Wednesday, December 22, 2010

हिमाचल में आतंक की पदचाप

प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और पवित्रता का पर्याय माना जाने वाला हिमाचल प्रदेश भी अब दहशतगर्दो के खौफ के साये में आ गया है। हाल ही में वहां हिजबुल मुजाहिदीन जैसे खतरनाक संगठन के दो आतंकवादी पकड़े गए। ये आतंकी वहां एक ठेकेदार के पास मजदूर की तरह रह रहे थे। आशंका यह भी जताई जा रही है कि ये दोनों उत्तराखंड में गिरफ्तार आतंकियों के फरार साथी हैं। हिमाचल प्रदेश की पुलिस ने इन आतंकियों को गिरफ्तार करने में जो सतर्कता और तत्परता दिखाई है, उसके लिए निश्चित रूप से उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए, लेकिन यह बात भी साथ ही समझी जानी चाहिए कि यह धमक दूसरे प्रांतों में देखी जा रही आतंक की धमक की तरह सामान्य बात नहीं है। दुर्गम रास्तों और खोह-कंदराओं से भरे हिमाचल प्रदेश तक आतंकवादियों की पहुंच से यह जाहिर होता है कि उनकी नजर देश के चप्पे-चप्पे पर है। अगर यहां आतंकवादियों ने कहीं अपना ठिकाना बनाना शुरू कर दिया तो यह पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए बहुत बड़ा सिरदर्द साबित होगा। इसलिए इस घटना को बिलकुल हल्के ढंग से नहीं लिया जाना चाहिए। सरकार को इस पर तुरंत गंभीर होना चाहिए और तत्काल एक पुख्ता रणनीति तैयार करनी चाहिए। ध्यान रहे, हाल ही में वाराणसी में गंगा तट पर विस्फोट कर आतंकवादियों ने वहां अपनी पहुंच होने की खबर दी है। यह बात भी कोई मामूली नहीं है। बनारस सिर्फ भारत की सांस्कृतिक राजधानी ही नहीं, सांप्रदायिक सौहा‌र्द्र की जीवंत मिसाल भी है। इतिहास की बात छोड़ दें, तो सन् 2006 और अभी हाल में हुए विस्फोटों के बाद भी बनारस ने सहिष्णुता और सौहा‌र्द्र का जैसा उदाहरण पेश किया, वह मामूली बात नहीं है। आखिर वहां विस्फोट कर और निर्दोष लोगों की जानें लेकर दहशतगर्द क्या जताना चाहते हैं? बात केवल बनारस की ही नहीं है, उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी पहले वे अपनी पहुंच की सूचना दे चुके हैं। वहां अपनी धमक जता कर वे आगे क्या जताना चाहते हैं? उत्तराखंड में भी आतंकवादी पकड़े जा चुके हैं। जाहिर है, वे वहां भी कोई अच्छे काम करने नहीं, दहशत फैलाने के लिए आधार बनाने ही गए होंगे। अब उनकी धमक हिमाचल तक पहुंच गई। हिमाचल में आतंकवादियों के पकड़े जाने का सीधा मतलब यही है कि वे वहां अपनी पैठ के इंतजाम बनाने और इस शांतिपूर्ण प्रदेश को भी आतंक की चपेट में लेने के इरादे से ही गए थे। हिमाचल के दो पड़ोसी प्रदेश पंजाब और जम्मू-कश्मीर पहले से ही दहशतगर्दो के खौफ में हैं। यह अलग बात है कि पंजाब से आतंक का नामो-निशान तक पूरी तरह मिटाया जा चुका है, पर आईएसआई की नजर अभी भी वहां से हटी नहीं है। यही वजह है कि जब-तब वे वहां आतंक की पैठ फिर से कायम करने के लिए अपने पुराने गुर्गो को इक्का-दुक्का भेजते रहते हैं। पिछले कुछ सालों में ऐसे कई आतंकवादियों के अलावा पाकिस्तानी जासूस भी पंजाब में पकड़े जा चुके हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद वे पंजाब में दोबारा अपनी पैठ बना नहीं पा रहे हैं। दूसरी तरफ, कश्मीर में भी उनकी स्थिति दिन--दिन दयनीय होती जा रही है। आम जनता पर उनका आतंक जरूर कायम है, लेकिन उनके प्रति किसी की कोई सहानुभूति नहीं है। आईएसआई के टुकड़ों पर पलने वाले कुछ लोग जरूर उनके इशारों पर नाच रहे हैं और वही उनके नापाक मंसूबों को कामयाब बनाने की कोशिशों में लगे हुए हैं, लेकिन उनकी कोशिशें गीदड़भभकी से अधिक कुछ साबित नहीं हो पा रही हैं। जाहिर है, इससे