Wednesday, October 30, 2013

वाराणसी, मुंबई और बोधगया में खुद बम प्लांट किए थे तहसीन ने

पंकज त्यागी, नई दिल्लीः पटना सीरियल बम ब्लास्ट केस में वॉन्टेड तहसीन अख्तर उर्फ मोनू ने वाराणसी और मुंबई में खुद बम प्लांट कर सीरियल बम धमाके कराए थे। रिमांड पर यासीन ने पुलिस को बताया है कि तहसीन अख्तर भाग कर नेपाल में जा सकता है। यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में बैठे इंडियन मुजाहिदीन के सरगनाओं ने भारत में की जाने वाले आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी तहसीन अख्तर को दी थी।

नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान पटना में हुए सीरियल बम धमाकों के केस की जांच कर रही एनआईए की टीम को गिरफ्तार मुलजिम इम्तियाज अंसारी ने कई अहम जानकारियां दी हैं। एनआईए सूत्रों के अनुसार, इम्तियाज अंसारी ने बताया कि 7 दिसंबर 2010 को वाराणसी में हुए सीरियल बम धमाकों में बम प्लांट करने तहसीन गया था। उसने शीतला घाट पर बम प्लांट किया था। उस दौरान एक विदेशी टूरिस्ट वहां वीडियो बना रहा था। पुलिस को उस वीडियो में एक युवक बैग लेकर घाट पर जाते हुए और खाली हाथ वापस आते हुए नजर आया था, लेकिन तब उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी थी। अगस्त में यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद तहसीन के बारे में जानकारी मिली तो एनआईए ने उस वीडियो को फिर से चेक किया था।

एनआईए के अफसरों के मुताबिक, 'उस फुटेज में नजर आ रहा युवक तहसीन अख्तर ही है। वाराणसी में बम प्लांट करने के दौरान वह यासीन भटकल की सरपरस्ती में था।' इम्तियाज अंसारी ने एनआईए को यह भी बताया है कि तहसीन ने 13 जुलाई 2011 को मुंबई में झावेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में हुए सीरियल बम धमाकों में भी बम प्लांट किया था। इम्तियाज के मुताबिक, तहसीन अख्तर को यासीन भटकल उर्फ अहमद सिद्दीबापा ने मुंबई में बुलाया था। इसके बाद तहसीन ने इस साल सात जुलाई को बोधगया के महाबोधि मंदिर में बम धमाके किए

इम्तियाज का बयान है कि बोधगया में भी बम प्लांट करने तहसीन गया था। एनआईए को यह जानकारी भी मिली है कि नरेंद्र मोदी की रैली में भगदड़ मचाकर सैकडों लोगों की जानें लेने की साजिश तैयार करने के बाद अपने ग्रुप के साथ तहसीन भी पटना आया था। बम धमाके होने के बाद वह फरार हो गया था। उसके साथ उसका सबसे भरोसेमेंद साथी वकास भी भागने में कामयाब रहा था। दूसरी ओर, बम में टाइमर फिट करने के दौरान हुए धमाके में साथी की मौत के बाद भाग रहे इम्तियाज को पुलिस ने दबोच लिया था। तहसीन पर एनआईए ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ है।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बुधवार को यासीन भटकल से तहसीन अख्तर के बारे में पूछताछ की। यासीन ने पुलिस को बताया कि तहसीन अख्तर भाग कर नेपाल में जा सकता है। तहसीन नेपाल में यासीन के ठिकानों के बारे में जानता था। एनआईए इस मामले में नेपाल की पुलिस से सहयोग ले सकती है। एनआईए ने नेपाल पुलिस के सहयोग से ही यासीन भटकल को गिरफ्तार किया था। 


NBT 31-10-2013 E News 

भारतीय सीमा में फिर से प्रवेश कर चुका है खुंखार आतंकी डॉ.शाहनवाज!

नई दिल्ली: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की समस्या बढऩे वाली है और उन्हें अब एक और बड़े आतंकवादी डॉ. शाहनवाज की भी खोज करनी पड़ेगी। आतंक विरोधी दस्ता (एटीएस) के सूत्रों के मुताबिक मोनू के कार्यों को अपने हाथों में लेने के लिए डॉ. शाहनवाज भारत में प्रवेश कर चुका है।

शाहनवाज इंडियन मुजाहिदीन का एक बड़ा आतंकी है, जो सितंबर 2008 के आतंकी घटना के बाद से फरार है। इसे आईईडी का एक्स्पर्ट माना जाता है। साथ ही इसे सिमी और आईएम के बीच एक लिंक भी माना जाता है। शाहनवाज फर्जी पासपोर्ट के सहारे भारत से नेपाल भाग गया था। नेपाल भागने के बाद शाहनवाज वहां से शारजाह चला गया था। इस पर भारत में आईएम के लिए आतंकियों की भर्ती की जिम्मेदारी भी रही है। पटना सीरियल ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।
  Panjab keshri , 30-10-2013  Aatankvad

