रमण के चलते ही मदन मोहन का एक पैर काटा जा चुका है। बाएं पैर में भी चोट पहुंची है और कमर का हिस्सा जल गया है। इसलिए हम चाहते हैं कि हमारे मरीज को भी आरएमएल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती किया जाए। डॉक्टरों के अनुसार मदन मोहन के ब्लड में संक्रमण का डर बना हुआ है। हालांकि कई अन्य लोग भी स्टाफ के व्यवहार से परेशान हैं। मगर परेशानी कहीं और न बढ़ जाए इसलिए सामने आकर बोलने को तैयार नहीं हैं। जिन मरीजों की स्थिति में सुधार हो रहा है उनमें तेजेंद्र सिंह, राधेश्याम, के पी शर्मा, मुकेश अरोड़ा, हरीश, राशिद अली हैं। इन्हें रिकवरी रूम में रखा गया है। तरुण यादव, किशन कुमार अरोड़ा, नितिन और प्रमोद अभी भी ऑर्थोपेडिक वार्ड में हैं। 1अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर सुनील सक्सेना के अनुसार सभी की स्थिति नियंत्रण में है। साफ्टवेयर इंजीनियर नितिन के शरीर में एक हजार से अधिक छर्रे लगे हैं। कई निकाले जा चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बहुत सारे छर्रे उनके शरीर में रह जाएंगे हालांकि इनसे उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी

अफजल को माफी के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होने देगी भाजपा

 अफजल की फांसी माफी के प्रस्ताव पर विधानसभा में चर्चा को मंजूरी मिलने से भड़की भाजपा ने चेतावनी दी है कि पार्टी इस मुद्दे पर बहस नहीं होने देगी। पार्टी ने कहा है कि इस मुद्दे पर यदि हालात बिगड़े तो पूरी जिम्मेदारी सरकार के कंधों पर होगी। दरअसल पार्टी इस वजह से ज्यादो खफा है कि अफजल के प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकृति मिल गई लेकिन गुलाम कश्मीर पर भाजपा के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। पार्टी मुख्यालय में रविवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भाजपा के चीफ व्हिप अशोक खजुरिया व मुख्य प्रवक्ता डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पार्टी उन कांग्रेस के मंत्रियों का पर्दाफाश करेगी जो इस मुद्दे पर चुप हैं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि अफजल की फांसी के मुद्दे पर कांग्रेस के मंत्री नेशनल कांफ्रेंस से मिले हुए हैं, इसीलिए निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद के विवादस्पद प्रस्ताव को विधानसभा में बहस के लिए लाने को मंजूरी मिली है। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह आतंकवादी की फांसी को माफ करने के प्रस्ताव के समर्थन में हैं, या इसके खिलाफ हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकार हर कीमत पर अलगाववादियों को खुश देखना चाहती है इसीलिए राज्य में भाजपा के उस प्रस्ताव को अस्वीकार किया गया है, जो 1994 में संसद में पारित हो चुका है

