Friday, November 30, 2012

जनवरी को तय होगी आतंकी हेडली की सजा


शिकागो, प्रेट्र : मंुबई हमलों (26/11) में अपनी भूमिका स्वीकार चुकेलश्कर आतंकी डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी को अगले साल 17 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। जबकि उसके सहयोगी पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा को 15 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। इससे पहले राणा को सजा सुनाने की तारीख चार दिसंबर मुकर्रर की गई थी। शिकागो कोर्ट के प्रवक्ता रैंडल सैमबोर्न ने बताया कि अमेरिकी जिला जज हैरी लेनिनवेबर दोनों आतंकियों को सजा सुनाएंगे। पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी हेडली को मुंबई हमलों की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया है। पिछले साल अदालत ने राणा को 26/11 हमलों में शामिल होने के आरोपों से बरी कर दिया था। मगर लश्कर-ए-तैयबा को साजो-सामान उपलब्ध कराने और पैगंबर मुहम्मद का कार्टून प्रकाशित करने वाले डेनमार्क के एक अखबार पर हमले की साजिश रचने का दोषी दोषी ठहराया था। 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। 26/11 से पहले मुंबई के विभिन्न ठिकानों की रेकी करने वाला 52 वर्षीय हेडली अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी (एफबीआइ) द्वारा लगाए लगे सभी 12 आरोपों में दोषी ठहराया गया है। इन 12 आरोपों में छह आरोप भारत में सार्वजनिक स्थान पर बम विस्फोट करने, भारत और डेनमार्क में लोगों की हत्या और विकलांग बनाने, विदेशी आतंकवादियों की मदद, लश्कर को साजो सामान उपलब्ध कराने और भारत में छह अमेरिकी नागरिकों की हत्या से संबंधित हैं। अदालत ने हेडली को 18 मार्च, 2010 को सभी आरोपों का दोषी ठहराया था। भारत में सार्वजनिक स्थानों पर बम विस्फोट की साजिश रचने और वहां पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या से संबंधित आरोपों के लिए उसे मौत की सजा मिल सकती थी, लेकिन एफबीआइ के साथ हुए प्ली बार्गेन (अपराध कबूलने के लिए की गई सौदेबाजी) के कारण वह इससे बच सकता है। ज्ञात हो कि संघीय जांच एजेंसी एफबीआई की जांच में डेविड हेडल पर बारहों मामलों में दोषी पाया गया है। अब डेविड हेडली को इन आरोपों के आधार पर ही सजा सुनाई जाएगी। राणा को ज्यूरी ने 10 जून, 2011 को दोषी ठहराया था। उसने खुद को सभी मामलों से बरी किए जाने और फिर से मुकदमा चलाए जाने का आग्रह किया था, जिसे खारिज कर दिया गया था हेडली के प्रत्यर्पण पर जल्द फैसला लेगा अमेरिका नई दिल्ली: डेविड कोलमैन हेडली को भारत प्रत्यर्पित करने के मामले पर अमेरिका जल्द फैसला लेने वाला है। अमेरिका के राजनीतिक मामलों के उपमंत्री वेंडी शर्मन ने इसके संकेत दिए हैं। वहीं, भारत इस बात को लेकर आशावान है कि अमेरिका उसके हक में फैसला लेगा। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय और अमेरिका के न्याय विभाग के प्रतिनिधियों के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के लिए बैठक की योजना बनाई जा रही है। इस दौरान हेडली और तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण के मसले पर भी चर्चा होगी। भारत के जांच अधिकारी हेडली से पूछताछ कर चुके हैं, लेकिन पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी हुसैन राणा तक अभी तक भारतीय एजेंसियां नहीं पहुंच सकी हैं। इन दोनों के अलावा भारत ने हेडली की पत्नी शाजिया, गर्लफ्रेंड पोर्टिया पीटर और एक अन्य महिला से पूछताछ के लिए भी अमेरिकी सरकार से गुहार लगाई है।
Dainik Jagran National Edition 30-11-2012 Page-7 vkradokn)


