व्लादीवोस्तोक (रूस) रायटर : अमेरिका
ने अफगान तालिबान के सबसे मजबूत धड़े हक्कानी गुट को आतंकी संगठन घोषित करने का फैसला कर लिया है। इस कदम से
साफ हो गया है कि हक्कानी गुट की कमर
तोड़ने के लिए अमेरिकी सरकार पाकिस्तान की नाराजगी झेलने को भी तैयार है। शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने बताया कि उन्होंने इस कदम को औपचारिक मंजूरी दे दी
है। उन्होंने कांग्रेस भेजी जाने वाली
प्रतिबंधों से जुड़ी रिपोर्ट पर ब्रुनेई में हस्ताक्षर किए। इसके बाद 7 से 10 दिन के भीतर हक्कानी गुट को आतंकी संगठन घोषित कर दिया जाएगा। हिलेरी एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) सम्मेलन में हिस्सा
लेने के लिए रूस में हैं। दूसरी ओर हक्कानी
गुट के एक कमांडर ने प्रतिबंधों की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे शांति प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह कदम बताता है कि वह
शांति प्रयासों को कितनी अहमियत
देता है। उन्होंने कहा, मैंने कांग्रेस
को बता दिया है कि हक्कानी गुट को
जल्द ही आतंकी संगठन घोषित कर दिया जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि हक्कानी गुट अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंधों के दायरे में आ
जाएगा और उसकी संपत्ति जब्त हो
जाएगी। इसके अलावा अमेरिकी कंपनियां और नागरिक अब इस संगठन के साथ लेन-देन नहीं कर पाएंगे। हक्कानी गुट को एक समय
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए का
समर्थन हासिल था। उस वक्त यह संगठन सोवियत संघ के खिलाफ लड़ रहा था, लेकिन 9/11 के बाद अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया और फिर अफगान तालिबान के सभी गुट अमेरिका विरोधी जिहाद में
शामिल हो गए। अफगानिस्तान में
अमेरिकी सेना को सबसे ज्यादा हक्कानी गुट के लड़ाकों ने ही निशाना बनाया। पाकिस्तान समर्थित यह गुट काबुल में भारतीय
दूतावास और कर्मियों को लगातार निशाना बनाता रहा
है। हक्कानी गुट का प्रभाव पाकिस्तान और दक्षिण अफगानिस्तान के इलाकों में हैं। अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान सरकार पर हक्कानी के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बना रहा है।
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण, पेज 7 , 08-09-2012 आतंकवाद
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