वे बौखलाए हुए हैं। ऐसा लगता है कि इसी बौखलाहट के चलते वे अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। कश्मीर के अलावा दूसरे प्रदेशों में जो वे पैर पसारने और जब-तब विस्फोटों के जरिये वहां अपने होने की सूचना दे रहे हैं, वह इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा है। शायद वे पुलिस और सुरक्षाबलों का ध्यान वहां से हटाना चाहते हैं। उनकी मंशा क्या है, यह जानना बहुत जरूरी है। इसके लिए हमें अपने खुफिया तंत्र को तो बहुत मजबूत और सक्ति्रय बनाना ही होगा, साथ ही सुरक्षातंत्र को भी अधिक मजबूत करने की जरूरत है। देश के हर हिस्से पर पूरी निगरानी रखने और आतंकवादियों के संबंध में किसी प्रकार की कोई सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई करने में जुट जाना चाहिए। इसके लिए देश के सभी प्रदेशों की पुलिस के बीच आपसी संवाद की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। इधर केंद्र सरकार ने भगोड़े आतंकियों को पकड़ने के लिए एक विशेष दल का गठन किया है। उन्होंने सभी प्रदेशों और केंद्र शासित प्रदेशों को फरार आतंकियों की सूची भी भेज दी है, लेकिन दहशतगर्दो को पकड़ने के लिए सिर्फ इतना ही पर्याप्त नहीं होगा। केंद्र की यह योजना सफल हो सके, इसके लिए जरूरी है कि हम अपने प्रशासनिक तंत्र के अन्य हिस्सों में भी नियम-कानून के मामले में सख्ती लाएं और उन्हें मजबूत बनाएं। ध्यान रहे कि हिमाचल प्रदेश में पकड़े गए आतंकवादियों की तलाश जम्मू-कश्मीर पुलिस को भी थी। क्योंकि ये जम्मू-कश्मीर में कई वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र ने भी इस मामले में जैसी तत्परता दिखाई है, वह सीख लिए जाने लायक है। वहां भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड और बिजली बोर्ड ने भी तुरंत अपनी सभी जल विद्युत परियोजनाओं पर हाई एलर्ट जारी कर दिया है। यह बात सर्वविदित है कि देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय दहशतगर्द कहीं न कहीं से फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या पासपोर्ट आदि हासिल कर लेते हैं। ये पहचान पत्र हमेशा फर्जी ही नहीं होते। कई बार अन्य फर्जी कागजात का इस्तेमाल करके ये असली पहचान पत्र भी विभागीय लोगों की मिलीभगत से प्राप्त कर लिए जाते हैं। इसके लिए कई विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना होगा। सच तो यह है कि जब तक हम भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगाते और सभी प्रदेशों की पुलिस व प्रशासन के बीच आपसी सहयोग की प्रक्ति्रया को पूरी तरह प्रभावी नहीं बनाते हैं, तब तक इससे पार पाना बहुत मुश्किल है। इस दिशा में यूनिक आइडी की योजना बहुत कारगर साबित हो सकती है। लंबे समय से सुना जा रहा है कि इस पर बड़ी तेजी से काम चल रहा है, लेकिन अभी तक यह कहीं मूर्त रूप नहीं ले पाई है। यह मूर्त रूप ले सके, इसके लिए प्रक्ति्रया को तेज करने की जरूरत है। साथ ही, सभी तरह के आतंकवादियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाना भी अनिवार्य हो गया है। यह बात अब साबित हो चुकी है कि आतंकवादी चाहे किसी भी तरह के क्यों न हों, उन्हें शांति और सुलह की भाषा समझ में ही नहीं आती है। वे नरमी से कभी मानने वाले नहीं हैं। उन्हें सिर्फ बल प्रयोग से ही काबू किया जा सकता है। इसलिए उन पर बल प्रयोग करने में कोई संकोच नहीं किया जाना चाहिए। (लेखक दैनिक जागरण हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश के स्थानीय सम्पादक है)

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