Wednesday, November 21, 2012

केंद्र कश्मीर में लंबे समय तक सेना नहीं रखना चाहता





शिंदे ने कहा, विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून हटाने के बारे में फैसला कुछ समय बाद
नई दिल्ली (एजेंसी)। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि केंद्र ‘लंबे समय तक’ कश्मीर में सेना नहीं रखना चाहता। लेकिन विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) हटाने के बारे में कोई फैसला कुछ समय बाद ही किया जाएगा। वह हुर्रियत कांफ्रेंस सहित राज्य के विभिन्न अलगाववादी नेताओं से भी मिलना चाहते हैं ताकि ‘यह समझा जा सके कि वे वास्तव में क्या चाहते हैं।’ शिंदे ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि सेना को लंबे समय तक रखा जाए। निश्चित रूप से सुरक्षा में कमी की जानी चाहिए लेकिन यह उचित समय नहीं है। हमें अब भी कुछ समय तक नजर रखनी होगी।’जुलाई में गृह मंत्रालय का जिम्मा संभालने के बाद शिंदे पिछले महीने जम्मू-कश्मीर गए थे। उनसे सुरक्षा बलों की गतिविधियों में कमी किए जाने के संबंध में सवाल किए गए थे। उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि श्रीनगर और जम्मू शहर के बाहरी हिस्से में हुए हालिया हमले सुरक्षा बलों की शक्ति में कमी किए जाने में बाधा साबित हो रहे हैं। सुरक्षा बलों में जल्दी कटौती किए जाने के रास्ते में आने वाली संभावित बाधाओं का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि हमारे पास आज भी कुछ सूचनाएं हैं। बार और होटल पर हालिया हमले .. ये सब छिटपुट घटनाएं हैं लेकिन फिर भी हमें काफी सावधान रहना होगा। यह पूछे जाने पर कि ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देशों ने राज्य की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श में संशोधन किया है और इस तथ्य के आलोक में अफस्पा कानून को आंशिक रूप से हटाए जाने में क्या कुछ गलत है, शिंदे ने कहा, ‘ऐसा किए जाने में कुछ भी गलत नहीं है।’
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य के कुछ हिस्सों से आंशिक तौर पर अफस्पा हटाने का मुद्दा उठाया है। इन हिस्सों में कश्मीर क्षेत्र से बड़गाम और श्रीनगर तथा जम्मू क्षेत्र से जम्मू और सांबा जिले शामिल हैं। बातचीत प्रक्रि या पर शिंदे ने हुर्रियत कान्फ्रेंस सहित राज्य के अलगाववादियों से मिलने की इच्छा जताई और कहा, ‘उसमें क्या बुराई है। वे भी भारत में रहते हैं और उनमें से कुछ विधायक भी थे। मैं समझना चाहता हूं कि वास्तव में वे क्या चाहते हैं।’
सैयद अली शाह गिलानी 1987 में विधायक थे जबकि अन्य राजनीतिक संगठन मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट से जुड़े थे जिसने उसी साल चुनाव लड़ा था। शिंदे ने कहा कि अलगाववादियों को आगे आना चाहिए और युवा पीढ़ी की बेहतरी, उनकी शिक्षा, कल्याण और बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करना चाहिए। केंद्र राज्य में विकास के लिए काम कर रहा है। जम्मू-कश्मीर की अपनी हालिया यात्रा के बारे में शिंदे ने कहा कि स्थिति सुधर रही है। ‘मैं वहां लाल चौक गया और एक निजी कार में मुख्यमंत्री के साथ कुछ खरीददारी भी की। मैंने वहां उतर कर अपनी बेटी के लिए कुछ कपड़े खरीदे जो महाराष्ट्र में विधायक है और मैं तथा मुख्यमंत्री एक शापिंग माल गए और खुले क्षेत्र में आइसक्रीम ली।’
शिंदे श्रीनगर से 28 किलोमीटर दूर बड़गाम जिले में स्थित चरार ए शरीफ जाने वाले पहले गृहमंत्री हैं। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान लोगों के उत्साह और एक अस्थायी मंच से उन्हें संबोधित करने के उनके अनुरोध को याद किया। उन्होंने कहा, ‘लोग अपनी शिकायतों का निबटारा और एक बेहतर भविष्य चाहते हैं।’ मस्त गुल ने 1995 में इस पवित्र स्थल को नष्ट कर दिया था। इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार ने इसका तथा इससे लगे 700 घरों का पुनर्निर्माण कराया जो आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में क्षतिग्रस्त हो गए थे।
1.       Rashtirya sahara National Edition 21-11-2012 (vkradokn)

