मुंबई हमले की साजिश में पाकिस्तान सरकार, उसकी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई का सीधा हाथ था। भारत यह बात शुरू से कह रहा था लेकिन दुनिया की नजर में अब तक यह आरोप भर था। अब इस बात की पुष्टि वही कर रहे हैं जिन्होंने इस साजिश को अमलीजामा पहनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। अमेरिका की जेल में बंद डेविड हेडली और तसव्वुर राणा ने अदालत के सामने बयान दिया है कि उन्होंने जो कुछ किया वह पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के कहने पर किया और आतंकी गिरोह लश्करे तैयबा से उनका कुछ लेना-देना नहीं है। यह बयान ऐसे मौके पर आया है जब अमेरिकी अदालत में इनके मामले की सुनवाई शुरू होनी है। हेडली की यह स्वीकारोक्ति इसलिए नहीं है कि उसका दिल बदल गया है या उसे अपने किए पर पछतावा हो रहा हो। उसने यह कलाबाजी अपने बचाव में लगाई है। वह बताना चाह रहा है कि मुंबई हमले से जुड़ी तमाम कारगुजारी उसने पाकिस्तान सरकार के कहने पर की थी इसलिए सजा का हकदार नहीं है। अब अमेरिकी अदालत इस रहस्योद्घाटन पर क्या रुख अपनाती है यह तो देखने की बात होगी लेकिन पाकिस्तान का आतंकी चेहरा एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब तो हो ही गया है। पाकिस्तान अब तक दुनिया को यही समझा रहा था कि भारत के खिलाफ आतंकी हमलों के पीछे लश्करे तैयबा जैसे आतंकी गिरोह हैं जो कश्मीर को लेकर खफा हैं और सरकार कभी भी ऐसी साजिशों का हिस्सा नहीं रहती है। हेडली और राणा के बयानों के बाद पाकिस्तान कैसे मुंह छिपाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। ये बयान ऐसे वक्त पर आए जिस समय आईएसआई का चीफ शुजा पाशा नई चिरौरियां करने अमेरिका गया हुआ था। बयान के बाहर आते ही वह अमेरिका दौरा बीच में ही छोड़ कर पाकिस्तान भाग गया। लेकिन सिर्फ हेडली या राणा ही नहीं हैं जो पाकिस्तान के पापों का घड़ा फोड़ रहे हों। दक्षिण अमेरिकी देश चिली में भी रऊफ नाम का पाकिस्तानी पकड़ा गया है जिस पर भारतीय विमान का अपहरण कर कंधार ले जाने और फिरौती के रूप में कुख्यात आतंकी मौलाना मसूद अजहर को छुड़वाने का आरोप है। इस कांड में भी आईएसआई की मुख्य भूमिका रही है और इसके ढ़ेर सारे सबूत भी मिले हैं। साजिश रचने से लेकर अपहर्ताओं को तमाम मदद उपलब्ध कराने में इस खुफिया एजेंसी की भूमिका की पुष्टि खुद अफगानिस्तान के तालिबानी विदेश मंत्री मुल्ला वकील अहमद मुत्तवाकिल ने की थी। अफगानिस्तान से तालिबानी सत्ता के सफाए के बाद मुत्तवाकिल वहां नई सरकार की हिरासत में था, जब भारत से सीबीआई टीम उससे पूछताछ करने गई थी। अब अगर चिली में पकड़ा गया रऊफ विमान अपहर्ताओं में से निकला तो पाकिस्तान के मुंह पर एक बार फिर धूल पड़नी तय है। अब समझा जा सकता है कि मुंबई हमले के आरोप में पाकिस्तान में पकड़े गए लोगों पर क्यों कार्रवाई नहीं हो रही है और उन लोगों की आवाजों का नमूना बार-बार मांगने के बावजूद क्यों भारत को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है? अगर गर्दन फंसी तो वे लोग भी हेडली और राणा की तरह मुंह खोलना शुरू कर देंगे। शायद यही कारण है कि पाकिस्तान ने अब आतंकी गिरोहों के अलावा चीन का नया कार्ड भारत के विरोध में खेलना शुरू कर दिया है। चीन को वह अपने कब्जे वाला कश्मीर प्लेट में सजा कर भेंट कर रहा है। पाकिस्तान को लग रहा होगा कि अधिकृत कश्मीर में चीनी सेना को देखते ही भारत के होश उड़ जाएंगे। लेकिन अभी तो खुद उसे अपने होश काबू में रखने की जरूरत है।
Thursday, April 14, 2011
फिर पाक के मुंह पर धूल
