Wednesday, November 21, 2012

केंद्र कश्मीर में लंबे समय तक सेना नहीं रखना चाहता





शिंदे ने कहा, विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून हटाने के बारे में फैसला कुछ समय बाद
नई दिल्ली (एजेंसी)। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि केंद्र ‘लंबे समय तक’ कश्मीर में सेना नहीं रखना चाहता। लेकिन विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) हटाने के बारे में कोई फैसला कुछ समय बाद ही किया जाएगा। वह हुर्रियत कांफ्रेंस सहित राज्य के विभिन्न अलगाववादी नेताओं से भी मिलना चाहते हैं ताकि ‘यह समझा जा सके कि वे वास्तव में क्या चाहते हैं।’ शिंदे ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि सेना को लंबे समय तक रखा जाए। निश्चित रूप से सुरक्षा में कमी की जानी चाहिए लेकिन यह उचित समय नहीं है। हमें अब भी कुछ समय तक नजर रखनी होगी।’जुलाई में गृह मंत्रालय का जिम्मा संभालने के बाद शिंदे पिछले महीने जम्मू-कश्मीर गए थे। उनसे सुरक्षा बलों की गतिविधियों में कमी किए जाने के संबंध में सवाल किए गए थे। उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि श्रीनगर और जम्मू शहर के बाहरी हिस्से में हुए हालिया हमले सुरक्षा बलों की शक्ति में कमी किए जाने में बाधा साबित हो रहे हैं। सुरक्षा बलों में जल्दी कटौती किए जाने के रास्ते में आने वाली संभावित बाधाओं का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि हमारे पास आज भी कुछ सूचनाएं हैं। बार और होटल पर हालिया हमले .. ये सब छिटपुट घटनाएं हैं लेकिन फिर भी हमें काफी सावधान रहना होगा। यह पूछे जाने पर कि ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देशों ने राज्य की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श में संशोधन किया है और इस तथ्य के आलोक में अफस्पा कानून को आंशिक रूप से हटाए जाने में क्या कुछ गलत है, शिंदे ने कहा, ‘ऐसा किए जाने में कुछ भी गलत नहीं है।’
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य के कुछ हिस्सों से आंशिक तौर पर अफस्पा हटाने का मुद्दा उठाया है। इन हिस्सों में कश्मीर क्षेत्र से बड़गाम और श्रीनगर तथा जम्मू क्षेत्र से जम्मू और सांबा जिले शामिल हैं। बातचीत प्रक्रि या पर शिंदे ने हुर्रियत कान्फ्रेंस सहित राज्य के अलगाववादियों से मिलने की इच्छा जताई और कहा, ‘उसमें क्या बुराई है। वे भी भारत में रहते हैं और उनमें से कुछ विधायक भी थे। मैं समझना चाहता हूं कि वास्तव में वे क्या चाहते हैं।’
सैयद अली शाह गिलानी 1987 में विधायक थे जबकि अन्य राजनीतिक संगठन मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट से जुड़े थे जिसने उसी साल चुनाव लड़ा था। शिंदे ने कहा कि अलगाववादियों को आगे आना चाहिए और युवा पीढ़ी की बेहतरी, उनकी शिक्षा, कल्याण और बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करना चाहिए। केंद्र राज्य में विकास के लिए काम कर रहा है। जम्मू-कश्मीर की अपनी हालिया यात्रा के बारे में शिंदे ने कहा कि स्थिति सुधर रही है। ‘मैं वहां लाल चौक गया और एक निजी कार में मुख्यमंत्री के साथ कुछ खरीददारी भी की। मैंने वहां उतर कर अपनी बेटी के लिए कुछ कपड़े खरीदे जो महाराष्ट्र में विधायक है और मैं तथा मुख्यमंत्री एक शापिंग माल गए और खुले क्षेत्र में आइसक्रीम ली।’
शिंदे श्रीनगर से 28 किलोमीटर दूर बड़गाम जिले में स्थित चरार ए शरीफ जाने वाले पहले गृहमंत्री हैं। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान लोगों के उत्साह और एक अस्थायी मंच से उन्हें संबोधित करने के उनके अनुरोध को याद किया। उन्होंने कहा, ‘लोग अपनी शिकायतों का निबटारा और एक बेहतर भविष्य चाहते हैं।’ मस्त गुल ने 1995 में इस पवित्र स्थल को नष्ट कर दिया था। इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार ने इसका तथा इससे लगे 700 घरों का पुनर्निर्माण कराया जो आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में क्षतिग्रस्त हो गए थे।
1.       Rashtirya sahara National Edition 21-11-2012 (vkradokn)