केंद्र कश्मीर में लंबे समय तक सेना नहीं रखना चाहता
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शिंदे ने कहा, विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून हटाने के बारे में फैसला कुछ समय बाद
नई दिल्ली (एजेंसी)। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि केंद्र ‘लंबे समय तक’ कश्मीर में सेना नहीं रखना चाहता। लेकिन विवादित सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) हटाने के बारे में कोई फैसला कुछ समय बाद ही किया जाएगा। वह हुर्रियत कांफ्रेंस सहित राज्य के विभिन्न अलगाववादी नेताओं से भी मिलना चाहते हैं ताकि ‘यह समझा जा सके कि वे वास्तव में क्या चाहते हैं।’ शिंदे ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि सेना को लंबे समय तक रखा जाए। निश्चित रूप से सुरक्षा में कमी की जानी चाहिए लेकिन यह उचित समय नहीं है। हमें अब भी कुछ समय तक नजर रखनी होगी।’जुलाई में गृह मंत्रालय का जिम्मा संभालने के बाद शिंदे पिछले महीने जम्मू-कश्मीर गए थे। उनसे सुरक्षा बलों की गतिविधियों में कमी किए जाने के संबंध में सवाल किए गए थे। उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि श्रीनगर और जम्मू शहर के बाहरी हिस्से में हुए हालिया हमले सुरक्षा बलों की शक्ति में कमी किए जाने में बाधा साबित हो रहे हैं। सुरक्षा बलों में जल्दी कटौती किए जाने के रास्ते में आने वाली संभावित बाधाओं का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि हमारे पास आज भी कुछ सूचनाएं हैं। बार और होटल पर हालिया हमले .. ये सब छिटपुट घटनाएं हैं लेकिन फिर भी हमें काफी सावधान रहना होगा। यह पूछे जाने पर कि ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देशों ने राज्य की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श में संशोधन किया है और इस तथ्य के आलोक में अफस्पा कानून को आंशिक रूप से हटाए जाने में क्या कुछ गलत है, शिंदे ने कहा, ‘ऐसा किए जाने में कुछ भी गलत नहीं है।’
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य के कुछ हिस्सों से आंशिक तौर पर अफस्पा हटाने का मुद्दा उठाया है। इन हिस्सों में कश्मीर क्षेत्र से बड़गाम और श्रीनगर तथा जम्मू क्षेत्र से जम्मू और सांबा जिले शामिल हैं। बातचीत प्रक्रि या पर शिंदे ने हुर्रियत कान्फ्रेंस सहित राज्य के अलगाववादियों से मिलने की इच्छा जताई और कहा, ‘उसमें क्या बुराई है। वे भी भारत में रहते हैं और उनमें से कुछ विधायक भी थे। मैं समझना चाहता हूं कि वास्तव में वे क्या चाहते हैं।’
सैयद अली शाह गिलानी 1987 में विधायक थे जबकि अन्य राजनीतिक संगठन मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट से जुड़े थे जिसने उसी साल चुनाव लड़ा था। शिंदे ने कहा कि अलगाववादियों को आगे आना चाहिए और युवा पीढ़ी की बेहतरी, उनकी शिक्षा, कल्याण और बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करना चाहिए। केंद्र राज्य में विकास के लिए काम कर रहा है। जम्मू-कश्मीर की अपनी हालिया यात्रा के बारे में शिंदे ने कहा कि स्थिति सुधर रही है। ‘मैं वहां लाल चौक गया और एक निजी कार में मुख्यमंत्री के साथ कुछ खरीददारी भी की। मैंने वहां उतर कर अपनी बेटी के लिए कुछ कपड़े खरीदे जो महाराष्ट्र में विधायक है और मैं तथा मुख्यमंत्री एक शापिंग माल गए और खुले क्षेत्र में आइसक्रीम ली।’
शिंदे श्रीनगर से 28 किलोमीटर दूर बड़गाम जिले में स्थित चरार ए शरीफ जाने वाले पहले गृहमंत्री हैं। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान लोगों के उत्साह और एक अस्थायी मंच से उन्हें संबोधित करने के उनके अनुरोध को याद किया। उन्होंने कहा, ‘लोग अपनी शिकायतों का निबटारा और एक बेहतर भविष्य चाहते हैं।’ मस्त गुल ने 1995 में इस पवित्र स्थल को नष्ट कर दिया था। इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार ने इसका तथा इससे लगे 700 घरों का पुनर्निर्माण कराया जो आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में क्षतिग्रस्त हो गए थे।
1.       Rashtirya sahara National Edition 21-11-2012 (vkradokn)

