Saturday, October 15, 2011

आतंकियों की तलाश में पुलिस टीम जम्मू रवाना


अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की पार्किग में विस्फोटक से भरी इंडिका कार लाने वाले संदिग्ध आरोपियों की तलाश में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की एक टीम जम्मू पहुंच गई है। स्पेशल सेल की टीम ने जांच कार्य में जम्मू व कश्मीर पुलिस से सहयोग मांगा है। उधर, अंबाला में मामले की जांच कर रही स्पेशल सेल की एक अन्य टीम खालिस्तान टाइगर फोर्स व बब्बर खालसा इंटरनेशनल नामक आतंकी संगठनों के नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है। बुधवार देर शाम अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की पार्किंग से विस्फोटक भरी एक हरियाणा नंबर की इंडिका कार बरामद की गई थी। इस बीच स्पेशल सेल की एक टीम जम्मू व कश्मीर पहुंचकर लश्करे ए तैयब्बा के उस मॉडयूल की तलाश में जुट गई है, जिन्होंने विस्फोटक से भरी इंडिका कार अंबाला तक भेजी थी। सूत्रों का कहना है कि विस्फोटक जम्मू से भेजी गई थी लेकिन इस शहर के किस स्थान से यह विस्फोटक भेजा गया था, इसकी जानकारी अब तक सुरक्षा एजेंसियों को नहीं हो पाई है। स्पेशल सेल ने जम्मू में लश्करे ए तैयबा के मॉडयूल की तलाश के लिए जम्मू व कश्मीर पुलिस का सहयोग मांगा है। सूत्रों का कहना है कि अंबाला में हरियाणा पुलिस के साथ संयुक्त ऑपरेशन में जुटी स्पेशल सेल को खालिस्तान टाइगर फोर्स व बब्बर खालसा के नेटवर्क के बारे में काफी अहम जानकारी हासिल हुई है। जानकारी के आधार पर दोनों राज्यों की पुलिस ने पंजाब के कुछ स्थानों पर छापेमारी भी की है। बताया जाता है कि खालिस्तान टाइगर फोर्स का प्रमुख जगतार सिंह तारा व बब्बर खालसा इंटरनेशनल का मुखिया बाधवा सिंह इन दिनों पाकिस्तान में छिपे हैं और उन्होंने यह विस्फोटक की यह खेप लश्कर की मदद से अंबाला तक पहुंचवायी थी, हालांकि अभी तक यह ज्ञात नहीं हो पाया है कि विस्फोटक की यह खेप किसे दिया जाना था, फिलहाल पुलिस ने इस बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

Monday, October 3, 2011

दिल्ली हाईकोर्ट विस्फोट आरडीएक्स हुआ इस्तेमाल

दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर 7 सितंबर को हुए विस्फोट में घातक आरडीएक्स के इस्तेमाल की रिपोर्ट देश की एक फोरेंसिक लैब ने दी है। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने कहा, एक एफएसएल ने रिपोर्ट दी है कि दिल्ली च्च्च न्यायालय के बाहर हुए विस्फोट में आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। सिंह ने यहां एक समारोह के दौरान बताया कि मामले में जांच चल रही है। पल-पल की जानकारी नहीं दी जा सकती। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) मामले की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को कई ई-मेल भी मिल चुके हैं जिनमें विस्फोट की जिम्मेदारी ली गई है।च्उच्च न्यायालय के बाहर हुए विस्फोट में इस्तेमाल विस्फोटक की फोरेंसिक जांच दिल्ली, हैदराबाद और गुजरात की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के अलावा एनएसजी की फोरेंसिक लैब ने भी की थी। इस बीच सरकारी सूत्रों ने कहा कि गुजरात की लैब की रपट कुछ कहती है जबकि केंद्रीय फोरेसिंक साइंस लैबोरेटरी (सीएफएसएल) की रपट में कुछ और निष्कर्ष है। लेकिन हम सीएफएसएल के निष्कर्षो को ही मानेंगे। एनएसजी की फोरेंसिक जांच में भी नाइट्रेट आधारित विस्फोटक के इस्तेमाल की बात कही गई है।

