नई दिल्ली, प्रेट्र : आतंकियों द्वारा विमान के
अपहरण और यात्रियों को बंधक बनाए जाने की स्थितियों से
निपटने के लिए उसमें तैनात स्काई मार्शलों को विशेष प्रकार की
दमदम गोली उपलब्ध कराई जाएगी। यह गोली हमलावर के शरीर के अंदर जाकर फटती
है। इससे किसी यात्री को नुकसान नहीं पहुंचता है और विमान में छेद भी नहीं
होता है। स्वतंत्रता
प्राप्ति से पूर्व इस प्रकार की बुलेट का विकास अंग्रेजों ने कोलकाता
में दमदम सैन्य छावनी के निकट किया था। इसी आधार पर इस गोली को यह अनोखा
नाम दिया गया है। केवल विशेष बल कमांडो ही इसका प्रयोग कर सकते हैं। एक
अंतरराष्ट्रीय समझौते के मुताबिक इस प्रकार के हथियार अन्य अवसरों पर प्रयोग
नहीं किए जा सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने 2008 के मुंबई
हमले के बाद अपने शस्त्रागार में इसको शामिल करने का फैसला किया। इसमें
उसे पांच सितारा होटल में आतंकियों से मुकाबला करना पड़ा था। इन गोलियों
के प्रयोग से हमलावर को या तो मार गिराया जा सकता है या फिर उन्हें घायल
किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि ऐसी गोलियों का आयात किया गया
है। हालांकि सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनकी ओर से यह नहीं बताया
गया कि आयात किस देश से किया गया है। एनएसजी कुछ चुनींदा
रूटों पर उड़ने वाले विमानों में स्काई मार्शल तैनात करता
है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य गोली के प्रयोग से यात्रियों और विमान
को भी नुकसान पहुंच सकता है, लेकिन दमदम गोली से इस प्रकार के नुकसान
की आशंका नहीं रहती है। इससे कमांडो बेहतर तरीके से
अपनी कार्रवाई को
अंजाम दे सकेंगे। कमांडो को इस प्रकार से प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे
अचूक निशाना लगा सकें। उनके द्वारा आतंकियों पर सटीक निशाना लगाए जाने के
बावजूद विमान या अन्य यात्रियों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है।
लेकिन, अब
इस अत्याधुनिक दमदम गोली के इस्तेमाल से इस आशंका को दूर किया
जा सकेगा।
1.
Dainik Jagaran National Edition 22-10-2012 lqj{kk) PeJ-5
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