Sunday, November 4, 2012

रिक्शा चालक बन आगरा में रहा आतंकी कमांडर



ठ्ठ जागरण संवाददाता, आगरा दिल्ली में स्पेशल सेल के हत्थे चढ़ा मणिपुर के प्रतिबंधित संगठन कांग्लीपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) का कमांडर इन चीफ आगरा में लोडिंग रिक्शा चलाता था। करीब छह माह से वह शहर के बाहरी इलाके की एक बस्ती में झोपड़ी में रह रहा था। यहीं से नेटवर्क संचालित कर रहा था। जैसे ही खुफिया तंत्र को उसकी मौजूदगी की भनक लगी, वह चकमा देकर फरार हो गया। प्रतिबंधित संगठन के कमांडर इन चीफ निग्थोजम रोमेन सिंह उर्फ आरके उर्फ रॉकी की लंबे समय से तलाश चल रही थी। सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए पहले वह नेपाल भागा, उसके बाद गोवा, फिर आगरा में शरण ली। खुफिया सूत्रों के मुताबिक वह यहां एत्माद्दौला थाना क्षेत्र की गढ़ी चांदनी में अपना ठिकाना बनाया। किराए का घर लेने पर उसकी एक्टिविटी लोगों को पता लगती और शक होता, इसलिए उसने खाली जगह में झोपड़ी डाली। उसमें खाने के सामान के साथ एक लोडिंग रिक्शा रखता था। इससे वह नुनिहाई स्थित एक फैक्ट्री में सामान को लाने- ले जाने का काम करता था। शातिराना स्वभाव के चलते उसने स्थानीय लोगों को अपनी हरकतों की भनक तक न लगने दी। पिछले दिनों संगठन के सदस्यों ने मणिपुर में दो सरकारी अधिकारियों का अपहरण कर लिया, उनकी रिहाई के बदले दो करोड़ की फिरौती मांगी गई। उस समय सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन आगरा मिली थी। इसके बाद खुफिया तंत्र उसके पीछे लगा, रॉकी को भी अपने घेरे जाने का अंदेशा हुआ और वह फरार हो गया। दिल्ली में उसके कब्जे से पांच मोबाइल फोन, 16 सिम कार्ड, दो पेन ड्राइव, लैपटॉप और प्रतिबंधित संगठन की सीडी मिली हैं। अब खुफिया तंत्र आगरा में रहने के दौरान उसकी हरकतों के बारे में जानकारी खोजने में जुटा है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक रॉकी का परिवार आगरा से 55 किलोमीटर दूर राजस्थान के भरतपुर में कई महीने तक रहा। रॉकी आगरा से उनसे मिलने जाता रहा। बाद में उसका परिवार वहां से चला गया।

 Dainik Jagran National Edition 4-11-2012 vkradokn Page -5