देश में बढ़ रही नक्सल समस्या के लिए कुछ हद तक पुलिस-प्रशासन भी जिम्मेदार है। इनकी गलतियों के कारण ही आज छत्तीसगढ़ के गरीब जनजातीय लोग पूछ रहे हैं कि उन्हें नक्सली क्यों नहीं बन जाना चाहिए और वे हाथों में हथियार क्यों न उठा लें। हाल ही में हुई एक घटना में दो निर्दोष लोगों को नक्सली बताकर पुलिस द्वारा कथित तौर पर उनकी हत्या किए जाने के बाद उन्होंने ये सवाल उठाए हैं। बस्तर जिले के कोलंग गांव के निवासी इस सप्ताह की शुरुआत में पुलिस द्वारा अपने साथी ग्रामीणों के मारे जाने से व्यथित हैं। उनका कहना है कि मारे गए दोनों ग्रामीण एक नजदीकी वन क्षेत्र से राशन इकट्ठा करने के लिए गए थे। 22 वर्षीय वोहरू ने कहा कि नक्सली बताकर क्रूरता से मार दिए जाने से नक्सली बनकर उत्पीड़न के खिलाफ लड़ना बेहतर है। मैं नहीं जानता कि पुलिस हमें योजनाबद्ध तरीके से क्यों मार रही है। बस्तर इलाके में 10 लाख से ज्यादा जनजातीय लोग रहते हैं और वे पिछले तीन दशकों से नक्सलियों व सुरक्षा बलों के बीच होने वाले संघर्ष में शिकार बनते रहे हैं। जगदलपुर के दूरस्थ कोलंग क्षेत्र में 11-12 दिसंबर की दरम्यानी रात को दो साथी ग्रामीणों के एक मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से यहां के कई स्त्री-पुरुष विलाप कर रहे हैं। शोक में डूबे हुए हैं और पुलिस की कथित प्रताड़ना के खिलाफ अपनी नाराजगी जता रहे हैं। कोलंग गांव के सरपंच पांडुराम नाग ने बताया कि हमारे दो आदमी महरू और श्याम शंकर कई अन्य लोगों के साथ नजदीक के नेतनार गांव से हम सभी के लिए राशन लाने के लिए गए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें सड़क किनारे के वन क्षेत्र में मार डाला। उन्होंने कहा, जब मंगलवार को पुलिस गांव में आई और उसने दो नक्सलियों के मारे जाने और कई अन्य के आसपास के इलाकों में छुपे होने का हवाला देते हुए हमें सचेत रहने के लिए कहा तब हमें इन हत्याओं के बारे में पता चला। मुठभेड़ में एक अन्य ग्रामीण रेमो के पैर में गोली लगी थी, उसका जगदलपुर में इलाज चल रहा है। राज्य सरकार इस घटना पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन बस्तर के जिला पुलिस प्रमुख ने शुरुआती हिचकिचाहट के बाद निर्दोष लोगों के मारे जाने की बात स्वीकार कर ली है। बस्तर के पुलिस अधीक्षक पी. सुंदरराज ने बताया कि विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और जिला बल (डीएफ) के लोगों ने दावा किया था कि सड़क किनारे के वन क्षेत्र में मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए हैं लेकिन शुरुआती जांच बताती है कि वे गरीब ग्रामीण थे और मुझे लगता है कि वे दोनों ओर से हुई गोलीबारी में मारे गए।
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