दिल्ली को आतंकी हमलों से बचाने को केंद्र व राज्य तलब

 नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आतंकी हमले रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाने की एक याचिका पर बुधवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने दोनों सरकारों से छह हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। दोनों सरकारों को राजधानी में आतंकवादी घटनाओं को रोकने के लिए उपयुक्त प्रबंध करने संबंधी याचिका को संज्ञान में लिया। 22 सितंबर को यह याचिका न्यायमूर्ति आर एस एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष आई थी। जिसे उन्होंने यह कहते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई करने वाली दो सदस्यीय खंडपीठ के पास भेज दिया कि यह मामला जनहित से जुड़ा है। यह याचिका सोसायटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म ने दायर की है। जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार को निर्देश दिए जाएं कि वह ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष प्रबंध करे। जिसके लिए अलग-अलग इलाकों में रेपिड एक्शन फोर्स व नेशनल सिक्योरटी गार्ड को तैनात किया जाए। इतना ही नहीं निश्चित समय में एनएसजी बैटालियन के स्टेशन भी बना दिए जाए। इस तरह की गतिविधियों से निपटने के लिए पुलिस को भी विशेष ट्रेनिंग दी जाए। इतना ही नहीं एक केंद्रित इंटेलिजेंस सिस्टम भी बनाया जाना चाहिए। सात सितंबर को हाईकोर्ट के बाहर हुई घटना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को आपदा प्रबंधन एजेंसियों को उपयुक्त उपकरण,वाहन आदि सुविधा देनी चाहिए ताकि घटना के समय वह ठीक से काम कर पाए। इतना ही नहीं आतंकवादी घटनाओं जैसी विशेष परिस्थितियों से निपटने के लिए एक उपयुक्त आपदा प्रबंधन कमेटी गठित की जानी चाहिए। निचली अदालत,हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के अलावा अलग-अलग जगहों पर सीसीटीवी भी लगाए जाए। देश की राजधानी दिल्ली अब तक सबसे अधिकआतंकियों का निशाना बनी है

अफजल के माफी प्रस्ताव पर कश्मीर विधानसभा में उपद्रव

 श्रीनगर जम्मू कश्मीर विधानसभा बुधवार को राजनीतिक अखाड़ा बन गई। संसद हमले के दोषी मो. अफजल की फांसी माफी के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस और भाजपा विधायकों में जोर आजमाइश हुई। नारेबाजी-हंगामे के बीच कोई मेज पर चढ़ गया तो कोई पंखों और कुर्सियों को लात से गिराता नजर आया। पैंथर्स पार्टी और जम्मू स्टेट मोर्चा ने भी हंगामे में भाग लिया। अलबत्ता, नेशनल कांफ्रेंस व पीडीपी लगभग मौन रही। हंगामे के चलते सजा माफी का प्रस्ताव पेश नहीं हो पाया। बाद में स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेसी सदस्यों ने विस अध्यक्ष मुहम्मद अकबर लोन से पूछा, भाजपा ने रिश्वतखोरी व क्रॉस वोटिंग के आरोप में जिन सात विधायकों को निलंबित किया है। वे यहां क्यों और किसके लिए हैं। स्पीकर के जवाब देने से पहले ही भाजपा,पैंथर्स पार्टी और जम्मू स्टेट मोर्चा के विधायकों ने अफजल की सजा माफी प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए देश के गद्दारों को बाहर करो की नारेबाजी शुरू कर दी। जवाब में कांग्रेसी रिश्वतखोर एमएलए बाहर करो का नारा लगाते हुए सदन के बीच में आ गए। विस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री तारांचद के समझाने पर भी विधायक शांत नहीं हुए। इसी दौरान भाजपा के अशोक खजूरिया और निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद में तकरार होने लगी। हालांकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सदन में ही मौजूद थे, लेकिन उन्होंने विधायकों को शांत करने का कोई प्रयास नहीं किया। हंगामा न थमने पर सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा सदस्यों ने अफजल संबंधी प्रस्ताव रद करने को कहा। फिर हंगामा होने पर कार्यवाही एक घंटे के लिए स्थगित हो गई। बाद में अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए ही स्थगित कर दिया। वहीं, पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती ने सदन में हुए हंगामे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे सुनियोजित ड्रामा बताया। उन्होंने कहा, इस ड्रामे में नेकां डायरेक्टर तो कांग्रेस व भाजपा ने एक्टर की भूमिका निभाई। उमर ने पत्रकारों से कहा कि अफजल को फांसी दिए जाने पर जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में नकारात्मक असर पड़ेगा। आतंकी हिंसा बढ़ेगी क्योंकि अलगाववादियों को मकबूल भट के बाद दूसरा हीरो मिल जाएगा।

