Saturday, January 1, 2011

एक ही पेड़ की दो शाखाएं हैं लश्कर व आइएसआइ

पाकिस्तान में फल-फूल रहे आतंकवादी संगठनों और वहां की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के बीच रिश्ते जगजाहिर है। लेकिन मंुबई हमले के षड्यंत्रकर्ताओं में शामिल अमेरिकी लश्कर आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ में भारतीय और अमेरिकी जांच अधिकारियों के सामने जो खुलासा हुआ वह चौंकाने वाला है। हेडली के मुताबिक आइएसआइ के डायरेक्टर स्तर के अधिकारियों से लेकर इसके प्रमुख तक के आतंकी नेताओं से करीबी रिश्ते हैं। हेडली से जांच अधिकारियों की पूछताछ के आधार पर अमेरिकी मीडिया संस्थान प्रो रिपब्लिका ने इसका खुलासा किया है। हेरोइन तस्कर और डीइए का मुखबिर हेडली वर्ष 2000 में पाकिस्तान पहुंचा था। यहां पहले ही दौरे में उसकी मुलाकात लश्कर प्रमुख हाफिज सईद से हुई जो कि हजारों की रैली को संबोधित कर रहा था। इसके बाद के पांच सालों में वह पांच बार लश्कर के आतंकी कैंपों में गया, जहां आइएसआइ और पाकिस्तानी सेना के अधिकारी हथियार मुहैया कराने के साथ प्रशिक्षण के गुर बताते थे। लश्कर ने हेडली को साजिद मीर उर्फ साजिद मजिद नाम के आतंकवादी के साथ जोड़ा, जिसने बाद में कथित तौर पर मुंबई हमले की साजिश रची। अमेरिकी जांच अधिकारियों के मुताबिक मीर के आइएसआइ के साथ काफी करीबी रिश्ते थे। उसके पाकिस्तान सेना या खुफिया एजेंसी से जुड़े होने की भी आशंका है। पूछताछ में हेडली ने बताया कि लश्कर के कैंपों में रहने के दौरान उसने देखा कि लश्कर आइएसआइ के साथ ऐसे रिश्ता रखता था मानो दोनों एक ही पेड़ की दो शाखाएं हों। लश्कर के ज्यादातर ऑपरेशन खुफिया एजेंसी के निर्देशन में होते थे और इसके प्रमुख पर आइएसआइ के अधिकारियों का नियंत्रण रहता था। आइएसआइ का एक बिग्रेडियर जनरल लश्कर के सैन्य प्रमुख जकी-उर-रहमान लखवी के लिए कठपुतली की तरह था और वह एजेंसी के महानिदेशक का भी करीबी था। हेडली ने बताया कि आइएसआइ लश्कर को फंड देने के साथ ही इसके प्रमुख हाफिज सईद को छत्रछाया भी मुहैया करता है। वह खुफिया एजेंसी का बहुत करीबी है। हेडली के इस बयान से विदेशी खुफिया एजेंसियां भी सहमत हैं। उनके मुताबिक लश्कर का गठन ही कश्मीर पर भारत के कब्जे के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ने के लिए हुआ था। आइएसआइ से फंड व मार्गदर्शन मिलने के कारण इसने अल-कायदा से अलग मार्ग अपनाया और पाकिस्तान के खिलाफ हमले से बचता रहा। 2006 में हेडली आइएसआइ के संपर्क में आया, जब उसे भारत में हथियार भेजने के आरोप में पाकिस्तानी सेना ने थोड़े समय के लिए अपनी हिरासत में लिया था। इसी दौरान मेजर समीर अली नामक आइएसआइ का एक अधिकारी हेडली से मिला। उसने हेडली को मेजर इकबाल के जिम्मे सौंप दिया। इकबाल ने हेडली को लेफ्टिनेंट कर्नल शाह नामक शख्स से मिलवाया। शाह ने हेडली से वादा किया वह भारत के खिलाफ आतंकी कार्रवाई में आर्थिक रूप से मदद देगा। कई मुलाकातों के बाद इकबाल ने हेडली को भारत से संबंधित कुछ गुप्त दस्तावेज दिए। इसके बाद उसने एक नॉन-कमीशंड अधिकारी को हेडली को बेहतर खुफिया प्रशिक्षण देने के लिए कहा। उसके निर्देशन में हेडली ने सुरक्षा चक्र को तोड़ने के साथ दूसरे गुर भी सीखे, जिसे उसने लाहौर की सड़कों पर आजमाया भी। कई महीनों के प्रशिक्षण के बाद हेडली को मेजर इकबाल ने मिशन के दौरान कैमरा और अन्य यंत्रों के इस्तेमाल की विधि बताई। डेविड हेडली को पिछले साल की शुरुआत में शिकागो पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

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