इस्लामाबाद पाकिस्तानी विदेश
मंत्री हिना रब्बानी खार ने भारत से 26/11 के मुंबई आतंकी हमले
पर भावुकता छोड़ने के लिए कहा है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात
से पहले खार का कहना था कि रिश्तों की बेहतरी के लिए जरूरी है कि हम
आगे बढ़ने के तरीकों पर ध्यान दें। जिस तरह पाकिस्तान ने अपने रवैये में लचीलापन
दिखाया है, उसी
तरह भारत को भी अपने रुख में नरमी दिखाने की जरूरत है। इस्लामाबाद
स्थित अपने दफ्तर में चुनिंदा भारतीय पत्रकारों से बातचीत में खार
का सारा जोर इस बात पर रहा कि रिश्तों को भविष्य के लिहाज से देखा जाना चाहिए, अतीत
से नहीं। आतंकवाद के मुद्दे पर दोष मढ़ने से समाधान की राह निकालना
मुश्किल होगा। गहरे बैंगनी रंग के कुर्ते और सिर पर चुन्नी के साथ मीडिया
के सवालों का जवाब दे रहीं युवा विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि आतंकवाद
अतीत का मंत्र हो सकता है, भविष्य
का नहीं। मुंबई आतंकी हमले की जांच से जुड़े सवालों
पर उनका कहना था कि हमें 26/11 के
मुद्दे को भावुकता छोड़कर
देखने की जरूरत है। यह पूछे जाने पर कि आखिर यह कैसे संभव
है कि मुंबई हमले पर भारत भावनाशून्य होकर बात करे, खार
ने तंज के साथ जवाब दिया। बोलीं 1971 (पाकिस्तान के विभाजन
से बांग्लादेश निर्माण की ओऱ इशारा) पाकिस्तान के लिए भी कम भावनात्मक
मुद्दा नहीं है। लेकिन हम इतिहास के कैदी बनकर नहीं रह सकते हैं। 26/11 की
धीमी पड़ताल के सवालों पर खार ने समझौता एक्सप्रेस की जांच से भी तुलना
कर दी। कहा, मैं
दोनों की तुलना नहीं करना चाहती। लेकिन आपने भी देखा
होगा कि बीते दो सालों में पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस का मुद्दा बार-बार
नहीं उठाया। यह समझना चाहिए कि न्यायिक प्रक्रिया समय लेती है। मुंबई
हमले के गुनहगारों को सजा दिलाने के मुद्दे पर उनका कहना था कि हम भी चाहते
हैं कि इसका समाधान निकले। लेकिन भारत को व्यावहारिक होकर आकलन करना चाहिए
कि पाकिस्तान ने कितना किया है और क्या कर सकता है? हाफिज सईद के मुद्दे
पर उन्होंने सुबूतों को नाकाफी करार दिया। विदेश मंत्री बनने के
बाद छठी बार अपने भारतीय समकक्ष से मिलने जा रहीं खार ने
भारत से लचीलेपन की उम्मीदें तो जताई, लेकिन कश्मीर पर
पाकिस्तान के रुख
में नरमी के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यह उसके लिए मुख्य मुद्दा था और
रहेगा। कश्मीर पर पाकिस्तान के मुद्दे से हटने की बात करने से बात बिगड़ेगी।
साथ ही इस बात पर संतोष भी जताया कि बीते डेढ़ साल के दौरान छोटे-छोटे
कदमों से भरोसे की खाई पाटने में मदद मिली है। (पेज-7 भी देखें)
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण, पेज 1 , 08-09-2012 आतंकवाद
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