Friday, September 7, 2012

विश्वासघात की बू



सियाचिन ग्लेशियर में शांति और विकास के प्रति पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल अशफाक कियानी का दिल को छूने वाला आ ान और दोनों देशों की सेनाओं को वहां से हटने का आग्रह, अब उनके पूर्ववर्ती और मार्गदर्शक सैन्य तानाशाह और कारगिल पराजय के रचियता जनरल परवेज मुशर्रफ का सा विश्वासघात लगने लगा है। शांति की बातें करते हुए फूहड़-सी लड़ाई के लिए तैयारी करते रहना पाकिस्तान की खासियत रही है। हिम स्खलन में नॉर्दर्न लाइट इन्फैंटरी के करीब 200 सैनिकों के जिंदा दबने पर वहां के दौरे के के बाद कियानी एक तरफ तो शांति और विकास की बातें कर रहे थे, जबकि दूसरी ओर उनके सैनिक सांबा के अखनूर सेक्टर में सुरंग खोदने में लगे थे, ताकि जम्मू-कश्मीर में भारत की संचार लाइनों तक उसकी पहंुच हो सके। कियानी के सियाचिन दांव में भी विश्वासघात की बू रही थी, क्योंकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के उत्तरी हिस्से की रक्षा की जिम्मेदारी चीन को सौंपने के बाद वह भारत के साथ ऐसा आपसी समझौता चाहते हैं, जिसके तहत पूरा उत्तरी कश्मीर चीनी हाथों में बना रहेगा। यह देखते हुए कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर भी पाकिस्तान आर्मी के तोपखाने की मदद से सीमा-पार आतंकवाद की तिकड़मों का इस्तेमाल किया था, लगता है कि उत्तर कश्मीर में भी वह यही तकनीक अपना रहा है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने अफगानों के खिलाफ आतंकी कार्रवाई की उसे गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। पाकिस्तान को इसमें अफगानिस्तान और इस क्षेत्र में फिर से अपना प्रभुत्व जमाने के लिए अपनी सामरिक पैठ को फिर प्राप्त करने का मौका दिखाई दे रहा है। इसीलिए उसने तालिबान के हक्कानी गुट को संरक्षण दे रखा है और कभी-कभी वह काबुल में अमेरिकी और भारतीय दूतावासों तथा उत्तर-पूर्व अफगानिस्तान मंेंआइएसएएफ के खिलाफ हमलों के लिए उसका इस्तेमाल करता है। पिछले महीने पाकिस्तान और भारत के बीच अखनूर सेक्टर में जो सुरंग मिली है, वह पाकिस्तान की सीमाओ के दोनों ओर नजर आने वाले तरीके से मेल खाती है। सुरंग खोदने का यह काम ठीक वैसा ही है, जैसा तालिबान ने जेल की उस कोठरी तक पहंुचने के लिए बड़ी ही कुशलता से किया था। इसमें तालिबान कमांडरों को रखा गया था। इससे 500 से भी ज्यादा इस्लामी कट्टरपंथियों को कंधार जेल से भागने में मदद मिली थी। तब, एक भारतीय विश्लेषक ने कहा था कि निकट भविष्य में इसी प्रकार की तकनीक का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जा सकता है। उनका विश्लेषण, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और चीन की तकनीकों और सोच में समानता पर आधारित था। उत्तर कोरियाइयों ने दक्षिण कोरियाई प्रतिरक्षा को नाकारा बनाने में अपने सैनिकों की मदद के लिए पानमुंजोम सीमा पर विसैन्यीकृत जोन के ठीक नीचे जमीन के भीतर 100 मीटर गहराई पर सुरंगें बनाई थीं। तोपखानों के साथ 30,000 सैनिक इन सुरंगों को एक घंटे में पार कर सकते थे। परमाणु हथियारों के बारे में जानकारी और परमाणु वारहैड्स की डिलीवरी साधनों की अदला-बदली के मामले में पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और चीन के बीच साठगांठ को देखते हुए कहा जा सकता है कि कंधार में जेल तोड़ने का काम इसी प्रकार की साठगांठ का नतीजा था। यह तो पहले ही से पता था कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान इसी प्रकार की तकनीक का इस्तेमाल करेगा। यह देखते हुए कि भारत के साथ किसी भी तरह का सीधा टकराव उसके लिए मुश्किल होगा, क्योंकि यह इससे पहले उनके मार्गदर्शक जनरल परवेज मुशर्रफ की कारगिल में की गई नाकाम कोशिश की बदनामी का बदला लेने की जनरल अशफाक कियानी की कोशिश है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं) पाक की कथनी और करनी में भेद पर प्रकाश डाल रहे हैं पीएन खेड़ा विश्वासघात की गंध

दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण, पेज 8 , 07-09-2012 आतंकवाद

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