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जागरण संवाददाता, आगरा
दिल्ली में स्पेशल सेल के हत्थे चढ़ा मणिपुर के प्रतिबंधित संगठन कांग्लीपाक
कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) का
कमांडर इन चीफ आगरा में लोडिंग रिक्शा चलाता था। करीब छह माह से वह शहर के बाहरी
इलाके की एक बस्ती में झोपड़ी में रह रहा था। यहीं से नेटवर्क संचालित कर रहा था।
जैसे ही खुफिया तंत्र को उसकी मौजूदगी की भनक लगी,
वह चकमा देकर फरार हो गया।
प्रतिबंधित संगठन के कमांडर इन चीफ निग्थोजम रोमेन सिंह उर्फ आरके उर्फ रॉकी की
लंबे समय से तलाश चल रही थी। सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए पहले वह नेपाल भागा, उसके बाद गोवा, फिर आगरा में शरण ली। खुफिया सूत्रों के
मुताबिक वह यहां एत्माद्दौला थाना क्षेत्र की गढ़ी चांदनी में अपना ठिकाना बनाया।
किराए का घर लेने पर उसकी एक्टिविटी लोगों को पता लगती और शक होता, इसलिए उसने खाली जगह में झोपड़ी डाली। उसमें
खाने के सामान के साथ एक लोडिंग रिक्शा रखता था। इससे वह नुनिहाई स्थित एक
फैक्ट्री में सामान को लाने- ले जाने का काम करता था। शातिराना स्वभाव के चलते उसने स्थानीय लोगों को
अपनी हरकतों की भनक तक न लगने दी। पिछले दिनों संगठन के सदस्यों ने मणिपुर में दो
सरकारी अधिकारियों का अपहरण कर लिया, उनकी रिहाई के बदले दो करोड़ की फिरौती मांगी
गई। उस समय सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन आगरा मिली थी। इसके बाद खुफिया तंत्र
उसके पीछे लगा, रॉकी
को भी अपने घेरे जाने का अंदेशा हुआ और वह फरार हो गया। दिल्ली में उसके कब्जे से
पांच मोबाइल फोन, 16 सिम
कार्ड, दो
पेन ड्राइव, लैपटॉप
और प्रतिबंधित संगठन की सीडी मिली हैं। अब खुफिया तंत्र आगरा में रहने के दौरान
उसकी हरकतों के बारे में जानकारी खोजने में जुटा है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक
रॉकी का परिवार आगरा से 55 किलोमीटर
दूर राजस्थान के भरतपुर में कई महीने तक रहा। रॉकी आगरा से उनसे मिलने जाता रहा।
बाद में उसका परिवार वहां से चला गया।
Dainik Jagran National Edition 4-11-2012 vkradokn Page -5
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