Sunday, January 9, 2011

दो दशक की हिंसा में कश्मीर ने खोए 697 राजनेता

20 साल में चार हजार आतंकियों ने किया सरेंडर, 20 हजार से अधिक पकड़े गए
सालों से हिंसा की आग में झुलस रहे कश्मीर ने अपने लोगों के साथ कई नेताओं को भी खो दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में यह रहस्योद्घाटन हुआ है कि पिछले 20 वर्ष में यहां की हिंसा ने 697 राजनेताओं की हत्या कर डाली। मारे जाने वाले राजनीतिक नेताओं में अधिकतर का संबंध नेशनल कांफ्रेंस से है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस दौरान 4060 आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इस बीच 20 हजार से अधिक लोग आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार भी किए गए। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जो आंकड़े पेश किए हैं उनमें कई चौंका देने वाली बातें भी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 वर्ष की हिंसा में जो राजनीतिज्ञ मारे गए, उनमें कई बड़े नेता भी शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 100 राजनीतिक दलों के नेता केवल 2002 में मारे गए। सबसे कम मृत्यु 2008 में हुई, जिसमें केवल 3 राजनीतिज्ञ मारे गए। बीते वर्ष के बारे में कहा गया है कि केवल 4 नेता मारे गए हैं जबकि 2009 में 6 नेता मारे गए थे। वर्ष 2007 में आतंकवादी घटनाओं में 9 नेता मारे गए जबकि 2006 में 17, 2005 में 40, 2004 में 62, 2003 में 52, 2002 में 100, 2001 में 66 और 2000 में 35 राजनीतिज्ञ मारे गए। इस दौरान कश्मीर में 4060 आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया जिनमें 273 विभिन्न आतंकवादी संगठनों के कमांडर थे। यह भी बताया गया है कि नवंबर 2010 तक 19 आतंकवादियों ने सरेंडर किया है जबकि 15 आतंकवादियों ने 2009 में आत्मसमर्पण किया था। 38 आतंकवादियों ने 2008 में, 182 ने 2007 में, 190 ने 2006 में, 64 ने 2005 में, 137 ने 2004 में, 119 ने 2003 में, 159 ने 2002 में, 85 ने 2001 में, 104 ने 2000 में आत्मसमर्पण किया। सबसे अधिक 1996 में 655 आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया जबकि 1991 में 612 ने, 1992 में 444 ने, 1993 में 98 ने और 1994 में 32, 1995 में 601 ने, 1997 में 270 ने, 1998 में 187 ने, 1999 में 109 ने आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की ओर से शुरू की गई आत्मसमर्पण नीति द्वारा अब तक 2876 आत्मसमर्पण करने वाले आतंकवादियों को पुनर्वास के दायरे में लाया गया है और उन्हें 3 लाख रुपये दिए गए हैं। हर माह उन्हें 300 रुपये भी दिए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दो दशकों से जारी आतंकवाद के दौरान 21,115 लोगों को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। दो दशकों के दौरान कश्मीर में हिंसा में अनगिनत लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। केंद्र की ओर से जारी रिपोर्ट में 20 वषरें में 21 हजार लोगों की गिरफ्तारी स्वीकार की गई है। लेकिन राज्य सरकार ने गिरफ्तार होने वाले लोगों की संख्या कई गुना अधिक बताई है। बहुत सारे लोग लापता भी हैं। हाल ही में 5 माह की हिंसा में भी बहुत लोग गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि गिरफ्तार किए जाने वालों को रिहा कर दिया जाएगा।

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