मुंबई हमले की साजिश में पाकिस्तान सरकार, उसकी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई का सीधा हाथ था। भारत यह बात शुरू से कह रहा था लेकिन दुनिया की नजर में अब तक यह आरोप भर था। अब इस बात की पुष्टि वही कर रहे हैं जिन्होंने इस साजिश को अमलीजामा पहनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। अमेरिका की जेल में बंद डेविड हेडली और तसव्वुर राणा ने अदालत के सामने बयान दिया है कि उन्होंने जो कुछ किया वह पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के कहने पर किया और आतंकी गिरोह लश्करे तैयबा से उनका कुछ लेना-देना नहीं है। यह बयान ऐसे मौके पर आया है जब अमेरिकी अदालत में इनके मामले की सुनवाई शुरू होनी है। हेडली की यह स्वीकारोक्ति इसलिए नहीं है कि उसका दिल बदल गया है या उसे अपने किए पर पछतावा हो रहा हो। उसने यह कलाबाजी अपने बचाव में लगाई है। वह बताना चाह रहा है कि मुंबई हमले से जुड़ी तमाम कारगुजारी उसने पाकिस्तान सरकार के कहने पर की थी इसलिए सजा का हकदार नहीं है। अब अमेरिकी अदालत इस रहस्योद्घाटन पर क्या रुख अपनाती है यह तो देखने की बात होगी लेकिन पाकिस्तान का आतंकी चेहरा एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब तो हो ही गया है। पाकिस्तान अब तक दुनिया को यही समझा रहा था कि भारत के खिलाफ आतंकी हमलों के पीछे लश्करे तैयबा जैसे आतंकी गिरोह हैं जो कश्मीर को लेकर खफा हैं और सरकार कभी भी ऐसी साजिशों का हिस्सा नहीं रहती है। हेडली और राणा के बयानों के बाद पाकिस्तान कैसे मुंह छिपाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। ये बयान ऐसे वक्त पर आए जिस समय आईएसआई का चीफ शुजा पाशा नई चिरौरियां करने अमेरिका गया हुआ था। बयान के बाहर आते ही वह अमेरिका दौरा बीच में ही छोड़ कर पाकिस्तान भाग गया। लेकिन सिर्फ हेडली या राणा ही नहीं हैं जो पाकिस्तान के पापों का घड़ा फोड़ रहे हों। दक्षिण अमेरिकी देश चिली में भी रऊफ नाम का पाकिस्तानी पकड़ा गया है जिस पर भारतीय विमान का अपहरण कर कंधार ले जाने और फिरौती के रूप में कुख्यात आतंकी मौलाना मसूद अजहर को छुड़वाने का आरोप है। इस कांड में भी आईएसआई की मुख्य भूमिका रही है और इसके ढ़ेर सारे सबूत भी मिले हैं। साजिश रचने से लेकर अपहर्ताओं को तमाम मदद उपलब्ध कराने में इस खुफिया एजेंसी की भूमिका की पुष्टि खुद अफगानिस्तान के तालिबानी विदेश मंत्री मुल्ला वकील अहमद मुत्तवाकिल ने की थी। अफगानिस्तान से तालिबानी सत्ता के सफाए के बाद मुत्तवाकिल वहां नई सरकार की हिरासत में था, जब भारत से सीबीआई टीम उससे पूछताछ करने गई थी। अब अगर चिली में पकड़ा गया रऊफ विमान अपहर्ताओं में से निकला तो पाकिस्तान के मुंह पर एक बार फिर धूल पड़नी तय है। अब समझा जा सकता है कि मुंबई हमले के आरोप में पाकिस्तान में पकड़े गए लोगों पर क्यों कार्रवाई नहीं हो रही है और उन लोगों की आवाजों का नमूना बार-बार मांगने के बावजूद क्यों भारत को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है? अगर गर्दन फंसी तो वे लोग भी हेडली और राणा की तरह मुंह खोलना शुरू कर देंगे। शायद यही कारण है कि पाकिस्तान ने अब आतंकी गिरोहों के अलावा चीन का नया कार्ड भारत के विरोध में खेलना शुरू कर दिया है। चीन को वह अपने कब्जे वाला कश्मीर प्लेट में सजा कर भेंट कर रहा है। पाकिस्तान को लग रहा होगा कि अधिकृत कश्मीर में चीनी सेना को देखते ही भारत के होश उड़ जाएंगे। लेकिन अभी तो खुद उसे अपने होश काबू में रखने की जरूरत है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment