Monday, October 3, 2011

कुरैशी को मारने की कोशिश आतंकी समूहों में निराशा का संकेत : लोन

 विकिलीक्स के ताजा खुलासे के मुताबिक हुर्रियत के वरिष्ठ नेता बिलाल लोन का मानना है कि पार्टी के उदारवादी नेता मौलाना फजल हक कुरैशी की हत्या का प्रयास जम्मू-कश्मीर की स्थिति में हो रहे सुधार के कारण कट्टरपंथी समूहों में निराशा का संकेत है। हाल ही में वेबसाइट की ओर से जारी इस दस्तावेज को भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत टिमोथी रोमर ने गोपनीय श्रेणी में रखा है। इसके मुताबिक लोन ने अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों से कहा कि इस घटना से उन्हें डर नहीं लगता, लेकिन ऐसी घटनाओं ने उदारवादी धड़े में असुरक्षा की भावना पैदा की है। दस्तावेज के मुताबिक, हुर्रियत और केंद्र के बीच वार्ता का हिस्सा रहे लोन बातचीत को तर्कपूर्ण अंजाम तक पहुंचाने की ख्वाहिश जाहिर करते हैं। हालांकि, वह इसमें आ रही रुकावटों के सामने घुटने टेकते हुए कहते हैं कि कट्टपंथियों और इस्लामाबाद को भी बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए। लोन के विचार में कुरैशी पर हमला यह दिखाता है कि सुरक्षा स्थिति में हो रहे सुधार और बातचीत आगे बढ़ने से कट्टरपंथी किस कदर हताश हो चुके हैं। आतंकवादियों ने चार दिसंबर 2009 को श्रीनगर में कुरैशी पर गोलियां चलाई थीं। इस घटना को केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रहे उदारवादी धड़े के लिए चेतावनी के रूप में देखा गया था। दस्तावेज में हुर्रियत कांफ्रेंस प्रमुख मीरवाइज उमर फारूख और दूतावास अधिकारियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत का ब्योरा भी है। इस दौरान मीरवाइज काफी निराश दिखे। उन्होंने कुरैशी पर हुए हमले की तुलना अपने पिता और अन्य उदारवादी नेताओं की हत्याओं से की। विकिलीक्स की ओर से जारी एक अन्य केबल में कहा गया है कि हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेताओं की जान को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से खतरा है।

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