नाकामी की स्वीकारोक्ति

गृहमंत्री पी. चिदड्डबरम की यह स्वीकारोक्ति कि आतड्डकवाद को नियंत्रित करने के लिए सरकार उतना काम नहीं कर पाई जितना उसे करना चाहिए था, चिड्डतित और साथ ही सवाल खड़े करने वाली है। पहला सवाल यही उठेगा कि जब उनके साथ-साथ प्रधानमड्डत्री भी यह मान रहे हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा को आतड्डकवाद की चुनौती मिल रही है तब फिर उससे निपटने के लिए निर्णायक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं? इसके पहले गृहमड्डत्री ने नक्सलियों को सबसे खतरनाक मानते हुए कहा था कि वे देश की अस्मिता के लिए खतरा बन गए हैं और उनकी हिंसा में कोई कमी नहीं आई है। बावजूद इसके उनका यह भी कहना था कि नक्सलवाद से निपटने की जिम्मेदारी मूलत: राज्यों की है। इस सबसे यही स्पष्ट होता है कि केंद्र और राज्य सरकारें न तो आतंकवाद से निपटने के लिए तैयार हैं और न ही नक्सलवाद से। इससे बड़ी शर्म की बात और कोई हो नहीं सकती कि इन दोनों खतरों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के स्थान पर मजबूरियों का रोना रोया जा रहा है। इसी कारण आतड्डकवाद के साथ-साथ नक्सलवाद भी बेकाबू हो रहा है। यह अच्छी बात है कि नक्सलवाद और आतड्डकवाद पर प्रधानमड्डत्री और गृहमड्डत्री एक स्वर में बात कर रहे हैं, लेकिन आखिर उनके वक्तव्यों में नया क्या है? ये दोनों खतरे नए नहीं हैं, लेकिन उन पर चिड्डता इस तरह जताई जा रही है जैसे उनके बारे में कुछ नए खुलासे अभी हुए हों? कहीं इसका कारण जनता का ध्यान महड्डगाई और भ्रष्टाचार से हटाना तो नहीं है? यह सड्डदेह इसलिए, क्योंकि सरकार महड्डगाई और भ्रष्टाचार को लेकर उठे सवालों का जवाब तक नहीं दे पा रही है। यह जगजाहिर है कि नक्सलवाद ने देश के लगभग पूरे खनिज बहुल इलाकों को चपेट में ले लिया है। भारतीय गणतंत्र के खिलाफ विद्रोह पर उतारू नक्सली अपनी उस विचारधारा से पूरी तरह भटक चुके हैं जो आदिवासियों को न्याय दिलाने के नाम पर शुरू की गई थी। आज नक्सली सड्डगठन वन एवड्ड खनिज सड्डपदा पर कब्जा करने वाले माफिया बन गए हैं। नक्सलियों के इरादों से परिचित होते हुए भी राज्य सरकारें उनके खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए तैयार नहीं और अब केंद्र सरकार उनके समक्ष खुद को असहाय सा दिखा रही है। नक्सली अपनी पैठ लगातार मजबूत करते जा रहे हैं। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने ऐसे कोई कानून नहीं बनाए हैं जिनसे उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जा सके। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनजातियों के विकास के लिए जो तमाम योजनाएं बनाई गई हैं वे नक्सलवाद की कमर नहीं तोड़ पा रही हैं। केंद्र के पास इस सवाल का जवाब नहीं कि पाबड्डदी के बावजूद नक्सली संगठन क्यों ताकतवर होते जा रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं नक्सली संगठन राजनीतिक दलों से मिलकर अपने को और मजबूत कर रहे हैं? यह आशड्डका इसलिए, क्योंकि दशकों के प्रयास के बावजूद नक्सली संगठनों का दबदबा कम होने का नाम नहीं ले रहा। चुनावों के समय नक्सली क्षेत्रों में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक दल अपने जो उम्मीदवार खड़े करते हैं उनमें से अनेक नक्सलियों का समर्थन पाने की कोशिश में रहते हैं। तमाम स्थानीय राजनेता तो नक्सलियों से गुपचुप गठजोड़ भी कर लेते हैं। इस सबसे शीर्ष पर बैठे राजनेता अनजान नहीं हो सकते, लेकिन वे आंखें बंद किए हुए हैं। यह ठीक नहीं कि जो स्थानीय राजनेता नक्सलियों से नरमी बरत रहे हैं उनसे ही यह कहा जाए कि वे नक्सली क्षेत्रों की जनता का दिलोदिमाग जीतने की कोशिश करें। इस तरह के सुझावों से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं, क्योंकि उन पर अमल की सड्डभावना नहीं दिखती। ऐसे सुझाव तो नक्सलियों के दुस्साहस को और बढ़ाएड्डगे ही। आड्डतरिक सुरक्षा के समक्ष मौजूद दूसरे सबसे बड़े खतरे अर्थात आतड्डकवाद के मामले में भी यह स्पष्ट है कि राज्य और केंद्र अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए तैयार नहीं। मुड्डबई और फिर दिल्ली में आतड्डकी हमले से यह स्पष्ट है कि घरेलू आतड्डकी सड्डगठनों ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। पिछले दिनों ऐसे ही एक सड्डगठन इड्डडियन मुजाहिदीन को अमेरिका ने वैश्विक आतड्डकी सड्डगठन का हिस्सा मानते हुए उस पर प्रतिबड्डध लगाया और यह भी कहा कि उसके सड्डबड्डध पाकिस्तान से हैं। अमेरिका की मानें तो इड्डडियन मुजाहिदीन ने 2008 में मुड्डबई में हुए आतड्डकी हमले के दौरान लश्करे तैयबा को मदद दी थी। भारत सरकार ऐसा मानने से इड्डकार करती रही है। अमेरिकी प्रशासन का यह भी निष्कर्ष है कि लश्करे तैयबा, जैशे मुहम्मद, हुजी की तरह इड्डडियन मुजाहिदीन का भी मकसद गैर मुसलमानों पर हमले कर दहशत फैलाना और दक्षिण एशिया में एक कट्टर इस्लामी राष्ट्र का निर्माण करना है। जब यह स्पष्ट है कि इड्डडियन मुजाहिदीन का मकसद वही है जो दक्षिण एशिया और विशेष रूप से पाकिस्तान के जेहादी सड्डगठनों का है तब फिर इस धारणा का कोई मतलब नहीं कि यह देसी आतड्डकी संगठन अपनी गतिविधियों के जरिये मुसलमानों के साथ हो रहे कथित अन्याय का बदला ले रहा है अथवा उसका उद्देश्य हिड्डदुओं-मुसलमानों के बीच बैर बढ़ाना भर है। फिलहाल यह सामने आना शेष है कि अमेरिका की तरह भारत सरकार भी इड्डडियन मुजाहिदीन को लश्कर, जैश और हुजी जैसा खतरनाक सड्डगठन मानने के लिए तैयार है या नहीं? भारत सरकार इड्डडियन मुजाहिदीन को चाहे जिस नजर से देखे, यह ठीक नहीं कि दिल्ली विस्फोट के बाद जब अमेरिका ने इड्डडियन मुजाहिदीन और लश्कर की साठगाड्डठ उजागर की तब प्रधानमड्डत्री ने यह स्वीकारा कि सीमा पार आतड्डकी सड्डगठन फिर सक्रिय हो रहे हैं और हमारी सुरक्षा एजेंसियाड्ड पर्याप्त सक्षम नहीं। केंद्र सरकार ने यकायक जिस तरह आतड्डकवाद और नक्सलवाद के बेकाबू होते जाने के कारण गिनाने शुरू कर दिए हैं वह कुछ वैसा ही है जैसे महड्डगाई और भ्रष्टाचार को लेकर यह कहा जाने लगता है कि इनसे निपटने के लिए उसके पास जादू की छड़ी नहीं। यह निराशाजनक है कि केंद्र सरकार न केवल शुतरमुर्गी रवैया अपना रही है, बल्कि अपनी असफलता छिपाने के लिए आम जनता का ध्यान भटकाने का भी काम कर रही है। यदि आतड्डकवाद और नक्सलवाद पर काबू पाना है तो केंद्र और राज्यों को वोट बैंक की राजनीति से परे हटकर कुछ कठोर निर्णय लेने होंगे। वोट बैंक की राजनीति को आगे रखकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं हो सकती। यह वोट बैंक की राजनीति ही है जिसके चलते आतड्डकवाद और नक्सलवाद से निपटने के तरीकों पर आम सहमति कायम नहीं हो पा रही है। यदि आतड्डकवाद और नक्सलवाद पर काबू नहीं पाया जा सका तो आड्डतरिक सुरक्षा का परिदृश्य बिगड़ने के साथ ही देश की अड्डतरराष्ट्रीय छवि भी प्रभावित होगी। इस सबका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा और विदेशी पूड्डजी निवेश पर भी। आड्डतरिक सुरक्षा पर ढिलाई बरतने से भारत का हाल वैसा ही हो सकता है जैसा पाकिस्तान का वहाड्ड के आतड्डकी सड्डगठनों ने कर रखा है।