भागे आतंकियों की तलाश में जुटी सेना

श्रीनगर कुपवाड़ा जिले के जंगलों में गत चार दिनों से घुसपैठियों और आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ गुरुवार की देर शाम गए समाप्त हो गई। इस मुठभेड़ में पांच आतंकियों के मारे जाने के अलावा दो पुलिसकर्मी, एक कैप्टन और एक सैन्यकर्मी शहीद हुए हैं। उधर, मारे गए आतंकियों के कथित तौर पर बच निकले साथियों की धरपकड़ के लिए सेना के जवानों का तलाशी अभियान जारी है। गौरतलब है कि सोमवार को जिला कुपवाड़ा के करालपोरा कस्बे से करीब दस किलोमीटर दूर अवथकुल जंगल में आतंकियों के छिपे होने की सूचना के आधार पर सेना और पुलिस ने मिलकर तलाशी अभियान चलाया था। पहले दिन इस मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए थे जबकि एक पुलिसकर्मी शेराज अहमद शहीद हुआ था। दो अन्य सुरक्षाकर्मी सोमवार की रात को घायल भी हुए थे। दूसरे दिन मंगलवार को एक आतंकी मारा गया और संगवाली, घगवाल जम्मू का रहने वाला कैप्टन सुशील खजुरिया अपने दो घायल साथियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के क्रम में आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए थे। पंाचवां आतंकी गत बुधवार की शाम को मारा गया। इस दौरान एक और पुलिसकर्मी व सैन्यकर्मी भी शहीद हो गए। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि वीरवार शाम को यह मुठभेड़ समाप्त हो गई है। पुलिस ने पांच आतंकियों के शव को स्थानीय समिति को सौंप दिए हैं। एसपी कुपवाड़ा वीके विर्दी ने बताया कि आतंकियों के खिलाफ अभियान जारी है। अभी भी तीन से चार आतंकी और जिंदा हो सकते हैं। अवथकुल जंगल में छिपा आतंकियों का दल हाल ही में सरहद पार से घुसपैठ कर राज्य में दाखिल हुआ है। ये सभी आतंकी जल्द ही मारे जाएंगे।

