नई दिल्ली आतंकवाद पर अमेरिका से झाड़ खा रहा पाकिस्तान कश्मीर में घुसपैठ बढ़ाने की हर कोशिश कर रहा है। एक पखवाड़े में घुसपैठ की कोशिशों में हुए इजाफे और मुठभेड़ में बढ़ोतरी के साथ ही सरहद पार बैठे आतंकी आका घाटी में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बीच सुलह कर साझा अभियानों पर जोर दे रहे हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकियों के बीच बातचीत के पकड़े गए हालिया संदेशों में सामने आया है कि सरहद पार से घाटी के आतंकी गुटों में लश्कर और जैश के बीच एकजुटता की कोशिश हो रही है। सेना और भारतीय खुफिया एजेंसियों के हाथ लगे इन संदेशों में बेसाख्ता यह कोशिश की जा रही है कि लश्कर के स्थानीय कमांडर सीमा पास से पहुंच रहे जैश के आतंकियों को अपने अभियानों का हिस्सा बनने दें। साथ ही घुसपैठ में इजाफे और सक्रियता के लिए भी नसीहतें और निर्देश सीमापार से दिए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, आइएसआइ ने घुसपैठ सुनिश्चित करने के लिए पाक सेना और आतंकी गुटों के साथ मिलकर एक साझा समन्वय समूह (ज्वाइंट को-आर्डिनेशन ग्रुप) भी बनाया है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के मच्छल सेक्टर में पिछले सप्ताह सेना के हत्थे चढ़े लश्कर-ए-तैयबा आतंकी नसीर अहमद से पूछताछ में हासिल सूचनाएं भी बताती हैं कि आइएसआइ एक बार फिर घुसपैठ का ग्राफ बढ़ाने को बेताब है। कोशिश सर्दियों से पहले घाटी में आतंकियों की नई खेप पहुंचाने की है। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि केवल अगस्त में ही नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के 80 प्रयास हुए। इनमें 15 आतंकी मुठभेड़ में मारे गए और चार जिंदा पकड़ लिए गए। पकड़े गए सभी आतंकियों ने भारतीय सुरक्षा बलों को अपने प्रशिक्षण से लेकर घुसपैठ के प्रयासों तक में आइएसआइ की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
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