Patna main hunkar se phele dhamake


Thursday, January 31, 2013

उप्र में आतंकवाद की आड़ में बंद मुस्लिमों की रिहाई जल्द




ठ्ठजागरण ब्यूरो, लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र में स्पष्ट तौर यह वादा किया था कि दहशतगर्दी के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में प्रदेश के जिन बेकसूर मुस्लिमों नौजवानों को जेलों में डाला गया है उन्हें रिहा कराया जाएगा। साथ ही उनके पुनर्वास के लिए मुआवजे के साथ इंसाफ भी दिया जाएगा। चुनाव घोषणा पत्र के सभी वादों को पूरा करने के लिए सरकार कृत संकल्पित हैं।इस संबंध में कार्रवाई शुरू भी हो गई है। मुख्यमंत्री ने यह आश्र्वासन मंगलवार को माकपा नेताओं को दिया। माकपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश करात और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने मंगलवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर अदालत से निर्दोष घोषित हुए आतंकी आरोपियों को पुनर्वासित करने की मांग की थी। माकपा नेताओं ने मुख्यमंत्री को नौ मुस्लिम युवाओं का विवरण देते हुए बताया कि पुलिस ने इन्हें आतंकी होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इनके नाम वासिफ हैदर, शफाअत रसूल हाजी अतीक (सभी कानपुर निवासी) हैं। इनको आठ-आठ वर्ष का समय जेल में बिताना पड़ा। कानपुर के ही मुमताज अहमद को नौ वर्ष जेल में बिताने पड़े। अदालत में पुलिस इन्हें आतंकी साबित नहीं कर पाई, जिसके बाद इनकी रिहाई हुई। सवाल यह है कि निर्दोष होने के बावजूद उनको आतंकी होने के आरोप में जो वर्ष जेल में काटने पड़े, उसकी भरपाई कैसे मुमकिन है? मुख्यमंत्री ने आश्र्वस्त किया कि सरकार इस मामले में गंभीर है और निर्दोष लोगों को राहत दिलाने तथा केस वापस लेने में उसकी उचित भूमिका रहेगी।
 Dainik jagran National Edition 30-01-2013 Page -5 vkradokn)

Thursday, January 17, 2013

भारत में घुसपैठ के इंतजार में ढाई हजार आतंकवादी





नई दिल्ली, प्रेट्र : पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा दो भारतीय सैनिकों की हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जारी जबर्दस्त तनाव के बीच ढाई हजार से अधिक आतंकवादी भारत में घुसपैठ की ताक में बैठे हैं। खुफिया रिपोर्टो के मुताबिक, गुलाम कश्मीर और पाकिस्तान के दूसरे इलाकों में चल रहे शिविरों में प्रशिक्षित ये आतंकवादी सीमा पार कर भारत में घुसने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्टो के बाद गृह मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और सीमा पर चौकसी कड़ी बरतने का निर्देश दिया है। खुफिया रिपोर्टो में कहा गया है कि सीमा पार 42 आतंकी प्रशिक्षण शिविर चल रहे हैं। इनमें से 25 शिविर गुलाम कश्मीर और 17 शिविर पाकिस्तान के दूसरे इलाकों में चल रहे हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, प्रशिक्षण पाने के बाद हथियार और गोलाबारूद से लैस 2500 आतंकवादी घुसपैठ के लिए मौके का इंतजार कर रहे हैं। इस साल देश में कम से कम 90 आतंकवादी घुसपैठ कर चुके हैं जो पिछले वर्षो की तुलना में सबसे अधिक है। वर्ष 2009 में 69 और 2010 में 94 घुसपैठिए देश में घुसने में कामयाब हुए थे। जबकि 2011 में 63 आतंकवादियों ने सीमा पार से देश में घुसपैठ की थी। इसके अलावा करीब 125 आतंकियों को जम्मू-कश्मीर से घुसपैठ की कोशिश करने पर गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल के वर्षो की तुलना में इस वर्ष घुसपैठ की वारदात में बढ़ोतरी हुई है। इस साल अब तक 249 बार घुसपैठ के प्रयास किए गए। वहीं, पिछले साल 247 प्रयास किए थे। इसके अलावा 2010 में 489, वर्ष 2009 में 485 और 2008 में घुसपैठ के 348 प्रयास किए जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार आतंकियों को घुसपैठ कराने में पाकिस्तानी सेना पूरी तरह मदद करती है। उसकी ओर से शनिवार रात भर हुई गोलाबारी से यह बात और पुख्ता हुई है
1.       Dainik Jagran Naational Edition Date 14-01-2013Page-1 vkradokn