विस्फोट की जांच के लिए एनएसजी टीम आगरा रवाना

: आगरा के अस्पताल में हुए बम धमाके को केंद्रीय गृह मंत्रालय ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहा है और उत्तर प्रदेश के आतंकरोधी दस्ते (एटीएस) को मामले की जांच करने को कह दिया गया है। वैसे धमाके में प्रयोग किए विस्फोटक और उसके तरीके की पड़ताल के लिए एनएसजी की एक टीम को आगरा भेज दिया गया है। फिलहाल एनआइए की टीम को घटनास्थल पर भेजे जाने की कोई सूचना नहीं है। गृह सचिव आरके सिंह ने स्वीकार किया कि प्रारंभिक जांच में विस्फोट में आइईडी (परिष्कृत विस्फोटक) के इस्तेमाल की सूचना है। उनके अनुसार घटनास्थल से बैटरी और तार के टुकड़े भी मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि धमाके के लिए टाइमर या फिर रिमोट का इस्तेमाल किया गया होगा। पर विस्फोट के तरीके और उसमें इस्तेमाल किए गए विस्फोटक के बारे एनएसजी की फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगा। आतंकी कार्रवाई नहीं : बृजलाल लखनऊ, जागरण ब्यूरो : उत्तर प्रदेश के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) बृजलाल ने कहा कि आगरा के निजी अस्पताल में हुआ विस्फोट आतंकी कार्रवाई नहीं है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि अभी तक की पड़ताल में ऐसा कुछ भी नहीं मिला है, जिससे धमाके में आतंकियों का हाथ होने की बात कही जा सके। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि वहां पर इसे किसने रखा था। मौके से टिफिन के टुकड़े, बैटरी और तार बरामद हुए हैं। टाइमर के जरिये यह विस्फोट तो नहीं किया गया, इसकी पड़ताल की जा रही है। पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर पुलिस सक्रियता बढ़ा दी गई है। सभी पुलिस कप्तानों को कहा गया कि वह वाहनों की चेकिंग कराने के साथ मॉल, सिनेमाहॉल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड तथा जिले के महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करें। पर्यटन पर ग्रहण : आगरा में अस्पताल में हुए बम धमाके ने ताजनगरी के पर्यटन उद्योग को भी डरा दिया है। मुंबई बम धमाके के बाद धीमी पड़ी पैकेज टूर बुकिंग की रफ्तार हाल में ही सामान्य हो पाई थी। अब धमाके के बाद पूरा सीजन बर्बाद होने की आशंका खड़ी हो गई है। ताजनगरी में टूरिस्ट सीजन अक्टूबर से लेकर मार्च तक माना जाता है। अधिकांश विदेशी सैलानी अपने पैकेज टूर जुलाई से सितंबर तक बुक करा लेते हैं। परंतु धमाकों के बाद अब सीजन के लिए होने वाली बुकिंग न होने का खतरा खड़ा हो गया है

दिल्ली विस्फोट का सूत्रधार पकड़ से बाहर

जागरण संवाददाता दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर 7 सितंबर को हुए बम विस्फोट का सूत्रधार अभी भी पुलिस व एनआइए टीम की पकड़ से बाहर है। हालांकि, गिरफ्तार किए गए तीनों विद्यार्थियों से पूछताछ अभी भी जारी है। विस्फोट के बाद किश्तवाड़ के ग्लोबल साइबर कैफे से हुजी के नाम से विस्फोट की जिम्मेदारी लेने वाला ईमेल भेजने के आरोपी दो विद्यार्थियों के साथ तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कहा जा रहा है कि आमिर अब्बास देव ने दोनों विद्यार्थियों को ईमेल करने के लिए मैटर उपलब्ध कराया था। एनआइए तथा पुलिस ने ग्लोबल साइबर कैफे से मेल भेजने के आरोप में शारिक अहमद व आबिद हुसैन नामक दो विद्यार्थियों को गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ के बाद आमिर अब्बास को गिरफ्तार किया गया था। आमिर ने पुलिस को जो सूचनाएं दीं वह पुलिस तथा एनआइए तक ही महफूज है। जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार, पुलिस मुख्यालय में शारीक, आबीद और आमिर से एनआइए तथा पुलिस के आला अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। बताते हैं कि पूछताछ का सिलसिला देर रात 3:00 बजे तक चलता रहता है। लेकिन, इन तीनों के सिवाय न ही कोई और गिरफ्तारी हुई है और न ही इस मामले में किसी तरह की कोई महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी मिल रही है। हालांकि, इस मामले की जांच कर रही एनआइए टीम के मुखिया डीआइजी मुकेश सिंह, एसएसपी रैंक का एक अधिकारी और इनकी टीम के कुछ और सदस्य अभी भी किश्तवाड़ में डेरा डाले हुए हैं। डोडा, रामबन, किश्तवाड़ रेंज के डीआइजी मनीष कुमार सिन्हा भी पिछले दस दिनों से किश्तवाड़ में ही कैंप कर रहे हैं। पहले यह कहा जा रहा था कि ई-मेल करने वाले का पता चलने पर बम ब्लास्ट की गुत्थी आसानी से सुलझ जाएगी, लेकिन अभी तक बम विस्फोट करने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है

