Wednesday, January 26, 2011

दिल्ली को डर्टी बम से दहला सकते हैं आतंकी


देश पर हमले की ताक में बैठे आतंकवादी अब नए तरीके अपनाने की फिराक में हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर आतंकी संगठन इस बार रेडियोएक्टिव बमों का इस्तेमाल करके दहशत फैला सकते हैं। खुफिया ब्यूरो (आइबी) के अधिकारियों ने यह आशंका व्यक्त की है। रेडियोएक्टिव पदार्थो से बने बम को डर्टी बम नाम दिया गया है। आइबी ने दिल्ली पुलिस को इस बारे में पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी है। इसके मुताबिक, आतंकवादी हमेशा से हथियार और आरडीएक्स जैसी विस्फोटक सामग्री का प्रयोग करते आए हैं। मगर अब वे मासूम लोगों को नुकसान पहंुचाने के लिए नई-नई तकनीक और रेडियोएक्टिव बम के इस्तेमाल के साथ कुछ भी कर सकते हैं। आइबी के सूत्रों के अनुसार, कुछ आतंकी संगठन तो 26 जनवरी पर 9/11 जैसे हमले करने की योजना भी बना रहे हैं। इनमें से कुछ संगठन घातक रसायन नाइट्रोसेल्युलोज का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह शरीर में जलन और सूजन पैदा करने वाला खतरनाक रसायन है। आतंकी इसे भीड़ के बीच फ्लश लाइट, कैमरे या कैप्सूल के जरिए ले जा सकते हैं। इस बारे में प्रतिक्रिया देने के लिए दिल्ली पुलिस का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। जबकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि रेडियोएक्टिव पदार्थो के जरिए होने वाले हमलों से निपटने के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। (मिड डे) क्या है डर्टी बम इनमें परमाणु सामग्री के बजाय विषैले रेडियोएक्टिव पदार्थो का प्रयोग होता है। ऐसे बम फटने पर खतरनाक रेडियोएक्टिव किरणों का उत्सर्जन करते हैं। इनमें एक्स-रे जैसी घातक किरणें भी हो सकती हैं, जो कैंसर भी पैदा कर देती हैं। इन बमों का उद्देश्य लोगों की जान लेना नहीं बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक नुकसान पहंुचाना है। इनसे निकलने वाली गैसें आस-पास के वातावरण को भी दूषित कर देती हैं।

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