केंद्र कश्मीर में लंबे समय तक सेना नहीं रखना चाहता
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शिंदे ने कहा, विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून हटाने के बारे में फैसला कुछ समय बाद
नई दिल्ली (एजेंसी)। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि केंद्र ‘लंबे समय तक’ कश्मीर में सेना नहीं रखना चाहता। लेकिन विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) हटाने के बारे में कोई फैसला कुछ समय बाद ही किया जाएगा। वह हुर्रियत कांफ्रेंस सहित राज्य के विभिन्न अलगाववादी नेताओं से भी मिलना चाहते हैं ताकि ‘यह समझा जा सके कि वे वास्तव में क्या चाहते हैं।’ शिंदे ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि सेना को लंबे समय तक रखा जाए। निश्चित रूप से सुरक्षा में कमी की जानी चाहिए लेकिन यह उचित समय नहीं है। हमें अब भी कुछ समय तक नजर रखनी होगी।’जुलाई में गृह मंत्रालय का जिम्मा संभालने के बाद शिंदे पिछले महीने जम्मू-कश्मीर गए थे। उनसे सुरक्षा बलों की गतिविधियों में कमी किए जाने के संबंध में सवाल किए गए थे। उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि श्रीनगर और जम्मू शहर के बाहरी हिस्से में हुए हालिया हमले सुरक्षा बलों की शक्ति में कमी किए जाने में बाधा साबित हो रहे हैं। सुरक्षा बलों में जल्दी कटौती किए जाने के रास्ते में आने वाली संभावित बाधाओं का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि हमारे पास आज भी कुछ सूचनाएं हैं। बार और होटल पर हालिया हमले .. ये सब छिटपुट घटनाएं हैं लेकिन फिर भी हमें काफी सावधान रहना होगा। यह पूछे जाने पर कि ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देशों ने राज्य की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श में संशोधन किया है और इस तथ्य के आलोक में अफस्पा कानून को आंशिक रूप से हटाए जाने में क्या कुछ गलत है, शिंदे ने कहा, ‘ऐसा किए जाने में कुछ भी गलत नहीं है।’
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य के कुछ हिस्सों से आंशिक तौर पर अफस्पा हटाने का मुद्दा उठाया है। इन हिस्सों में कश्मीर क्षेत्र से बड़गाम और श्रीनगर तथा जम्मू क्षेत्र से जम्मू और सांबा जिले शामिल हैं। बातचीत प्रक्रि या पर शिंदे ने हुर्रियत कान्फ्रेंस सहित राज्य के अलगाववादियों से मिलने की इच्छा जताई और कहा, ‘उसमें क्या बुराई है। वे भी भारत में रहते हैं और उनमें से कुछ विधायक भी थे। मैं समझना चाहता हूं कि वास्तव में वे क्या चाहते हैं।’
सैयद अली शाह गिलानी 1987 में विधायक थे जबकि अन्य राजनीतिक संगठन मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट से जुड़े थे जिसने उसी साल चुनाव लड़ा था। शिंदे ने कहा कि अलगाववादियों को आगे आना चाहिए और युवा पीढ़ी की बेहतरी, उनकी शिक्षा, कल्याण और बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करना चाहिए। केंद्र राज्य में विकास के लिए काम कर रहा है। जम्मू-कश्मीर की अपनी हालिया यात्रा के बारे में शिंदे ने कहा कि स्थिति सुधर रही है। ‘मैं वहां लाल चौक गया और एक निजी कार में मुख्यमंत्री के साथ कुछ खरीददारी भी की। मैंने वहां उतर कर अपनी बेटी के लिए कुछ कपड़े खरीदे जो महाराष्ट्र में विधायक है और मैं तथा मुख्यमंत्री एक शापिंग माल गए और खुले क्षेत्र में आइसक्रीम ली।’
शिंदे श्रीनगर से 28 किलोमीटर दूर बड़गाम जिले में स्थित चरार ए शरीफ जाने वाले पहले गृहमंत्री हैं। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान लोगों के उत्साह और एक अस्थायी मंच से उन्हें संबोधित करने के उनके अनुरोध को याद किया। उन्होंने कहा, ‘लोग अपनी शिकायतों का निबटारा और एक बेहतर भविष्य चाहते हैं।’ मस्त गुल ने 1995 में इस पवित्र स्थल को नष्ट कर दिया था। इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार ने इसका तथा इससे लगे 700 घरों का पुनर्निर्माण कराया जो आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में क्षतिग्रस्त हो गए थे।
1.       Rashtirya sahara National Edition 21-11-2012 (vkradokn)

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