आतंकियों ने अपहरण कर सीआरपीएफ जवान का गला काटा

पुलवामा में आतंकियों ने सीआरपीएफ में भर्ती हुए अपने एक पुराने साथी का अपहरण कर गला काटकर उसकी हत्या कर दी। वहीं, कुपवाड़ा जिले के रंगवार इलाके में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के हथियारों का जखीरा बरामद किया है। शनिवार सुबह पुलवामा जिले के नांबलन जंगल में स्थानीय लोगों ने एक युवक का गला कटा शव देखने पर पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया। शव की पहचान की गई तो वह निकटवर्ती गांव के नजीर अहमद के बेटे इरशाद अहमद कूल्ले की थी। आतंकियों ने तीन दिन पहले ही उसे अपने घर की तरफ जाते हुए अगवा किया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इरशाद अहमद पहले एक सक्रिय आतंकी था। बंदूक और आतंकवाद से मोह भंग होने पर उसने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद वह एक विशेष भर्ती अभियान के तहत सीआरपीएफ में भर्ती हो गया और 181वीं वाहिनी का हिस्सा बना

हाई कोर्ट विस्फोट में 15वीं मौत

नई दिल्ली रतन लाल की मौत के साथ ही सात सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर हुए बम धमाके में मरने वालों की संख्या 15 हो गई है। मॉडल टाउन में रहने वाले रतन लाल (64) ने शनिवार सुबह करीब आठ बजे राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दम तोड़ दिया। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दस दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ते हुए आखिर शनिवार को वह जिंदगी से हार गए। दस दिन तक अस्पताल में रहे रतन लाल के शरीर में लगातार संक्रमण फैल रहा था जिसके कारण उन्होंने शनिवार को दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु की सूचना मिलते ही मॉडल टाउन के महेंद्रू एंक्लेव स्थित सी-38 गली नंबर-तीन में मातम फैल गया। कपड़े के कमीशन एजेंट रतनलाल सराफ पिछले कुछ माह से महेंद्रू एंक्लेव में परिवार सहित रहते थे। उनकी पत्‍‌नी दीपा, तीन पुत्रियां सुमन, संगीता और रचना हैं। तीनों शादीशुदा हैं। 22 वर्षीय पुत्र दीपक कुरूक्षेत्र विश्र्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन फाइनल इयर में बीटेक कर रहा है। शनिवार दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर जैसे ही उनके शव को उनके निवास स्थान पर लाया गया पूरी गली में मातम छा गया। पड़ोसियों को विश्र्वास ही नहीं हो रहा था कि हरदम खुशमिजाज और हंसमुख रतनलाल अब उनके बीच नहीं रहे

अफजल की माफी के प्रस्ताव पर होगी चर्चा

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में संसद हमले के दोषी अफजल की फांसी की माफी के प्रस्ताव पर चर्चा को हरी झंडी मिल गई है। इसका फैसला शनिवार सुबह 11 बजे सचिवालय में निकाले गए लॉटरी ड्रॉ से तय हुआ है। विधानसभा की नियमावली के नियम 26 व 28 के अनुरूप विधानसभा में तैनात सफाईकर्मियों ने संबंधित प्रस्तावों की लॉटरी निकाली गई। लॉटरी के आधार पर सात प्रस्तावों का चयन हुआ। 26 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले सत्र में अफजल के प्रस्ताव पर 28 सितंबर को चर्चा होगी। कुल 21 प्रस्तावों में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के अलावा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, भाजपा, पैंथर्स पार्टी का एक-एक और निर्दलीय विधायकों के दो प्रस्ताव आगामी सत्र की कार्यवाही में लाए जाएंगे। अलबत्ता, माकपा का एक भी प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ है। राज्य विधानसभा सचिव मुहम्मद रमजान ने दैनिक जागरण को बताया कि लंगेट के निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद का अफजल की फांसी की सजा माफी का प्रस्ताव विधानसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष मुहम्मद अकबर लोन द्वारा गुलाम कश्मीर के प्रस्ताव पर चर्चा की मंजूरी नहीं देने से भाजपा को करारा झटका लगा है। भाजपा ने गुलाम कश्मीर को पाक के कब्जे से मुक्त कराकर दोबारा राज्य का हिस्सा बनाने और इसके लिए केंद्र पर दबाव बनाने के प्रस्ताव पर विधानसभा सत्र में चर्चा की मांग की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा के इस प्रस्ताव को विधानसभा की नियमावली के नियम 179 के तहत खारिज कर दिया है। यह प्रस्ताव भाजपा विधायक अशोक खजूरिया ने 9 सितंबर को दाखिल किया था। खजूरिया ने बताया कि उन्हें इस संदर्भ में विधानसभा सचिवालय से लिखित सूचना मिली है

आगरा के अस्पताल में विस्फोट, छह घायल

 आगरा आगरा मथुरा हाइवे स्थित जय हॉस्पिटल में शनिवार शाम हुए बम विस्फोट से शहर में दहशत फैल गई। धमाका इतना जबर्दस्त था कि अस्पताल की लोहे की बेंच उखड़ गई। खिड़कियों के शीशे कई फीट दूर गिरे। चारों ओर काला धुआं फैल गया। ब्लास्ट में एक डॉक्टर समेत आधा दर्जन से अधिक तीमारदार घायल हुए हैं। एटीएस और बम डिस्पोजल स्क्वायड द्वारा मौके से नौ बोल्ट की बैटरी व सर्किट बरामद किए जाने से आतंकी वारदात की आशंका पुख्ता हो गई है। शहर में अलर्ट जारी करके के साथ ही रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, सिनेमाघरों और सार्वजनिक स्थलों पर चेकिंग शुरू हो गई है। घटना शाम लगभग 5.32 मिनट की है। अस्पताल में प्रतीक्षालय में अचानक जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद चीख-पुकार के बीच भगदड़ मच गई और कुछ ही क्षणों में अस्पताल खाली हो गया। आसपास की कॉलोनियों के लोग भी धमाके की आवाज सुनकर घरों से बाहर निकल आए। सड़क पर लोगों की भीड़ जमा हो जाने से यातायात थम सा गया। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन के आला अफसर मिलिट्री इंटेलीजेंस और बम डिस्पोजल स्क्वायड टीम के साथ अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल की खिड़की पर स्टील के दो टिफिन मिले। इसके चलते आशंका जताई जा रही थी कि बम टिफिन बॉक्स में रखा गया होगा। डीआइजी असीम अरुण ने बताया कि जांच एजेंसियां काम कर रही हैं। विस्फोटक गंभीर प्रकृति का था। शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। इस घटना के बाद सैन्य क्षेत्रों और उनके नजदीक सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं। सैन्य परिसरों के नजदीक अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। मथुरा रिफाइनरी पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री कुंवर जितेंद्र सिंह रविवार को विस्फोट स्थल का दौरा करेंगे। (पेज-5 भी देखें

Saturday, September 17, 2011

आतंक का नया ठिकाना कराची

पाकिस्तान के हालात 100 प्रतिशत सही होने की कोई उम्मीद दिखाई नहीं देती। आत्मघाती हमलों की खबरें पहले फलस्तीन और श्रीलंका से आती थीं। तब यह सोचा जाता था कि कैसे लोग दूसरों को मारने के लिए अपनी जान भी गंवा देते हैं। अब आत्मघाती हमले पाकिस्तान में आम बात हो चुके हैं। पाकिस्तान के हालात ऐसे बिगड़े कि लोगों की सोच भी बदल गई और जो बात वे किसी अन्य से समझना चाहते थे वह खुद ही समझ गए। जनता आत्मघाती हमलों की आदी हो चुकी है। अब तो बात इन आत्मघाती हमलों से काफी आगे निकल चुकी है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कोई कभी भी किसी की जान ले सकता है। जब चाहे किसी को पकड़ो, अपहरण करो और गला काटकर शव को बोरे में बंद कर किसी वीरान जगह पर छोड़ दो। पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर कराची गुजरे दो दशकों से बोरे में बंद लाशों के शहर से जाना जाता है। शहर में कोई नागरिक ग़ायब हो जाता है तो लोग रास्ते पर बोरा तलाश करते हैं कि शव इसमें से ही मिलना है। इस वक्त टारगेटेड मर्डर का दौर है। कोई इन घटनाओं को पूछने वाला नहीं है। अगर कोई रंगे हाथों पकड़ा भी गया तो वह भी छूट जाता है। पाकिस्तान के कानून में हत्यारे को रिहाई दिलाने की पूरी व्यवस्था है। कई हत्यारे अदालतों से आजाद हुए और उन्होंने फिर दर्जनों खून किए। सरकार इन हत्यारों के पीछे खड़ी होती है और यह सब कई सालों से होता चला आ रहा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर में हजारों आतंकवादी और हत्यारे इस तरह रिहाई पा चुके हैं। पाकिस्तान के प्रांत सिंध की राजधानी कराची में 1977 की तानाशाही के बाद कभी भी हालात अच्छे नहीं रहे। वहां बढ़ते आतंकवाद और टारगेटेड मर्डर को बंद करने की कोशिश ही नहीं की जाती। हिंसा की वजह से गृहमंत्री रहमान मलिक पर देश दुश्मनी का आरोप भी लग चुका है। यह आरोप किसी और ने नहीं, सिंध के पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ नेता ज़ुल्फिकार मिर्जा ने लगाया है। पाकिस्तान में जिन मुद्दों पर चर्चा है उनमें कराची का आतंकवाद, सिंध में आई बरसात की तबाही, ज़ुल्फिकार मिर्जा का उपरोक्त बयान शामिल है। कराची को देश का आर्थिक केंद्र भी कहा जाता है। इस शहर में कई सालों से जो हिंसा जारी है उसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। पाकिस्तान की सबसे बड़े अदालत में कराची में जारी आतंकवाद और लक्षित हत्याओं का मुकदमा भी चल रहा है। सरकार की ओर से दी गई रिपोर्ट में अदालत को बताया गया है कि केवल एक महीने में देश के सबसे बड़े शहर में 600 लोगों की हत्या की जा चुकी है, जिसमें 500 लोगों की घात लगाकर हत्या की गई है। यह भी सरकारी रिपोर्ट है कि कराची में कई क्षेत्रों को निषिद्ध क्षेत्र बनाया गया है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को भी जाने की अनुमति नहीं। कराची में जितने गैर कानूनी हथियार हैं उतने बाकी पूरे देश में नहीं होंगे। 20 लाख लोगों का मुकाबला करने के लिए 3 लाख लोगों को एक साल के अंदर हथियारों के लाइसेंस दिए गए हैं। कराची पर माफिया का राज है। अब तो लोग इस शहर को दूसरा दुबई कहते हैं और सारी दुनिया में यहां से आपरेशन चलता रहा है। सच तो ये है कि पाकिस्तान की सरकार माफिया तत्वों के आगे बंधक बन कर रह गई है। कराची में माफिया तत्व एक तानाशाह की मेहरबानी से पले-बढ़े। यह सैनिक तानाशाह जनरल जिया अल हक का 1980 का दौर था जब उन्होंने अपने खिलाफ़ सिंध प्रांत में चलते आंदोलन को रोकने के लिए प्रांत में रहने वाले लोगों का न केवल बंटवारा कर दिया, बल्कि एक ऐसा समूह खड़ा कर दिया जिसके कारण आज हालात बिगड़े हुए हैं। पाकिस्तान में एक बात हमेशा कही जाती है कि देश की कोई भी सियासी पार्टी ऐसी नहीं जिसका संबंध सेना से जुड़ा न हो। देश की कई सियासी पार्टियां ऐसी हैं जिनको सेना के केंद्रों अथवा मुख्यालय में बनाया गया है। एक तानाशाह जब अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है तो उसको वह काम करने से भी कोई नहीं रोक सकता जिससे देश की जड़ें खोखली होकर रह जाएं और पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर को जिस पार्टी ने बंधक बना रखा है वह भी जनरल जिया ने बनाई। फिर जनरल मुशर्रफ ने उसका इतना समर्थन किया कि आज किसी के नियंत्रण में कुछ नहीं रहा। अब तो हालत यह है कि देश के सैनिक प्रमुख खुद आकर कराची में बैठक लगाते हैं, लेकिन हालात कंट्रोल नहीं होते। पाकिस्तान का सबसे बड़ा बंदरगाह कराची में है। अब यह सामने आया है कि उस बंदरगाह से करीब 40 हजार कंटेनर गायब हो चुके हैं। आरोप है कि हथियार और दूसरी चीजों से भरे ये कंटेनर चोरी करवाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में बताया गया है कि करीब इतने कंटेनर पोर्ट से निकले, लेकिन वे अफगान सीमा पर पहुंचने से पहले गायब हो गए हैं। कराची की बिगड़ती हालत पर पाकिस्तान की सेना को भी चिंता है, सेना बार-बार बैठकें कर यह चेतावनी दे चुकी है कि सरकार हालत बेहतर करे, लेकिन इसी सेना के पूर्व प्रमुख मुशर्रफ की मेहरबानी से कराची के हालात हाथ से निकलते जा रहे हैं। इसलिए अगर कल सेना कराची में आई तो फिर उसको कोई निकाल नहीं सकता। यही कारण है कि सरकार में बैठी पार्टी का विचार है कि कोई और राह निकाली जाए ताकि सेना पाकिस्तान के बड़े शहर में न आ सके। (लेखक पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हैं

प्रतिबंधित सूची में डालने से नहीं रुकेगा आतंक

 इंडियन मुजाहिदीन के अमेरिका की प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल होना भारत के लिए सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से अहम है। इससे उसके आतंकी मंसूबों को कुचलने में कोई सफलता नहीं मिलेगी। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इंडियन मुजाहिदीन पर अमेरिकी प्रतिबंध से उसके आतंकी हमले करने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अमेरिकी प्रतिबंध के बाद कोई भी संगठन अमेरिका में कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता है। उसके बैंक खाते सील कर दिए जाते हैं और उससे जुड़े लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लग जाता है। पर उक्त संगठन पहले ही ऐसा कुछ भी नहीं कर रहा है। पूरी तरह भारत में पनपे आतंकियों के एक ढीले-ढाले संगठन के रूप में इंडियन मुजाहिदीन का लश्कर-ए-तैयबा से संबंध जरूर है। लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि लश्कर पहले से ही अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित है। एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने कहा कि इंडियन मुजाहिदीन को आतंकी गतिविधियों को चलाने के लिए अधिक पैसे की जरूरत भी नहीं है। उसने बहुत कम संसाधनों का इस्तेमाल कर अब तक के सभी आतंकी हमलों को सफलता से अंजाम दिया है। यह धन उसे भारत में आइएसआइ के नकली नोटों के सप्लाई नेटवर्क से आसानी से मिल जाता है। उनके अनुसार पूरी तरह भारत की धरती पर पनपे इस आतंकी संगठन से हमें खुद ही निपटना होगा

