Saturday, October 13, 2012

नशीली दवाओं की तस्करी से हो रहा आतंक का पोषण




ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली भारत ने मादक पदार्थो की तस्करी को मौजूदा समाज की सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए इस मसले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। भारत का मानना है कि मादक पदार्थो की तस्करी से होने वाली कमाई दुनिया में आतंकवाद व अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध में लग रही है। लिहाजा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मादक पदार्थो की तस्करी के खिलाफ अपने अभियान को और मजबूत करने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय औषधि नियंत्रण व अपराध रोकथाम और आपराधिक न्याय विषय पर हुई परिचर्चा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए सपा सांसद धर्मेद्र यादव ने कहा,तमाम कोशिशों के बाद भी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। विकसित देशों में औषधि का उपयोग जरूर कम हुआ है, लेकिन विकासशील देशों में इसके उपयोग में वृद्धि हुई है। नए बाजार भी उभर रहे हैं। मादक पदार्थो की तस्करी की बढ़ती समस्या ज्यादा गंभीर हुई है। सालाना 320 अरब डॉलर के मादक पदार्थो की तस्करी हो रही है, जबकि यह स्थिति मानव समाज के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। उससे हो रही कमाई आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध में लगाई जा रही है। हवाला कारोबार, ड्रग माफिया और हथियार विक्रेताओं का भी इससे संबंध है। लिहाजा, इस गठजोड़ के खिलाफ प्रयासों को और मजबूती से चलाने की जरूरत है। यादव ने कहा, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मद्देनजर आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय सहयोग के लिए आगे आना होगा।
Dainik Jagran National Edition, vkradokn  13-10-2012 Pej -2

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