दिल्ली हाईकोर्ट में हुए आतंकी हमले को सुलझाने के करीब पहुंचने का दावा करने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी फिलहाल खाली हाथ है। दाऊद पर मजबूर सरकार : भारत के मोस्ट वांटेड अपराधी दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई में चिदंबरम ने अपनी असमर्थता जताई। दाऊद के बेटे की कराची में पिछले दिनों हुई शादी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने दावा किया कि उनके पास दाऊद के ठिकाने के बारे में ठोस जानकारी है। पर पाकिस्तान कार्रवाई नहीं कर रहा है। आडवाणी की यात्रा को सुरक्षा देने पर हो सकता है विचार : भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की प्रस्तावित यात्रा के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्र सरकार विचार सकती है। चिदंबरम ने कहा यात्रा के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है। अफजल मामले पर टिप्पणी से इनकार : संसद पर आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने को लेकर जम्मू-कश्मीर में जारी राजनीतिक हंगामे पर चिदंबरम ने कि दया याचिका पर राष्ट्रपति का फैसला आने के बाद ही सरकार इस मुद्दे पर विचार करेगी। रिपोर्ट के बाद ही तेलंगाना पर फैसला : अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर केंद्र सरकार को गुलाम नबी आजाद की रिपोर्ट का इंतजार है। चिदंबरम ने कहा कि आजाद शुक्रवार या शनिवार तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकते हैं। कहां से आया यह कंबख्त नोट सूचना के अधिकार के जरिये 2जी पर सामने आए विवादास्पद नोट से सरकार में शीर्ष स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। आरटीआइ के जरिये इस बैकग्राउंड नोट को मांगने और उसे मुहैया कराने की शीर्ष स्तर पर पड़ताल शुरू हो चुकी है। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र इसके पीछे साउथ ब्लाक के शीर्ष अधिकारियों के हाथ होने की गुंजाइश से भी इनकार नहीं कर रहे। शक है कि पीएमओ में एक नए अधिकारी के ताकतवर होने के बाद से अभी तक राज कर रहे अधिकारियों की लॉबी ने आरटीआइ की ताकत का इस्तेमाल करवा 25 मार्च के इस नोट को सार्वजनिक करवाया है। पी. चिदंबरम पर उंगली उठाने वाले इस नोट के सार्वजनिक होने के बाद बात और आगे तक पहुंचाने की विघ्नसंतोषी मानसिकता को भी सरकार में इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
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