आइएएस के खिलाफ सुनवाई पर रोक

 सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात कैडर के आइएएस प्रदीप शर्मा के खिलाफ सुनवाई पर रोक लगा दी है। शर्मा ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर राज्य पुलिस द्वारा अपने खिलाफ दर्ज नए मामले में सीबीआइ जांच की मांग की है। हालांकि, न्यायमूर्ति आफताब आलम और रंजन प्रकाश देसाई की पीठ ने सुनवाई पर रोक लगाने का कोई आदेश नहीं दिया, लेकिन पीठ ने राज्य के वकील हेमंतिका वाही के हलफनामे को रिकॉर्ड किया कि अगले आदेश तक कोई कार्यवाही नहीं होगी। शर्मा ने भुज की एक अदालत में अपने खिलाफ सुनवाई पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। उन्होंने दलील दी थी कि इसे चुनौती देने वाली उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। गुजराज हाईकोर्ट ने शर्मा की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वाही ने शीर्ष अदालत से कार्यवाही पर रोक नहीं लगाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और अदालत को अब आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू करनी है। लेकिन पीठ इस दलील से सहमत नहीं हुई और आदेश देने की प्रक्रिया शुरू कर दी। वकील ने हलफनामा दाखिल करते हुए कहा कि 17 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा शर्मा की सीबीआइ जांच संबंधी याचिका पर सुनवाई की संभावना है। इसके बाद पीठ ने कहा कि अगले आदेश तक शर्मा पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। इसके पहले कोर्ट ने शर्मा की दो याचिकाओं पर मोदी को नोटिस जारी किया था। शर्मा ने अपनी याचिकाओं में आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के इशारे पर फर्जी आपराधिक मामले दर्ज किए गए।

आतंकी अब भी पकड़ से दूर : चिदंबरम

दिल्ली हाईकोर्ट में हुए आतंकी हमले को सुलझाने के करीब पहुंचने का दावा करने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी फिलहाल खाली हाथ है। दाऊद पर मजबूर सरकार : भारत के मोस्ट वांटेड अपराधी दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई में चिदंबरम ने अपनी असमर्थता जताई। दाऊद के बेटे की कराची में पिछले दिनों हुई शादी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने दावा किया कि उनके पास दाऊद के ठिकाने के बारे में ठोस जानकारी है। पर पाकिस्तान कार्रवाई नहीं कर रहा है। आडवाणी की यात्रा को सुरक्षा देने पर हो सकता है विचार : भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की प्रस्तावित यात्रा के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्र सरकार विचार सकती है। चिदंबरम ने कहा यात्रा के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है। अफजल मामले पर टिप्पणी से इनकार : संसद पर आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने को लेकर जम्मू-कश्मीर में जारी राजनीतिक हंगामे पर चिदंबरम ने कि दया याचिका पर राष्ट्रपति का फैसला आने के बाद ही सरकार इस मुद्दे पर विचार करेगी। रिपोर्ट के बाद ही तेलंगाना पर फैसला : अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर केंद्र सरकार को गुलाम नबी आजाद की रिपोर्ट का इंतजार है। चिदंबरम ने कहा कि आजाद शुक्रवार या शनिवार तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकते हैं। कहां से आया यह कंबख्त नोट सूचना के अधिकार के जरिये 2जी पर सामने आए विवादास्पद नोट से सरकार में शीर्ष स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। आरटीआइ के जरिये इस बैकग्राउंड नोट को मांगने और उसे मुहैया कराने की शीर्ष स्तर पर पड़ताल शुरू हो चुकी है। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्र इसके पीछे साउथ ब्लाक के शीर्ष अधिकारियों के हाथ होने की गुंजाइश से भी इनकार नहीं कर रहे। शक है कि पीएमओ में एक नए अधिकारी के ताकतवर होने के बाद से अभी तक राज कर रहे अधिकारियों की लॉबी ने आरटीआइ की ताकत का इस्तेमाल करवा 25 मार्च के इस नोट को सार्वजनिक करवाया है। पी. चिदंबरम पर उंगली उठाने वाले इस नोट के सार्वजनिक होने के बाद बात और आगे तक पहुंचाने की विघ्नसंतोषी मानसिकता को भी सरकार में इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।