आइएम की औकात आंक रहीं खुफिया एजेंसियां

 लखनऊ अमेरिका द्वारा इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) को आतंकी संगठन करार दिए जाने के बाद खुफिया एजेंसियां उसकी हैसियत आंकने में जुट गई हैं। पूर्व की घटनाओं को ध्यान में रखकर एटीएस और आइबी की टीमें सभी संदिग्ध ठिकानों पर निगाह लगाये हैं और निरंतर जांच-पड़ताल जारी है। सिमी पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उसके मुखौटे के तौर पर आइएम का नाम उभरा। जांच एजेंसियों की मानें तो पूरे देश में इस संगठन के सदस्यों ने अपनी करतूतों के निशान छोड़े हैं। राष्ट्रीय स्तर पर आइएम की तस्वीर 2008 के जयपुर, अहमदाबाद और दिल्ली धमाकों के बाद उभरी, लेकिन सूबे में 2007 में ही आइएम के सदस्य अपनी करतूत दिखा चुके थे। 22 मई 2007 को गोरखपुर का सीरियल ब्लास्ट और फिर 23 नवंबर 2007 को वाराणसी, फैजाबाद और लखनऊ की कचहरियों में हुए ब्लास्ट का आरोप आइएम पर है। विभिन्न धमाकों में गिरफ्तार अबू बशर, शहजाद, सलमान उर्फ छोटू, आरिफ, सैफ, तारिक समेत कई ऐसे नाम हैं, जिन पर जयपुर, अहमदाबाद और दिल्ली के विस्फोट के साथ यूपी की कचहरियों में विस्फोट के आरोप हैं। जांच एजेंसी ने इन विस्फोटों का तार जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के सज्जादुर्रहमान से भी जोड़ा है, लेकिन लखनऊ विस्फोट के मामले में अदालत ने उसे बरी कर दिया। 19 दिसंबर 2008 को दिल्ली के बाटला हाउस मुठभेड़ कांड के बाद आजमगढ़ जिले के संजरपुर का नाम उभरा, जहां के आठ परिवारों के नौ लड़कों की भूमिका सामने आई। जयपुर, लखनऊ समेत कई जेलों में बंद आइएम के कई सदस्य इसी गांव के हैं। जहां तक सिमी के चेहरे पर आइएम के मुखौटे की बात है तो सुरक्षा एजेंसियों का तर्क है कि सिमी की स्थापना में आजमगढ़ के शाहिद बद्र, मध्य प्रदेश के सफदर नागौरी और अजीज खान की प्रमुख भूमिका रही, इसलिए इन स्थानों के ज्यादातर लोग सिमी पर प्रतिबंध के बाद आइएम के बैनर तले सक्रिय हो गए। जांच एजेंसियां आइएम नेटवर्क में अहमदाबाद, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तर प्रदेश के तार जोड़ती हैं। आइएम के टारगेट के तहत अयोध्या फैसले के दौरान लखनऊ में जज और वकीलों की रेकी करने अहमदाबाद से शेख मुजीब और उज्जैन से मोहम्मद असलम आया था, जिसे मध्य प्रदेश में जून में गिरफ्तार किया गया। इनके अलावा सिमी पर प्रतिबंध लगने के बाद कार्रवाई के दौरान फरार बहराइच के खलीक और याहिया के महाराष्ट्र में सक्रिय होने की बात भी सामने आई, जिनसे दिल्ली में पूछताछ चल रही है। आइएम की सक्रियता से इतर एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि सात दिसंबर 2010 को वाराणसी और 14 अक्टूबर 2010 के कानपुर विस्फोट का आज तक राजफाश नहीं हो सका है। अगर इसमें आइएम की भूमिका है तो उसके और किन सक्रिय सदस्यों ने इस घटना को अंजाम दिया और अगर आइएम सक्रिय नहीं है तो फिर सूबे में और कितने संगठन सक्रिय हैं? इस सवाल का भी किसी के पास जवाब नहीं है। सूबे के विशेष पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था बृजलाल का कहना है कि पूरे प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था चौकस है और देश के किसी भी विस्फोट का कोई कनेक्शन यूपी से नहीं है

हैदराबाद से भी जुड़े हैं दिल्ली धमाके के तार

 नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट पर आतंकी हमले के तार अब हैदराबाद से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार हमले में शामिल कुछ आतंकियों के संबंध हैदराबाद से हैं। दूसरी ओर, किश्तवाड़ में हमले की जिम्मेदारी लेने वाले ईमेल का पेन ड्राइव दो स्कूली बच्चों को देने के आरोपी आमिर अब्बास देव को अदालत में सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। मीडिया से संयम बरतने की अपील के दूसरे दिन एनआइए अधिकारी हाईकोर्ट हमले की जांच पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। दरअसल इसकी गुत्थी सुलझाने के बावजूद एनआइए हाईकोर्ट में बम रखने वाले आतंकी तक पहुंचने से पहले इसका खुलासा नहीं करना चाहती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन आतंकियों की धरपकड़ के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरे देश में सक्रिय हैं। उनके अनुसार हमले की साजिश में शामिल कुछ आतंकियों के तार हैदराबाद से जुड़े होने के सबूत भी मिले हैं और एनआइए की टीम स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर उनकी तलाश कर रही है। वहीं जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ में दो स्कूली बच्चों से ईमेल भिजवाने वाले आरोपी आमिर अब्बास देव को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। उससे पूछताछ में स्थानीय पुलिस की मदद के लिए एनआइए के डीआइजी स्तर के अधिकारी जम्मू-कश्मीर पहुंच गए हैं। इसे गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि हाईकोर्ट में बम विस्फोट के पहले ही इसने ईमेल तैयार कर लिया था और उसे दो स्कूली बच्चों को पेन ड्राइव में दे दिया था। विस्फोट के बाद इन बच्चों ने उसे दिल्ली स्थित मीडिया हाउस को ईमेल कर दिया था। ईमेल में हूजी की ओर से बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली गई थी

आतंकियों को नहीं रोक पा रहीं सुरक्षा एजेंसियां

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की आंतरिक सुरक्षा स्थिति को अनिश्चिततापूर्ण बताने के साथ ही गृहमंत्री पी.चिदंबरम की बात दोहराई है कि सुरक्षा एजेंसियों के पास नक्सलियों-आतंकियों से निपटने की क्षमता नहीं है। दिल्ली और मुंबई के ताजा हमलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी करार देते हुए प्रधानमंत्री ने आतंकियों की सुरागकशी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए हल्का सिपाही (बीट कांस्टेबल) प्रणाली की मजबूती पर बल दिया। मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को पुलिस महानिदेशकों को संबोधित करते हुए कहा, देश में सुरक्षा का माहौल अनिश्चित बना हुआ है। न तो नक्सली हमलों में कमी आ रही और न ही सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों को रोकने में सफल हो पाई हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर में इस बार गर्मियां शांति से गुजर गईं, लेकिन खतरा बरकरार है। पाक में भारत विरोधी आतंकी प्रशिक्षण शिविर फिर शुरू हो गए हैं और आतंकियों की भारत में घुसपैठ के प्रयास हो रहे हैं। शांति प्रयासों को पटरी से उतारने की कोशिश हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियां इनसे दृढ़ता से निपटें। जम्मू-कश्मीर में सरकार के शांति प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने राज्य में सुरक्षा बलों की कमी की संभावना से इंकार किया। नक्सली हिंसा में कमी न आने पर चिंता जताते हुए पीएम ने कहा, सरकार प्रभावित जिलों में विकास योजनाओं के सहारे नक्सलियों को अलग-थलग करने का प्रयास कर रही है। इंडिया रिजर्व बटालियन नामक विशेष बल गठित किया जा रहा है। नया बल बनने के बाद विकास योजनाएं पूरी होंगी और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव दिखेगा। मनमोहन ने जांच व सुरक्षा एजेंसियों की अल्पसंख्यकों के प्रति पूर्वाग्रह दूर करने की जरूरत पर बल देते हुए पुलिस महानिदेशकों से कहा, इस सामान्य धारणा से पुलिस की छवि को झटका लगता है। उन्होंने साफ कहा, यह धारणा चाहे जिन भी कारणों से बनी हो, उन्हें दूर करने के जरूरी उपाय किए जाएं, क्योंकि बेहतर पुलिस साबित होने के लिए समाज के सभी वर्गो का विश्वास जीतना जरूरी है। ताजा आतंकी हमलों को रोकने और हमलावरों की गिरफ्तारी में सुरक्षा एजेंसियों की विफलता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने पुलिस महानिदेशकों से बीट कांस्टेबल प्रणाली दुरुस्त करने को कहा। इससे मानव आधारित असली खुफिया जानकारी जुटाने में सफलता मिलेगी। पूरे पुलिस बल में 87 फीसदी कांस्टेबलों की संख्या बताते हुए उन्होंने कहा, दुरूह और खतरों से भरा काम करने के बावजूद सिपाही आधारभूत सुविधाओं से वंचित हैं। प्रधानमंत्री ने कांस्टेबलों के लिए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत पर बल दिया

अफजल की सजा पर चर्चा का भविष्य तय करेगी लॉटरी

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पेश किए जाने वाले अफजल की माफी संबंधी प्रस्ताव व अन्य अहम बिलों पर बहस होगी या नहीं, यह सदन नहीं तय करेगा। शायद काफी कम लोगों को यह पता होगा कि विधायकों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर दाखिल किए गए प्रस्तावों और बिलों में से किस पर चर्चा होगी और किस पर नहीं, यह विधानसभा में लॉटरी निकालकर तय होता है और इसकी जिम्मेदारी किसी अशिक्षित कर्मी या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सौंपी जाती है। 26 सितंबर से शुरू हो रहे सत्र में अफजल के प्रस्ताव का भविष्य भी लॉटरी से तय होगा। इन प्रस्तावों में लंगेट के निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद द्वारा संसद हमले में फांसी की सजा पाए अफजल की माफी के प्रस्ताव से लेकर नेशनल कांफ्रेंस के विधायक मीर सैफुल्लाह द्वारा मारे गए आतंकियों के बच्चों के लिए आरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्था का प्रस्ताव भी शामिल है। लेकिन सत्र में इन पर चर्चा लाटरी में इनके नाम निकलने पर ही होगी, अन्यथा नहीं। सत्र के लिए विभिन्न विधायकों द्वारा 39 प्रस्ताव भेजे गए थे। स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन ने सिर्फ 35 को ही स्वीकार किया है। पीडीपी महासचिव निजामदीन भट्ट ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। यह एक संवैधानिक प्रथा है, जो जम्मू-कश्मीर विधानसभा की नियमावली 26 और 28 के तहत चली आ रही है। उन्होंने कहा कि यह कोई तकनीकी काम नहीं है, सिर्फ पर्ची ही निकालनी है, इसलिए निम्न श्रेणी के कर्मचारी या किसी अशिक्षित कर्मी को यह जिम्मेदारी दी जाती है। वहीं लंगेट के विधायक इंजीनियर रशीद ने कहा कि लाटरी की प्रथा ठीक है। लेकिन अफजल का प्रस्ताव आम कश्मीरी अवाम की भावनाओं से जुड़ा है। उसकी सजा माफी कश्मीर में अमन बहाली की दिशा में एक अहम कदम हो सकती है, इसलिए मेरे इस प्रस्ताव को लाटरी की प्रक्रिया से अलग रखते हुए सत्र की कार्रवाई में शामिल किया जाना चाहिए