Monday, October 3, 2011

कश्मीर में घुसपैठ के पीछे आइएसआइ का हाथ

 श्रीनगर पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने अब सीधे तौर पर आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। यह खुलासा उत्तरी कश्मीर के जिला कुपवाड़ा में तीन दिन पहले पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी निसार अहमद राथर ने पूछताछ के दौरान किया है। निसार की माने तो आतंकी संगठन अब नशेड़ी युवकों को भी बड़े पैमाने पर अपने कैडर में जमा कर रहे हैं। पकड़े गए आतंकी निसार अहमद पुत्र अली रहमान निवासी कराची के पास से न सिर्फ हथियार, अत्याधुनिक संचार उपकरण, जीपीएस और खाद्य सामग्री मिली, बल्कि नशीले पदार्थ भी बरामद हुए हैं। पूछताछ के दौरान उसने कई सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि वह नशेड़ी है और हेरोइन का आदि है। निसार ने बताया कि उसके घर की आर्थिक हालत दयनीय है। वह नशे की लत का शिकार था और उसके भाई ने उसे लश्कर-ए-तायबा के भर्ती कमांडर को कुछ पैसों के बदले सौंप दिया। इसके बाद वह कराची में लश्कर के एक केंद्र में रहा, जहां उसकी तरह कुछ और लड़के भी थे। इसके बाद उन सभी को 12-12 के समूह में बांटकर मनशेरा स्थित आतंकी ट्रेनिंग कैंप भेजा गया। निसार ने बताया कि मनशेरा कैंप में पाकिस्तानी सेना और आइएसआइ के अधिकारी अक्सर उन्हें गुरिल्ला जंग की ट्रेनिंग देने आते थे। इस कैंप का कमांडर अब्दुल्ला शाहीन था। उसने बताया कि मनशेरा में ट्रेनिंग के बाद सभी लड़कों को जामगड़ के कैंप में आगे की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। इसके बाद सभी को केल स्थित सेना के गैरिजन कैंप में लाया गया, जहां पाकिस्तानी फौजियों की तरह सभी को ट्रेनिंग दी गई। आतंकी निसार ने बताया कि केल कैंप में ट्रेनिंग के बाद हम सात लोगों का एक दल बना, उसका लीडर अबु तल्हा को बनाया गया। हमें जिस लांचिंग पैड पर लाया गया, वहां भी पाकिस्तानी सेना के अफसर थे। गत मंगलवार की रात को उसे एलओसी पार कर कश्मीर में भेजा गया, लेकिन बार्डर पर ही उसकी मुठभेड़ भारतीय जवानों के साथ हो गई और वह पकड़ा गया। गौरतलब है कि 27/28 सितंबर की मध्यरात्रि को एलओसी के साथ सटे मच्छल सेक्टर में आतंकियों ने घुसपैठ का प्रयास किया था। लेकिन वहां तैनात जैकलाई के जवानों ने इस प्रयास को नाकाम कर दिया। सेना का यह अभियान अभी भी जारी है।

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