कश्मीर में घुसपैठ के पीछे आइएसआइ का हाथ

 श्रीनगर पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने अब सीधे तौर पर आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। यह खुलासा उत्तरी कश्मीर के जिला कुपवाड़ा में तीन दिन पहले पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी निसार अहमद राथर ने पूछताछ के दौरान किया है। निसार की माने तो आतंकी संगठन अब नशेड़ी युवकों को भी बड़े पैमाने पर अपने कैडर में जमा कर रहे हैं। पकड़े गए आतंकी निसार अहमद पुत्र अली रहमान निवासी कराची के पास से न सिर्फ हथियार, अत्याधुनिक संचार उपकरण, जीपीएस और खाद्य सामग्री मिली, बल्कि नशीले पदार्थ भी बरामद हुए हैं। पूछताछ के दौरान उसने कई सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि वह नशेड़ी है और हेरोइन का आदि है। निसार ने बताया कि उसके घर की आर्थिक हालत दयनीय है। वह नशे की लत का शिकार था और उसके भाई ने उसे लश्कर-ए-तायबा के भर्ती कमांडर को कुछ पैसों के बदले सौंप दिया। इसके बाद वह कराची में लश्कर के एक केंद्र में रहा, जहां उसकी तरह कुछ और लड़के भी थे। इसके बाद उन सभी को 12-12 के समूह में बांटकर मनशेरा स्थित आतंकी ट्रेनिंग कैंप भेजा गया। निसार ने बताया कि मनशेरा कैंप में पाकिस्तानी सेना और आइएसआइ के अधिकारी अक्सर उन्हें गुरिल्ला जंग की ट्रेनिंग देने आते थे। इस कैंप का कमांडर अब्दुल्ला शाहीन था। उसने बताया कि मनशेरा में ट्रेनिंग के बाद सभी लड़कों को जामगड़ के कैंप में आगे की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। इसके बाद सभी को केल स्थित सेना के गैरिजन कैंप में लाया गया, जहां पाकिस्तानी फौजियों की तरह सभी को ट्रेनिंग दी गई। आतंकी निसार ने बताया कि केल कैंप में ट्रेनिंग के बाद हम सात लोगों का एक दल बना, उसका लीडर अबु तल्हा को बनाया गया। हमें जिस लांचिंग पैड पर लाया गया, वहां भी पाकिस्तानी सेना के अफसर थे। गत मंगलवार की रात को उसे एलओसी पार कर कश्मीर में भेजा गया, लेकिन बार्डर पर ही उसकी मुठभेड़ भारतीय जवानों के साथ हो गई और वह पकड़ा गया। गौरतलब है कि 27/28 सितंबर की मध्यरात्रि को एलओसी के साथ सटे मच्छल सेक्टर में आतंकियों ने घुसपैठ का प्रयास किया था। लेकिन वहां तैनात जैकलाई के जवानों ने इस प्रयास को नाकाम कर दिया। सेना का यह अभियान अभी भी जारी है।

कुरैशी को मारने की कोशिश आतंकी समूहों में निराशा का संकेत : लोन

 विकिलीक्स के ताजा खुलासे के मुताबिक हुर्रियत के वरिष्ठ नेता बिलाल लोन का मानना है कि पार्टी के उदारवादी नेता मौलाना फजल हक कुरैशी की हत्या का प्रयास जम्मू-कश्मीर की स्थिति में हो रहे सुधार के कारण कट्टरपंथी समूहों में निराशा का संकेत है। हाल ही में वेबसाइट की ओर से जारी इस दस्तावेज को भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत टिमोथी रोमर ने गोपनीय श्रेणी में रखा है। इसके मुताबिक लोन ने अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों से कहा कि इस घटना से उन्हें डर नहीं लगता, लेकिन ऐसी घटनाओं ने उदारवादी धड़े में असुरक्षा की भावना पैदा की है। दस्तावेज के मुताबिक, हुर्रियत और केंद्र के बीच वार्ता का हिस्सा रहे लोन बातचीत को तर्कपूर्ण अंजाम तक पहुंचाने की ख्वाहिश जाहिर करते हैं। हालांकि, वह इसमें आ रही रुकावटों के सामने घुटने टेकते हुए कहते हैं कि कट्टपंथियों और इस्लामाबाद को भी बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए। लोन के विचार में कुरैशी पर हमला यह दिखाता है कि सुरक्षा स्थिति में हो रहे सुधार और बातचीत आगे बढ़ने से कट्टरपंथी किस कदर हताश हो चुके हैं। आतंकवादियों ने चार दिसंबर 2009 को श्रीनगर में कुरैशी पर गोलियां चलाई थीं। इस घटना को केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रहे उदारवादी धड़े के लिए चेतावनी के रूप में देखा गया था। दस्तावेज में हुर्रियत कांफ्रेंस प्रमुख मीरवाइज उमर फारूख और दूतावास अधिकारियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत का ब्योरा भी है। इस दौरान मीरवाइज काफी निराश दिखे। उन्होंने कुरैशी पर हुए हमले की तुलना अपने पिता और अन्य उदारवादी नेताओं की हत्याओं से की। विकिलीक्स की ओर से जारी एक अन्य केबल में कहा गया है कि हुर्रियत के उदारवादी धड़े के नेताओं की जान को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से खतरा है।

