केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में यह रहस्योद्घाटन किया गया है कि कश्मीर में बीस वर्ष की हिंसा में 697 राजनीतिज्ञों की मृत्यु हुई, जिनमें सबसे अधिक 100 राजनीतिक दलों के नेता केवल 2002 में मारे गए। मारे जाने वाले राजनीतिक नेताओं में अधिकतर का संबंध नेशनल कांफ्रेंस से है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीस वर्ष के दौरान 4,060 आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 273 कमांडर भी शामिल हैं, जबकि 1996 में सबसे अधिक आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया। इस बीच 20 हजार से अधिक लोग आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार भी किए गए। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उनमें कई चौंका देने वाली बातें भी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीस वर्ष की हिंसा में जो राजनीतिज्ञ मारे गए, उनमें कई बड़े नेता भी शामिल हैं। सबसे कम मृत्यु 2008 में हुई, जिसमें केवल तीन राजनीतिज्ञ मारे गए। बीते वर्ष के बारे में कहा गया है कि केवल चार नेता मारे गए हैं, जबकि 2009 में छह नेता मारे गए थे। वर्ष 2007 में आतंकवादी घटनाओं में नौ नेता मारे गए, जबकि 2006 में 17, 2005 में 40, 2004 में 62, 2003 में 52, 2002 में 100, 2001 में 66 और 2000 में 35 राजनीतिज्ञ मारे गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मारे गए राजनीतिक नेताओं में सबसे अधिक नेशनल कांफ्रेंस के लोग मारे गए। इस पार्टी के कुल 420 नेताओं की हत्या कर दी गई, जबकि पीडीपी के 96, कांग्रेस के 85, सीपीआइ के 16, बीजेपी और आवामी लीग के 15-15 नेता मारे गए। 14 आजाद उम्मीदवार मारे गए। जनता दल के 12, पीडीएफ के 4, आवामी एक्शन कमेटी के 3, नेशनल कांग्रेस पार्टी के 3, जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के 2, पीपुल्स कांफ्रेंस के 2, आवामी महाज और अकाली दल के 1-1, मुस्लिम युनाइटेड फ्रंट के 2 और आवामी नेशनल पार्टी के 2 नेता मारे गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में बीस वर्ष के दौरान आतंकी वारदातों में शामिल 4060 लोगों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 273 विभिन्न आतंकी संगठनों के कमांडर थे। यह भी बताया गया है कि नवंबर 2010 तक 19 आतंकियों ने सरेंडर किया है, जबकि 15 आतंकियों ने 2009 में आत्मसमर्पण किया था। 38 आतंकियों ने 2008 में, 182 ने 2007 में, 190 ने 2006 में, 64 ने 2005 में, 137 ने 2004 में, 119 ने 2003 में, 159 ने 2002 में, 85 ने 2001 में, 104 ने 2000 में आत्मसमर्पण किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे अधिक आतंकियों ने 1996 में आत्मसमर्पण किया था। 1996 में 655 आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 1991 में 612 ने, 1995 में 601 ने, 1992 में 444 ने, 1997 में 270 ने, 1998 में 187 ने, 1999 में 109 ने, 1993 में 98 ने और 1994 में 32 आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार की ओर से शुरू की गई आत्मसमर्पण नीति द्वारा अब तक 2,876 आत्मसमर्पण करने वाले आतंकियों को पुनर्वास के दायरे में लाया गया है और उन्हें 3 लाख रुपये दिए गए हैं, जबकि हर माह उन्हें 300 रुपये भी दिए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दो दशकों से जारी आतंकवाद के दौरान 21,115 लोगों को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, दो दशकों के दौरान कश्मीर में हिंसा में अनगिनत लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और संपत्ति का भी नुकसान हुआ। केंद्र की ओर से जारी रिपोर्ट में बीस वर्षो में 21 हजार लोगों की गिरफ्तारी स्वीकार की गई है, लेकिन राज्य सरकार ने गिरफ्तार होने वाले लोगों की संख्या कई गुना अधिक बताई है। बहुत सारे लोग लापता भी हैं। हाल ही में 5 माह की हिंसा में भी बहुत लोग गिरफ्तार किए गए हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि गिरफ्तार किए जाने वालों को रिहा कर दिया जाएगा।
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