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आतंकवादियों ने सोशल मीडिया को बनाया
नया हथियार
कहा, सुरक्षा एजें सियों
को हर खुफिया जानकारी पर त्वरित संज्ञान लेना चाहिए ताकि आतंकियों की घुसपैठ की
कोशिश को नाकाम किया जा सके
नई दिल्ली (एसएनबी)। केंद्रीय गृह
मंत्री सुशील कुमार शिन्दे सोशल मीडिया
के जरिए अफवाह फैलाने या भड़काऊ सामग्री डालने को आतंकियों का
नया हथियार मानते
हैं। खुफिया ब्यूरो द्वारा आयोजित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और पुलिस
महानिरीक्षकों के तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने बृहस्पतिवार
को कहा कि साइबर हमला सुरक्षाबलों के लिए नयी चुनौती बनकर उभरा है।
गृह मंत्री ने कहा कि इस बात के काफी साक्ष्य मिले हैं कि आतंकवादियों ने
साइबर जगत को नया हथियार बनाया है। कर्नाटक के बेंगलुरू, महाराष्ट्र के पुणो और अन्य शहरों में हुई हाल की
घटनाओं से साफ पता चलता है कि जानबूझकर
अफवाहें फैलाई गई और सोशल मीडिया का गैर जिम्मेदाराना इस्तेमाल
किया गया। इससे
नयी तरह की चुनौती सामने आई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में किसी की
असल पहचान का पता नहीं चलने की वजह से कभी कभार बहुत अनुभवी पुलिस जांचकर्ता
के लिए भी मुश्किल हो जाती है। ऐसे में पुलिसबल को इस क्षेत्र में
कौशल विकसित करना होगा ताकि न सिर्फ भड़काऊ सामग्री का पता लगाया जा सके
बल्कि सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री डालने वाले की पहचान भी हो सके। शिन्दे
ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को हर खुफिया जानकारी पर त्वरित संज्ञान लेना चाहिए ताकि पाकिस्तान
स्थित इस्लामिक संगठनों की आतंकवादियों
की घुसपैठ कराने की तमाम कोशिश को नाकाम किया जा सके। उन्होंने
कहा कि केंद्रीय
एजेंसियों और पुलिस बलों के बीच कोई अंतर नहीं होना चाहिए क्योंकि वे
आतंकवाद से निपटने के साझा उददेश्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम करते
हैं। जनवरी 2011 से
अब तक देश भर में 19 आतंकी
माड्यूल ध्वस्त करने के लिए
खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की सराहना करते हुए शिन्दे ने कहा कि नक्सलवाद
अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के बड़े
समूहों में चलने, जन
अदालत लगाने और लेवी वसूलने से उनके विास के स्तर का पता चलता है। सात राज्य नक्सलवाद से
जूझ रहे हैं हालांकि 80 फीसद
नक्सल हिंसा
30 से
कम जिलों में हो रही है और उनमें से अधिकांश जिले अंतर राज्यीय सीमा पर स्थित हैं। शिन्दे ने
कहा कि प्रशिक्षित और सशस्त्र कैडरों
की संख्या में बढ़ोतरी और उनके पुनर्गठन के संकेत मिले हैं।
उन्होंने कहा कि
खुफिया तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। नक्सलियों से निपटने के लिए विशेष
बल का गठन किया जाना चाहिए। राज्यों को विकास योजनाओं के प्रभावशाली कार्यान्वयन
को तरजीह देनी चाहिए ताकि नक्सल हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में चहुंमुखी
विकास हो सके। असम में जातीय समूहों के बीच हुई हिंसा को सांप्रदायिक रंग देने को शिन्दे ने
दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे
कई जानें गई तथा लोगों को राहत शिविरों में जाना पड़ा।
राष्ट्रीय सहारा दिल्ली संस्करण पेज 2, 07-09-2012 आतंकवाद
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