लश्कर और जैश के बीच सुलह कराने में जुटे आतंकी आका

नई दिल्ली आतंकवाद पर अमेरिका से झाड़ खा रहा पाकिस्तान कश्मीर में घुसपैठ बढ़ाने की हर कोशिश कर रहा है। एक पखवाड़े में घुसपैठ की कोशिशों में हुए इजाफे और मुठभेड़ में बढ़ोतरी के साथ ही सरहद पार बैठे आतंकी आका घाटी में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बीच सुलह कर साझा अभियानों पर जोर दे रहे हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकियों के बीच बातचीत के पकड़े गए हालिया संदेशों में सामने आया है कि सरहद पार से घाटी के आतंकी गुटों में लश्कर और जैश के बीच एकजुटता की कोशिश हो रही है। सेना और भारतीय खुफिया एजेंसियों के हाथ लगे इन संदेशों में बेसाख्ता यह कोशिश की जा रही है कि लश्कर के स्थानीय कमांडर सीमा पास से पहुंच रहे जैश के आतंकियों को अपने अभियानों का हिस्सा बनने दें। साथ ही घुसपैठ में इजाफे और सक्रियता के लिए भी नसीहतें और निर्देश सीमापार से दिए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, आइएसआइ ने घुसपैठ सुनिश्चित करने के लिए पाक सेना और आतंकी गुटों के साथ मिलकर एक साझा समन्वय समूह (ज्वाइंट को-आर्डिनेशन ग्रुप) भी बनाया है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के मच्छल सेक्टर में पिछले सप्ताह सेना के हत्थे चढ़े लश्कर-ए-तैयबा आतंकी नसीर अहमद से पूछताछ में हासिल सूचनाएं भी बताती हैं कि आइएसआइ एक बार फिर घुसपैठ का ग्राफ बढ़ाने को बेताब है। कोशिश सर्दियों से पहले घाटी में आतंकियों की नई खेप पहुंचाने की है। रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि केवल अगस्त में ही नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के 80 प्रयास हुए। इनमें 15 आतंकी मुठभेड़ में मारे गए और चार जिंदा पकड़ लिए गए। पकड़े गए सभी आतंकियों ने भारतीय सुरक्षा बलों को अपने प्रशिक्षण से लेकर घुसपैठ के प्रयासों तक में आइएसआइ की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

