Sunday, March 6, 2011

कश्मीर में आतंक के कारण खोजेगा आयोग


जम्मू मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने कश्मीर के लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए ट्रुथ एंड रिकंसिलिएशन कमीशन(टीआरसी) बनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस आयोग के जरिये यह पता लगाया जाएगा कि राज्य में मौतों, तबाही और आतंक के लिए कौन जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस संबंध में जल्द ही विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर उसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। यह एक ऐसा कमीशन होगा जिसका जम्मू-कश्मीर की सियासत से कोई लेना-देना नहीं होगा। ज्ञात हो कि अशांति-अव्यवस्था के दौर की सच्चाई जानने और मेल-मिलाप की प्रक्रिया शुरू करने के उद्देश्य से अब तक अनेक देशों में ट्रुथ एंड रिकंसिलिएशन कमीशन गठित किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक चर्चित रहा था दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला द्वारा गठित किया गया आयोग। इस आयोग का उद्देश्य रंगभेद दौर के अत्याचारों को सामने लाना था। राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उमर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर न तो मिस्र है, न ही लीबिया और न ही टयूनीशिया। मेरी उम्र चालीस वर्ष नहीं हुई है और पिछले नौ वर्षों में मैं चौथा सीएम हूं। कुछ लोग नौजवानों को गुमराह कर रहे हैं। नौजवान गुमराह न हों, पत्थर मारने या हड़ताल करने की जरूरत नहीं। जब आप मुझे खड़े होकर कहोगे, मैं कुर्सी छोड़ दूंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय-समय पर बात उठती है कि हजारों नौजवान गायब हैं, कई हिरासत में मारे गए हैं, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद कब शुरू हुआ, किन हालात ने कश्मीरी पंडितों को घाटी से भागने पर मजबूर किया.। अब वक्त आ गया है कि लोगों को इन सवालों का जवाब मिले और सच का पता चले। विपक्ष की अनुपस्थिति में मुख्यमंत्री पीडीपी पर भी जमकर बरसे। उमर ने कहा कि राज्य में आतंकवाद कम हुआ है। सरकार का नौजवानों को तंग करने का इरादा नहीं है। श्रीनगर से चालीस बंकर उठाए गए हैं। सीआरपीएफ की दो बटालियन कम हुई हैं। आतंकियों की पुनर्वास नीति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि छह सौ से अधिक आवेदन आए हैं, जिन पर जांच चल रही है। वह दिन दूर नहीं जब सीमा पार ट्रेनिंग के लिए गए आतंकी लौटकर मुख्य धारा में जीवन व्यतीत करेंगे।

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