पिछले कई दशकों से दुनिया भर में दहशत फैलाने वाले आतंकी आखिरकार कमजोर होने लगे हैं। इसे सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी का नतीजा कहें या फिर दहशतगर्दी से आम जनता की बेरुखी, पर पांच साल पहले की तुलना में दुनिया भर में अब लगभग आधे आतंकी हमले हो रहे हैं। इनमें भी 80 फीसदी से अधिक आतंकी घटनाएं केवल चार देशों भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक में हुई है। अकेला पाकिस्तान ऐसा मुल्क है, जहां पिछले पांच सालों में आतंकी घटनाएं कम होने के बजाय तेजी से बढ़ी हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के आंकड़ों के अनुसार 2007 में 1559 आतंकी बम धमाकों की तुलना में 2011 में केवल 1055 बम धमाके हुए। वैसे इस बीच 2008 में सबसे अधिक 2030 बम धमाके हुए, पर 2008 के बाद इन बम धमाकों की संख्या तेजी से कम होती गई। 2009 में 1358 और 2010 में 1329 बम धमाके हुए। वर्ष 2011 में इन हमलों की संख्या 1055 रह गईं, लेकिन जहां दुनिया भर में आतंकी हमलों में कमी आई है, वहीं पाकिस्तान में आतंकियों के हौसलेबुलंद हैं। 2007 में पाक में आतंकियों ने केवल 236 बम धमाके किए थे, जो 2011 में 376 हो गए। वैसे आकंड़ों का विश्लेषण बताता है कि भारत में आतंकियों के हौसले पस्त होने लगे हैं। 2007 में आतंकियों के 557 बम धमाकों की तुलना में 2011 में केवल 245 बम धमाके हुए हैं। सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि पिछले एक दशक में आतंकियों की फंडिंग रोकने के लिए किए गए प्रयासों का परिणाम दिखने लगा है। अलकायदा से लेकर सभी आतंकी संगठनों के लिए अब फंड जुटाना आसान नहीं रह गया है। इसके साथ ही विभिन्न देशों की खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल भी पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है। इससे बड़ी संख्या में आतंकी हमलों को रोकने में सफलता मिली है। वैसे कुछ अधिकारियों का मानना है कि आतंकियों के असली मंसूबों के बारे में आम जनता जागरूक होने लगी है। जाहिर है इससे आतंकियों को मिलने वाले समर्थन में बेहद कमी आई है। आइजी जम्मू दिलबाग सिंह ने बताया कि पिछले बाइस सालों से आतंकवादियों से लोहा ले रही जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए साल 2011 सबसे बेहतर रहा। वर्ष की शुरुआत में जम्मू संभाग में 84 आतंकी सक्रिय थे, जबकि अंत में उनकी संख्या सिर्फ 33 रह गई।
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