Sunday, October 2, 2011

आतंकवाद से निपटने में नाकाम साबित हो रहा पाक

पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। उसके आतंकवाद निरोधी कदमों का कोई परिणाम नहीं निकला है। यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान पर कांग्रेस को भेजी गई रिपोर्ट में कही है। उन्होंने कहा, वर्ष 2010 में आई बाढ़ के बाद चार महीने की शांति यह दर्शाती है कि आतंकी किस प्रकार उन इलाकों में लौटने में सफल रहे हैं, जहां पाकिस्तानी सेना ने उनका सफाया कर दिया था। आतंकवाद निरोधक अभियानों में पाकिस्तान के प्रयास नामक रिपोर्ट में इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हुई प्रगति का ब्योरा है। इसके अनुसार, सीमा पार समन्वय और सहयोग में हुई प्रगति के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं। संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्रों (फाटा) में पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई जारी है, लेकिन फाटा सीमा पर हमले जारी हैं जिसके बढ़ने के आसार हैं। अफगानिस्तान पाकिस्तान सीमा पर आतंकी गतिविधियां दोनों देशों में स्थिरता के प्रयासों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी सेना ने उत्तरी वजीरिस्तान, तिराह घाटी और खैबर में आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए एक अप्रैल से 30 जून के बीच दो नई आतंकवाद निरोधी काउंटर इंसर्जेसी (कॉइन) कार्रवाई की शुरुआत की, लेकिन इससे खास अंतर नहीं पड़ा। ओसामा की बीवी छुड़ाने की साजिश नाकाम लंदन : पाकिस्तानी पुलिस की हिरासत से पूर्व अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की तीसरी पत्नी को छुड़ाने की आतंकी संगठन तालिबान की कोशिशें नाकाम साबित हुई। ब्रिटिश अखबार द सन की रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान सरगना मुल्ला उमर ने करीब 500 आतंकियों को पाकिस्तान के कड़ी सुरक्षा वाले ठिकाने पर हमला करने को कहा था, जहां ओसामा की तीसरी पत्‍‌नी समेत अन्य दो बीवियों और पांच बच्चों को पूछताछ के लिए रखा गया है। इस सुरक्षित ठिकाने की सूचना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के किसी मुखबिर ने तालिबान को दी थी। पुलिस ने ओसामा की बीवियों और बच्चों को पहले ही उस जगह से हटा दिया गया था। आइएसआइ के सूत्रों ने बताया,पिछले कुछ सप्ताह से हम कबाइली इलाके के फोन कॉल की निगरानी कर रहे थे। इस हमले की खबर हमें पहले ही मिल गई थी। अब ओसामा के परिवार की सुरक्षा पहले से भी ज्यादा कड़ी कर दी गई है। ओसामा की बीवियों और बच्चों को छुड़ाने की कोशिशों को देखते हुए उनके ठिकाने तीन बार बदले जा चुके हैं। पाकिस्तान के छावनी शहर एबटाबाद में गत दो मई को अमेरिकी कार्रवाई में ओसामा मारा गया था। ओसामा को बचाने की कोशिश में यमन मूल की 29 वर्षीया अमल के पैर में गोली लग गई थी। उसे ओसामा से एक दस साल की बेटी भी है। पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का आरोप है कि वो जांच में सहयोग नहीं कर रही। उसने अधिकारियों के सामने अपनी शेखी बघारते हुए कहा कि उसे बंदूक और राकेट लांचर चलाना आता है। उसने कहा, मैं बच्चों को मुजाहिद्दीन बनाना चाहती हूं।

लिक्विड बम बनाने वाला भी औलाकी के साथ मारा गया

 यमन में पिछले दिनों हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में अलकायदा के उस आतंकवादी के मारे जाने की संभावना जताई है, जिसने लिक्विड बम के जरिए अमेरिकी विमान को उड़ाने की साजिश रची थी। अल कायदा आतंकवादी इब्राहिम हसन अल असिरी के मारे जाने की खबर सच निकली तो अमेरिकी ड्रोन हमले की यह एक और बड़ी कामयाबी होगी। इस हमले में अमेरिकी मूल का खूंखार आतंकी अनवर अल औलाकी भी मारा गया था। अमेरिका के दो अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस हमले में अल-असिरी भी मारा गया है। 29 साल के इस आतंकवादी के मारे जाने की अब तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एक अन्य खबर के अनुसार अमेरिका ने औलाकी की मौत के बाद दुनियाभर में हाई अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी एजेंसियों को आशंका है कि औलाकी की मौत का बदला लेने के लिए आतंकी हमला कर सकते हैं