स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के नए नाम के साथ सक्रिय होने और उत्तरी भारत से दक्षिणी भारत हस्तांतरित होने की खबरें न केवल इसलिए ध्यान देने योग्य है कि महत्वपूर्ण नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद इस संगठन का वजूद बरकरार है, बल्कि इसलिए भी है कि इस पर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रभाव बिल्कुल साफ नजर आता है। अपना वजूद बरकरार रखने के लिए उसने लश्कर का ही तरीका अपनाया है। पाकिस्तान में प्रतिबंधित होने के बाद लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान में अलग-अलग नाम से अलग-अलग जगहों पर सक्रिय है, उसी तरह सिमी के भारत में सक्रिय होने की खबरें हैं। पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और इंडियन मुजाहिदीन को अगर सिमी की उपज समझा जा रहा है तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है। इस सिलसिले में खुफिया एजेंसियों और मीडिया के पास ठोस सबूत भले ही नहीं है मगर इन संगठनों द्वारा जो कारनामें अंजाम दिए जा रहे हैं, वह सिमी के उसूलों के जीवित होने की ही पुष्टि करते हैं। हाल ही में धार्मिक नगरी वाराणसी में शीतला घाट पर हुए धमाके में हालांकि नुकसान कम हुआ है, लेकिन उसकी दहशत अब भी मौजूद है। एक सूचना के अनुसार इस धमाके के बाद शहर के पर्यटन और अन्य उद्योग बुरी तरह प्रभावित हैं। धमाके में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ बताया जा रहा है। इससे पहले केरल में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी। अर्नाकुलम जिले में तथाकथित रूप से इस्लाम को बदनाम करने वाला प्रश्नपत्र बनाने के लिए एक प्रोफेसर का हाथ काट दिया गया था। यह कारनामा पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने अंजाम दिया था। अगर हम और पीछे जाएं तो बेंगलूर और अहमदाबाद में हुए धमाके और सूरत में विस्फोटकों से लदे ट्रक तथा 18 बम मिलने के सवाल अभी भी उलझे हुए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि सबका रिमोर्ट पाकिस्तान में ही है? केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक जोगेन्द्र सिंह के अनुसार भारत में होने वाले आतंकवादी हमलों की योजनाएं पाकिस्तान में ही बनती हैं। उन्होंने कहा है कि कारगिल युद्घ के दौरान हमारे 400 जवान शहीद हुए थे और हमने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। जबकि गत 20 वर्षों में लगभग 64,000 लोग आतंकवाद से किसी न किसी तरीके से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को गुप्तचर तंत्र को मजबूत करना पडे़गा। पूरी दुनिया में आतंकवाद से संबंधित कानून में संशोधन हुआ है और भारत में भी इस कानून को सख्त बनाने की जरूरत है। जांच से संबंधित एजेंसियां पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और इंडियन मुजाहिदीन को लेकर असमजंस में हैं। वह यह मानकर काम कर रही हैं कि आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क ने दोनों संगठनों का नाम लश्कर और सिमी की ओर से ध्यान हटाने के लिए उछाला है। उनकी सोच गलत भी नहीं लगती। गुप्तचर ब्यूरो के अनुसार बेंगलूर और अहमदाबाद में हुए धमाकों की साजिश कराची में रची गई थी। रसूल खान पारती और सूफिया अहमद परतिंज्ञा ने दोनों शहरों में हुए बम धमाको का नक्शा बनाया था। रेडइफ डॉट ने आइबी के हवाले से यह खबर दी थी। खबर में कहा गया था कि दोनों मास्टरमाइंड कराची में रहते हैं। दोनों के बारे में यह भी मालूम हुआ है कि वे हरकत उल मुजाहिदीन इस्लाम के सदस्य हैं। इस बीच आतंकवाद पर जारी बहस का नई दिशा लेना बहुत खतरनाक नजर आ रहा है। अब तक यह बहस जारी थी कि आतंकवाद किस तरह समाप्त किया जाए? लेकिन अब यह बहस शुरू हो गई है कि किस धर्म का आतंकवाद अधिक खतरनाक है ? क्या आतंकवाद का भी कोई धर्म होता है? धर्म के नाम पर आतंकवाद फैलाने की बात तो किसी हद तक ठीक है। लेकिन आतंकवाद फैलाने वाले धार्मिक हैं, यह बात बिल्कुल ठीक नहीं है। क्योंकि कोई भी धर्म किसी निर्दोष की हत्या की अनुमति नहीं देता। जबकि आतंकवाद का निशाना बनने वाले अधिकतर निर्दोष ही होते हैं। (अडनी)
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